कड़े सियासी मुकाबले पर टिकी सबकी नजर : पंचकूला के वार्ड 12 में इस बार कमल खिलेगा या फिर दोहराया जाएगा इतिहास ?
नगर निगम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वार्ड नंबर 12 एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। सेक्टर-11, सेक्टर-4 का हिस्सा और हरपुर गांव को शामिल करने वाले इस नए परिसीमन वाले वार्ड में इस बार मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। सवाल यह है कि क्या इस बार इस वार्ड में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कमल खिलेगा या फिर पुराना राजनीतिक समीकरण ही एक बार फिर जीत की दिशा तय करेगा।
इस वार्ड के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो पिछले कई चुनावों में यहां से ओमवती पूनिया का दबदबा रहा है। वे लगातार चार बार विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों में जीत दर्ज कर चुकी हैं। पिछली बार उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर सभी को चौंका दिया था, जबकि भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी को दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। हालांकि बाद में राजनीतिक समीकरण बदले और ओमवती पूनिया ने भारतीय जनता पार्टी को समर्थन दिया, जिसके बाद वे पार्टी के साथ जुड़ गईं।
अब मौजूदा स्थिति में ओमवती पूनिया एक बार फिर भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं, जिससे यह माना जा रहा है कि पार्टी ने पुराने अनुभव और जमीनी पकड़ को देखते हुए उन पर भरोसा जताया है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही समीकरण बना रहा तो इस बार वार्ड में कमल खिलने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

हालांकि पार्टी के भीतर ही इस बार स्थिति पूरी तरह एकतरफा नहीं दिखाई दे रही है। कुछ अन्य स्थानीय दावेदार भी टिकट की दौड़ में सक्रिय हैं। इनका कहना है कि लंबे समय से ओमवती पूनिया ही लगातार चुनाव लड़ती आ रही हैं, जबकि पार्टी संगठन में अन्य कार्यकर्ताओं को भी अवसर मिलना चाहिए। ऐसे में टिकट वितरण को लेकर अंदरूनी खींचतान की संभावना भी सामने आ रही है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि पार्टी के भीतर सहमति नहीं बनती है तो यह वार्ड मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है। वहीं दूसरी ओर, ओमवती पूनिया की मजबूत स्थानीय पकड़, लगातार सक्रियता और मतदाताओं के बीच पहचान उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार के रूप में स्थापित करती है।
उनके पारिवारिक समर्थन की भी चर्चा क्षेत्र में बनी रहती है। उनके पति सुखबीर पूनिया, जो पहले सरकारी सेवा में कार्यरत थे और अब सेवानिवृत्त होकर सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हैं, चुनावी कार्यक्रमों में लगातार साथ नजर आते हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा रहती है कि राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में यह जोड़ी लगातार सक्रिय रहती है, जिससे उनका जनसंपर्क और मजबूत हुआ है।
वार्ड 12 में इस बार चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म होता दिख रहा है। एक ओर पुराने अनुभव और स्थापित चेहरा है, तो दूसरी ओर पार्टी के भीतर नए दावेदारों की उम्मीदें भी जुड़ी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि आगामी दिनों में टिकट की स्थिति क्या रहती है और मतदाता किस ओर अपना भरोसा जताते हैं। क्या इस बार वार्ड 12 में वाकई कमल खिल पाएगा या फिर पुराना राजनीतिक समीकरण ही एक बार फिर जीत का रास्ता तय करेगा, इसका जवाब आने वाला चुनाव ही देगा।




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