11-09-2026
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भारत की Gen Z अब सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड तय करने वाली पीढ़ी नहीं रह गई है, बल्कि कंजम्पशन और निवेश की दिशा बदलने वाली बड़ी आर्थिक ताकत बनती जा रही है। Boston Consulting Group (BCG) के आंकड़ों के मुताबिक 1997 से 2012 के बीच जन्मे करीब 37.7 करोड़ युवा देश के कुल उपभोक्ता खर्च […]
₹6,203 करोड़ का कर्ज, ₹14,131 करोड़ की वसूली! विजय माल्या का नया सवाल—“अब मेरा पैसा कब लौटेगा?” शराब कारोबारी और किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमोटर विजय माल्या ने अपने खिलाफ चल रही कानूनी और वित्तीय कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। बुधवार को सोशल मीडिया पोस्ट में माल्या ने दावा किया कि […]
सड़क सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार अब सिर्फ चालान और जुर्माने तक सीमित नहीं रहना चाहती। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संकेत दिया है कि बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) पर निगेटिव पॉइंट जोड़े जा सकते हैं। तय सीमा […]
Gen Z की जेब में नया इंडिया: लग्जरी शॉपिंग से SIP तक, युवा बदल रहे खर्च का पूरा खेल भारत की Gen Z अब सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड फॉलो करने वाली पीढ़ी नहीं रह गई है, बल्कि देश के कंज्यूमर मार्केट और निवेश की दिशा भी बदल रही है। BCG और Snap की संयुक्त रिपोर्ट […]
जं जी, जं अल्फा, युवा जिन सवालों को उठाते हुए सामने आये उसने मौजूदा वक्त की राजनीति ही नहीं बल्कि देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक तीनों परिस्थितियों को एक मैसेज दे दिया है कि लड़ाई जनरेशन की है। जनरेशन की लड़ाई के दायरे में गवर्नेंस के तौर तरीके, तानाशाही के तौर तरीके कोई मायने […]
भारत को समझने के लिए केवल उसके शहरों, बाजारों और आधुनिकता को देखना पर्याप्त नहीं है। भारत को समझना हो तो उसकी जड़ों तक पहुँचना होगा—उसकी आस्था, लोक-स्मृति, संस्कृति और उन कथाओं तक, जिन्होंने सदियों से उसके सामूहिक मन को आकार दिया है। इसी संदर्भ में ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्म का महत्व केवल उसके बॉक्स […]
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डॉ. सत्यवान सौरभ समकालीन हिंदी पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में सक्रिय एक स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार, कवि, साहित्यकार एवं सामाजिक विचारक हैं। विगत दो दशकों से वे साहित्य, पत्रकारिता और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन एवं वैचारिक हस्तक्षेप करते रहे हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक संवेदना, समकालीन यथार्थ, तार्किक दृष्टि और वैचारिक […]

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