चुनावी ‘काले धन’ पर EC के आंकड़ों ने बढ़ाई सियासी गर्मी, गुजरात फिर टॉप पर
2024 लोकसभा चुनाव में देशभर में 3.87 लाख FIR; गुजरात में 52,820 मामले, यूपी में 23,645—सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई तेज करने पर दिया जोर
नई दिल्ली। चुनावी मौसम में धनबल और चुनावी गड़बड़ियों को लेकर बहस अक्सर तेज हो जाती है। अब चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे गए आंकड़ों ने इस चर्चा को नया आधार दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान देशभर में 3,87,430 FIR दर्ज हुईं, जिनमें गुजरात 52,820 मामलों के साथ सबसे ऊपर रहा। हालांकि, FIR की संख्या को सीधे चुनाव में इस्तेमाल हुए ‘काले धन’ की मात्रा नहीं माना जा सकता, क्योंकि इनमें अलग-अलग तरह के चुनावी अपराध और उल्लंघन शामिल हैं।
गुजरात में 2019 के मुकाबले भी बढ़े मामले
आंकड़ों में गुजरात का लगातार शीर्ष पर रहना खासा चर्चा में है। 2019 लोकसभा चुनाव में राज्य में 35,144 FIR दर्ज हुई थीं, जो 2024 में बढ़कर 52,820 हो गईं। 2024 में गुजरात के बाद महाराष्ट्र में 29,545, पश्चिम बंगाल में 27,461 और उत्तर प्रदेश में 23,645 FIR दर्ज हुईं। तेलंगाना में भी 23,087 मामले सामने आए।
विधानसभा चुनावों में भी तस्वीर दिलचस्प रही। 2023 तेलंगाना विधानसभा चुनाव में 33,496 FIR दर्ज हुईं, जबकि गुजरात के 2022 विधानसभा चुनाव में 30,253 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद महाराष्ट्र में 26,302, पश्चिम बंगाल में 25,061 और उत्तर प्रदेश में 20,994 FIR दर्ज हुईं।
FIR के बाद कार्रवाई कितनी हुई?
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 लोकसभा चुनाव से जुड़े मामलों में 1,66,044 में दोषसिद्धि, 76,987 मामले बंद और 24,950 में आरोपी बरी हुए, जबकि 1,06,841 मामले ट्रायल में लंबित थे। 2019 लोकसभा चुनाव में कुल 1,44,030 FIR दर्ज हुई थीं, जिनमें 37,215 मामलों में दोषसिद्धि हुई और 44,387 मामले सुनवाई के स्तर पर लंबित रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी मामलों की जांच और निपटारे में तेजी लाने पर जोर दिया है। निर्देशों के तहत जब्त नकदी या संपत्ति की कार्रवाई के कारणों और जानकारी को समयबद्ध तरीके से दर्ज करने तथा चुनाव संबंधी FIR की जांच सामान्य तौर पर एक वर्ष के भीतर पूरी करने का प्रयास करने की बात कही गई है।
यानी चुनावी मैदान में सिर्फ पैसा कितना पकड़ा गया, यह ही सवाल नहीं है; अब यह भी बड़ा मुद्दा है कि दर्ज मामलों का अंजाम कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शिता से होता है।



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