भारतीय कंजम्पशन खर्च का 43% प्रभावित कर रहे GEN Z , जल्दी ही 2 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान !
Gen Z की जेब में नया इंडिया: लग्जरी शॉपिंग से SIP तक, युवा बदल रहे खर्च का पूरा खेल
भारत की Gen Z अब सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड फॉलो करने वाली पीढ़ी नहीं रह गई है, बल्कि देश के कंज्यूमर मार्केट और निवेश की दिशा भी बदल रही है। BCG और Snap की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक 1997 से 2012 के बीच जन्मे करीब 37.7 करोड़ Gen Z भारतीय कुल कंजम्पशन खर्च का लगभग 43% हिस्सा प्रभावित या सीधे तौर पर खर्च करते हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि 2035 तक उनका खर्च बढ़कर करीब 2 ट्रिलियन डॉलर हो सकता है।
खर्च में दिख रहा है ‘YOLO’ असर
Gen Z का खर्च पारंपरिक जरूरतों से आगे बढ़कर फैशन, फुटवियर, बाहर खाना, मनोरंजन, ट्रैवल और OTT जैसी कैटेगरी में तेजी से दिखाई दे रहा है। BCG-Snap के अनुसार इन क्षेत्रों में होने वाले खर्च का करीब आधा हिस्सा Gen Z खरीदारों से सीधे जुड़ा या प्रभावित है। ब्यूटी और पर्सनल केयर भी युवाओं की पसंदीदा कैटेगरी बनी हुई है। Redseer के अनुमान के अनुसार भारत का ब्यूटी एवं पर्सनल केयर बाजार 2030 तक करीब 40 अरब डॉलर का हो सकता है।
खर्च के साथ निवेश भी तेज
खास बात यह है कि Gen Z सिर्फ पैसा उड़ाने वाली पीढ़ी नहीं है। कम उम्र में निवेश की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। RBI के आंकड़ों के आधार पर IBEF के अनुसार 30 साल से कम उम्र के स्टॉक मार्केट निवेशकों की हिस्सेदारी मार्च 2019 के 22.6% से बढ़कर जुलाई 2025 में 38.9% हो गई। म्यूचुअल फंड, SIP और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म युवाओं के लिए निवेश के आसान विकल्प बन रहे हैं।
क्रेडिट मार्केट में भी Gen Z की एंट्री तेजी से हुई है। TransUnion CIBIL के अनुसार 2024 में पहली बार क्रेडिट लेने वालों में Gen Z की हिस्सेदारी 41% रही।
ज्वेलरी से कार तक पसंद बदली
युवा उपभोक्ताओं की पसंद का असर ज्वेलरी बाजार में भी नजर आ रहा है। भारी-भरकम पारंपरिक आभूषणों के बजाय हल्की, डिजाइन-केंद्रित और रोजाना पहनी जा सकने वाली ज्वेलरी की मांग बढ़ रही है। वहीं प्रीमियम स्किनकेयर, फैशन और एंट्री-लेवल लग्जरी कारों जैसी कैटेगरी भी युवा ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं।
हालांकि विशेषज्ञ यह मानने से सावधान करते हैं कि भारत में बढ़ते कंजम्पशन का पूरा श्रेय Gen Z को दिया जा सकता है। बढ़ती आय, शहरीकरण और बदलती जीवनशैली भी इस बदलाव के बड़े कारण हैं। फिर भी एक बात साफ है—भारत का युवा अब सिर्फ ग्राहक नहीं, बाजार की दिशा तय करने वाली ताकत बन चुका है।





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