ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ 12वीं की परीक्षा देने पहुंची चंडीगढ़ की छात्रा, ICU से लौटकर दिखाई अद्भुत हिम्मत
मजबूत इच्छाशक्ति और अटूट हौसले के सामने कठिन परिस्थितियां भी छोटी पड़ जाती हैं। इस बात को सच साबित किया है शहर की 17 वर्षीय छात्रा कनिष्का बिष्ट ने, जिसने गंभीर बीमारी से जूझते हुए भी अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। निमोनिया के कारण 13 दिन तक ICU में भर्ती रहने और कई दिनों तक बेहोशी की हालत में रहने के बावजूद उसने 12वीं बोर्ड परीक्षा देने का निर्णय नहीं बदला।
डॉक्टरों ने उसे पूर्ण आराम की सलाह दी थी, लेकिन छात्रा अपने लक्ष्य को लेकर दृढ़ रही। शुक्रवार को आयोजित Central Board of Secondary Education (CBSE) की कक्षा 12 की फिजिक्स परीक्षा देने के लिए वह व्हीलचेयर और ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ परीक्षा केंद्र पहुंची और पूरा पेपर हल किया।
ऑक्सीजन नली के साथ व्हीलचेयर पर बैठकर दिया पेपर
परीक्षा केंद्र पर जब कनिष्का पहुंची तो उपस्थित लोग भावुक हो उठे। उसकी नाक में ऑक्सीजन की नली लगी हुई थी और आवश्यक मेडिकल उपकरण साथ रखे गए थे। वह व्हीलचेयर पर बैठकर पूरे समय ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ परीक्षा देती रही।
छात्रा सेक्टर-26 स्थित एक विद्यालय में नॉन-मेडिकल की छात्रा है, जबकि उसका परीक्षा केंद्र मनीमाजरा के सरकारी स्कूल में बनाया गया था। उसकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए परीक्षा कक्ष में विशेष व्यवस्था की गई। स्कूल प्रबंधन ने अलग बैठने की सुविधा उपलब्ध कराई ताकि उसे किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इसके अतिरिक्त चिकित्सा टीम भी सतर्क रही और पूरे समय निगरानी रखी गई, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
अस्पताल के बेड से लिया परीक्षा देने का संकल्प
परिजनों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान छात्रा ने अपने पिता से स्पष्ट कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में परीक्षा अवश्य देगी। बेटी के इस साहस ने परिवार को भावुक कर दिया, लेकिन उन्होंने भी उसका मनोबल बनाए रखा और हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
साधारण सर्दी-खांसी से बिगड़ी स्थितिबताया जा रहा है कि कनिष्का, जो बचपन से दिव्यांग है, को कुछ दिन पहले सामान्य सर्दी-खांसी हुई थी। बाद में सीने में कफ जमने से संक्रमण बढ़ गया और उसे गंभीर निमोनिया हो गया। हालत बिगड़ने पर उसे ICU में भर्ती करना पड़ा, जहां वह लगभग 10 दिनों तक बेहोश रही और 13 दिनों तक जीवन की जंग लड़ती रही।
डॉक्टरों ने परीक्षा टालने और स्वास्थ्य सुधार पर ध्यान देने की सलाह दी थी, लेकिन छात्रा अपने निर्णय पर अडिग रही।साहस की मिसाल बनी छात्राकनिष्का बिष्ट का साहस पूरे शहर के लिए प्रेरणा बन गया है। जिस परिस्थिति में सामान्य व्यक्ति हिम्मत हार सकता है, वहां इस छात्रा ने अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी और विपरीत हालात में भी परीक्षा देकर दृढ़ संकल्प का परिचय दिया।
उसकी कहानी उन विद्यार्थियों के लिए संदेश है जो कठिनाइयों से घबराकर हार मान लेते हैं। उसने साबित कर दिया कि परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मजबूत इरादे और आत्मविश्वास के साथ हर बाधा को पार किया जा सकता है।




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