अमेरिकी एजेंसियों की कार्रवाई में गुजरात से जुड़े कारोबारियों के नाम : सूरत से अमेरिका तक फेंटेनाइल की ‘केमिकल कड़ी’! चीन की सख्ती के बाद भारत पर बढ़ी नजर
मेडिकल दवा और अवैध ड्रग के बीच फर्क समझना भी जरूरी
अमेरिका में फेंटेनाइल संकट के बीच गुजरात का सूरत शहर जांच एजेंसियों की नजर में आ गया है। अमेरिकी अधिकारियों की कार्रवाई और जांच रिपोर्टों के मुताबिक, सूरत के केमिकल कारोबार से जुड़े कुछ लोगों पर ऐसे प्रीकर्सर केमिकल की कथित आपूर्ति का आरोप है, जिनका इस्तेमाल अवैध फेंटेनाइल बनाने में किया जा सकता है। चीन की ओर से ऐसे रसायनों की सप्लाई पर बढ़ती पाबंदियों के बाद अवैध नेटवर्क के भारत की ओर रुख करने की आशंका जताई जा रही है।
पेंसिल की नोक जितना फेंटेनाइल, जान पर भारी
अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) के मुताबिक करीब 2 मिलीग्राम फेंटेनाइल एक वयस्क के लिए घातक हो सकता है। यह मात्रा बेहद छोटी होती है। फेंटेनाइल चिकित्सकीय उपयोग में आने वाला शक्तिशाली सिंथेटिक ओपिओइड है, लेकिन अवैध रूप से तैयार किया गया फेंटेनाइल अमेरिका में ओवरडोज संकट का बड़ा कारण बना हुआ है।
अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार सिंथेटिक ओपिओइड बड़ी संख्या में ओवरडोज मौतों से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि अमेरिका फेंटेनाइल के साथ-साथ इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल की सप्लाई चेन पर भी सख्ती कर रहा है।
सूरत के कारोबारियों पर गंभीर आरोप
2025 में गुजरात ATS की जांच में सूरत की एक कंपनी से जुड़े सतीशकुमार सुतारिया और युक्ता मोदी के नाम सामने आए। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि एंड-यूजर सर्टिफिकेट में कथित हेरफेर के जरिए ऐसे रसायन हासिल किए गए, जिनका इस्तेमाल फेंटेनाइल निर्माण में हो सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भी इस मामले से जुड़े व्यक्तियों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं।
एक अन्य अमेरिकी मामले में सूरत के कारोबारी भावेश लाठिया ने फेंटेनाइल प्रीकर्सर की अवैध सप्लाई और तस्करी से जुड़े आरोपों में दोष स्वीकार किया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कथित तौर पर शिपमेंट को कस्टम जांच से बचाने के लिए गलत लेबल इस्तेमाल किए गए।
चीन पर शिकंजा, भारत पर बढ़ी निगरानी
जांचकर्ताओं के अनुसार मैक्सिकन ड्रग नेटवर्क लंबे समय तक चीन से फेंटेनाइल प्रीकर्सर हासिल करते रहे। चीन में नियंत्रण बढ़ने के बाद सप्लाई के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज हुई और भारत का केमिकल उद्योग जांच के दायरे में आया।
गुजरात इस मामले में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य देश के बड़े केमिकल और फार्मास्युटिकल केंद्रों में शामिल है। मुंद्रा और पिपावाव जैसे बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुविधा देते हैं। यही बड़ा कारोबारी नेटवर्क वैध दवाओं और रसायनों की सप्लाई के साथ-साथ गलत इस्तेमाल की आशंका को भी चुनौतीपूर्ण बनाता है।
हालांकि, फेंटेनाइल स्वयं प्रतिबंधित अवैध ड्रग नहीं है। इसका वैध उपयोग गंभीर दर्द, कैंसर उपचार, एनेस्थीसिया और ट्रॉमा के इलाज में होता है। समस्या तब पैदा होती है जब इसके प्रीकर्सर या तैयार फेंटेनाइल का इस्तेमाल अवैध ड्रग नेटवर्क में किया जाता है। इसी कारण सूरत से जुड़े मामलों ने भारत की केमिकल सप्लाई चेन की निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




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