पूरे घर के बल्ब बदल डालूंगा की तर्ज पर बीजेपी निगम चुनाव में बदलाव की चर्चा तेज
पंचकूला निगम चुनाव से पहले भाजपा में मंथन शुरू
पूरे घर के बल्ब बदल डालूंगा की तर्ज पर बीजेपी निगम चुनाव में बदलाव की चर्चा तेज
1990 के दशक में टेलीविजन की दुनिया में एक विज्ञापन खूब चर्चा में रहा करता था, जिसमें एक व्यक्ति घर का एक खराब बल्ब बदलने के लिए दुकान पर जाता है। दुकानदार एक खास कंपनी के बल्ब की इतनी तारीफ करता है कि वह व्यक्ति मजाकिया अंदाज में कह उठता है—“पूरे घर के बल्ब बदल डालूंगा।” पंचकूला नगर निगम चुनाव से पहले भाजपा की तैयारियों को लेकर राजनीतिक गलियारों में कुछ इसी तरह की चर्चा सुनने को मिल रही है। कहा जा रहा है कि पार्टी कुछ पार्षदों को लेकर आई शिकायतों के बाद केवल कुछ नहीं बल्कि अपने कोटे ( वर्तमान पार्षदों ) के लगभग सभी पार्षदों को बदलने का मन बना सकती है।
पंचकूला में नगर निगम चुनाव की सरगर्मियां तेज होते ही सत्तारूढ़ दल भाजपा के भीतर टिकट वितरण को लेकर गहन मंथन चल रहा है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व के पास कुछ मौजूदा पार्षदों की कार्यशैली और क्षेत्र में असंतोष से जुड़ी शिकायतें पहुंची हैं। पार्टी के आंतरिक फीडबैक में भी कुछ वार्डों में स्थिति अनुकूल न होने की जानकारी सामने आई है। इसी कारण संगठन यह सोच-विचार कर रहा है कि यदि उन्हीं चेहरों को दोबारा टिकट दिया गया तो चुनाव में नुकसान हो सकता है।
सूत्र बताते हैं कि शिकायतें भले ही कुछ पार्षदों को लेकर आई हों, लेकिन संगठन व्यापक बदलाव का विकल्प भी खुला रखे हुए है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा इस बार अपने कोटे के अधिकांश या सभी वार्डों में नए चेहरों को मौका देने का साहसिक फैसला कर सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अंदरखाने तैयारियां इसी संबंध में तेज बताई जा रही हैं।
इसी बीच एक और दिलचस्प चर्चा भी भाजपा के भीतर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर तो महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगी ही, लेकिन जनरल सीटों पर किसी भी महिला को टिकट न देने की पैरवी भी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार पंचकूला के दो बड़े और प्रभावशाली नेता इस प्रस्ताव के समर्थन में सक्रिय हैं और इसे लागू करवाने के लिए चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक संगठन के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क साध रहे हैं।
बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं का मानना है कि यदि जनरल सीटों पर महिलाओं को टिकट नहीं दिया जाता तो यह उनके लिए बड़ी रणनीतिक जीत साबित होगी। यदि भाजपा ऐसा कोई नियम लागू करती है तो उन महिला नेताओं को सबसे बड़ा झटका लग सकता है, जो इन दिनों जनरल सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करते हुए सक्रिय रूप से प्रचार कर रही हैं।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का यह भी कहना है कि इन दो नेताओं में से एक नेता जी का कुछ मौजूदा महिला पार्षदों के साथ लंबे समय से मतभेद चल रहा है। बताया जाता है कि इन महिला पार्षदों के साथ उनका “छत्तीस का आंकड़ा” है और इसी कारण वे अंदरूनी तौर पर उनसे नाराज भी बताए जाते हैं। ऐसे में जनरल सीटों पर महिलाओं को टिकट न देने की मुहिम को इसी राजनीतिक समीकरण से जोड़कर भी देखा जा रहा है। और तो और पूरे घर के बल्ब बदल डालूंगा , का आईडिया भी इन्हीं नेताजी ने संगठन तक पहुंचा दिया है।
नेताजी के करीबी सूत्रों का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव सफल हो जाता है तो नेताजी इसे अपनी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानेंगे। यहां तक कहा जा रहा है कि अगर उनकी यह रणनीति सफल हो गई तो नेताजी इसे ऐसे देखेंगे मानो उन्होंने “हिमालय पर अपना झंडा फहरा दिया हो।”
नगर निगम चुनाव के संदर्भ में मेयर पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। वर्तमान मेयर कुलभूषण गोयल एक बार फिर अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में लगे हुए बताए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी के भीतर अन्य नाम भी सामने आ रहे हैं और संगठन इस पद को लेकर भी नए प्रयोग की संभावना पर विचार कर सकता है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार एक ऐसा नेता, जो लंबे समय से सामाजिक संस्थाओं से जुड़े रहे है और जिसे प्रदेश नेतृत्व के मुखिया के काफी करीब माना जाता है, उसका नाम भी संभावित दावेदारों में चर्चा में है। अक्सर उन्हें मुख्यमंत्री के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में देखा जाता है, जिससे उनके नाम को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। बीते दिनों भी यह नेताजी कई शादी के कार्यक्रम में भी देखे गए थे जिनमें खुद प्रदेश के मुखिया आए थे । उनके साथ उनकी चाय की चर्चा भी दिल्ली दरबार तक पहुंची हुई है ।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पंचकूला नगर निगम चुनाव भाजपा के लिए काफी महत्वपूर्ण होंगे। राज्य में पार्टी की सरकार होने के कारण इन चुनावों के परिणाम को सरकार के कामकाज से भी जोड़ा जाएगा। ऐसे में टिकट वितरण से लेकर चुनावी रणनीति तक हर कदम सोच-समझकर उठाया जा सकता है।
फिलहाल पार्टी के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन जारी है और आने वाले दिनों में तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आएंगी, पंचकूला की स्थानीय राजनीति में हलचल और तेज होने के आसार हैं।




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