माननीय बनने के लिए चुनाव क्या-क्या न करवाएं: महिला दिवस पर अचानक सक्रिय हुए नेताजी
पंचकूला
नगर निगम चुनावों की आहट के साथ ही शहर की राजनीति में गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव नजदीक आते ही कई नेता अचानक सक्रिय दिखाई देने लगे हैं और अलग-अलग सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में जुट गए हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब एक संभावित उम्मीदवार नेताजी ने महिलाओं के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित कर अपनी सक्रियता दिखाने का प्रयास किया।
रविवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में शहर की कई महिलाओं को आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं के सम्मान, उनके अधिकारों और समाज में उनकी भूमिका पर बातें की गईं। हालांकि राजनीतिक हलकों में इस कार्यक्रम को चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि नगर निगम चुनाव के मद्देनजर कई नेता अब हर उस अवसर को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां से उन्हें जनसंपर्क बढ़ाने का मौका मिल सके।
दरअसल संबंधित नेताजी पिछले कई वर्षों से राजनीति में सक्रिय बताए जाते हैं, लेकिन अब तक उन्होंने किसी चुनाव में सीधी दावेदारी नहीं की थी। इस बार नगर निगम चुनाव लड़ने की उनकी इच्छा सामने आई है। यही कारण है कि अब वे समाज के हर वर्ग के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में लगे हुए हैं। महिला दिवस का कार्यक्रम भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनावी मौसम में इस तरह के कार्यक्रम अचानक बढ़ जाते हैं। सामाजिक मुद्दों और जनहित के नाम पर आयोजित कार्यक्रमों के जरिए नेता अपनी छवि मजबूत करने की कोशिश करते हैं। महिला दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को भी कुछ लोग इसी नजरिए से देख रहे हैं।
इन दिनों नेताजी की सक्रियता सोशल मीडिया पर भी खूब दिखाई दे रही है। छोटी-बड़ी हर गतिविधि, बैठक या कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार साझा किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी सुनने को मिल रही है कि नेताजी की कोशिश है कि उनकी मौजूदगी हर खबर और हर गतिविधि में दिखाई दे, ताकि चुनावी माहौल में उनकी पहचान और मजबूत हो सके।
शहर की राजनीतिक चर्चा में एक और नेताजी का नाम भी इन दिनों सामने आता रहा है। और इन्होंने तो मेयर पद की दावेदारी सार्वजनिक तौर पर कर भी दी है। कुछ समय पहले तक वे लगातार बड़े-बड़े इंटरव्यू देकर अपनी दावेदारी को मजबूत करने की कोशिश करते नजर आ रहे थे। मीडिया में भी उनकी सक्रियता काफी दिखाई दे रही थी, लेकिन पिछले कुछ समय से वे अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पहले जहां वे लगातार बयान और इंटरव्यू देते दिखाई देते थे, वहीं अब उनकी गतिविधियां कुछ कम हो गई हैं। न तो बड़े इंटरव्यू सामने आ रहे हैं और न ही सार्वजनिक मंचों पर उनकी उपस्थिति पहले की तरह दिखाई दे रही है। इस बदलाव को लेकर भी तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि उनके करीबी लोगों का कहना है कि नेताजी अब भी पूरी तरह सक्रिय हैं और पर्दे के पीछे अपनी राजनीतिक रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि उनकी बातचीत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुकी है और उचित समय आने पर उनकी दावेदारी को मजबूती मिल सकती है।
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि नेताजी को भरोसा है कि पार्टी संगठन में उनकी बात सुनी जा रही है और जल्द ही उन्हें बड़ा मौका मिल सकता है। उनके समर्थक इसे इस तरह पेश करते हैं कि जैसे उनकी “ट्रेन” तैयार खड़ी है और बस इंजन लगने का इंतजार है, जिसके बाद उनकी राजनीतिक गाड़ी तेजी से आगे बढ़ सकती है।
नगर निगम चुनावों के करीब आते ही शहर की राजनीति में ऐसे कई दिलचस्प घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। कोई सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है, तो कोई संगठन के भीतर अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगा है। आने वाले दिनों में टिकट वितरण के साथ-साथ यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस नेता की सक्रियता वास्तव में चुनावी मैदान तक पहुंच पाती है और किसकी कोशिशें केवल चर्चाओं तक ही सीमित रह जाती हैं।




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