छह महीने में 7,600 से ज्यादा लोगों को कुत्तों ने काटा ! कागजों में दौड़ रहा निगम का ‘डॉग कंट्रोल कार्यक्रम, अब पंचकूला में मल्टी-एजेंसी फॉर्मूले से कुत्तों पर लगाम लगाने की तैयारी !
निगम एक एजेंसी के बजाय कई एजेंसियों को दे सकता है क्षेत्रवार जिम्मेदारी
शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या और लगातार सामने आ रहे डॉग बाइट मामलों ने नगर निगम की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगम एक ही एजेंसी के भरोसे रहने के बजाय मल्टी-एजेंसी मॉडल अपनाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में अलग-अलग एजेंसियों को क्षेत्रवार जिम्मेदारी देकर कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी और टीकाकरण का काम कराया जाएगा।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल में रोजाना करीब 20 से 22 डॉग बाइट के मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, 2026 के पहले छह महीनों में करीब 7,600 से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, वर्ष 2025 में शहर में 14 हजार से ज्यादा डॉग बाइट केस दर्ज हुए थे।
एक एजेंसी का ठेका खत्म, समस्या जस की तस
नगर निगम ने पिछले एक साल में एक एजेंसी को करीब 2,000 कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य दिया था। निगम के अनुसार एजेंसी ने लक्ष्य पूरा किया और उसे प्रति कुत्ता 1,472 रुपये का भुगतान किया गया। इसके बावजूद आवारा कुत्तों और डॉग बाइट की समस्या कम होती नजर नहीं आ रही।
निगम अधिकारियों का तर्क है कि किसी एक इलाके में नसबंदी अभियान चलाने से पूरे शहर की आबादी नियंत्रित नहीं हो सकती। इसी वजह से अब व्यापक स्तर पर Animal Birth Control (ABC) अभियान चलाने की तैयारी है।
तीन डॉग पाउंड, इस्तेमाल में फिलहाल एक
सुखदर्शनपुर गांव में निगम के पास तीन डॉग पाउंड हैं, लेकिन वर्तमान में प्रभावी रूप से एक ही इस्तेमाल हो रहा है। नए अभियान के तहत बाकी पाउंड को भी सक्रिय करने की योजना है, ताकि ज्यादा संख्या में कुत्तों को पकड़कर नसबंदी और टीकाकरण किया जा सके।
नए टेंडर में Animal Welfare Board of India (AWBI) से मान्यता प्राप्त एजेंसियों को ही पात्रता देने का प्रस्ताव है। एजेंसियों को अलग-अलग क्षेत्र आवंटित किए जाएंगे और उनके काम की निगरानी भी की जाएगी।
मेयर और पार्षदों तक पहुंच रही शिकायतें, समाधान का इंतजार
डॉग बाइट की घटनाओं को लेकर कई वार्डों से शिकायतें पार्षद , निगम और मेयर कार्यालय तक पहुंच रही हैं। इसके बावजूद जमीन पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। निगम अब फीडिंग जोन बनाने पर भी विचार कर रहा है, ताकि आवारा कुत्तों के लिए निर्धारित स्थान तय किए जा सकें और उनकी आवाजाही व संख्या का बेहतर आकलन हो सके।
अब देखना यह होगा कि नया मल्टी-एजेंसी मॉडल कागजी योजना से आगे बढ़कर जमीन पर कितना असर दिखाता है, क्योंकि 7,600 मामलों का आंकड़ा शहर में समस्या की गंभीरता साफ बता रहा है।


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