अनिल अंबानी के खिलाफ ₹1,085 करोड़ की धोखाधड़ी का नया मामला दर्ज, CBI ने की FIR
मुंबई, 8 मार्च: उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उनके और उनकी कंपनी के कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ 1,085 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में नया केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शिकायत के आधार पर की गई है।
जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला 2013 से 2017 के बीच का है, जब रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और उससे जुड़े अधिकारियों पर बैंक से लिए गए कर्ज के गलत इस्तेमाल का आरोप लगा है।
IPC की इन धाराओं में मामला दर्ज
CBI ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत FIR दर्ज की है। बैंक का आरोप है कि कंपनी और उसके निदेशकों ने लोन की राशि का उपयोग तय शर्तों के अनुसार नहीं किया और इससे बैंक को भारी नुकसान हुआ।
PNB और यूनाइटेड बैंक को हुआ नुकसान
बैंक की शिकायत के मुताबिक आरोपियों की वजह से
- PNB को लगभग 621.39 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ
- जबकि यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (जो अब PNB में विलय हो चुका है) को करीब 463.80 करोड़ रुपये की हानि हुई
शिकायत में कहा गया है कि कंपनी ने बैंक से लिए गए फंड को उन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया या अन्य जगह ट्रांसफर किया, जिसकी जानकारी बैंक को नहीं दी गई थी।
फरवरी में भी दर्ज हुआ था बड़ा केस
इससे पहले इसी साल फरवरी में भी CBI ने अनिल अंबानी और उनकी कंपनी के खिलाफ एक अन्य बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। उस मामले में आरोप है कि 2013 से 2017 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ 2,220 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई।
ED ने कई संपत्तियां की अटैच
उधर प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है। एजेंसी ने मुंबई में स्थित अनिल अंबानी के आलीशान बंगले ‘एबोड’ सहित कई संपत्तियों को अटैच किया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई और अन्य शहरों में स्थित रिहायशी और व्यावसायिक संपत्तियां भी अटैच की जा चुकी हैं। अब तक करीब 15,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया जा चुका है।
यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े कथित बैंक फ्रॉड मामलों में कुल मिलाकर लगभग 40,000 करोड़ रुपये के वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है।




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