ईरान के यूरेनियम भंडार पर नजर? अमेरिका-इजराइल संभावित सैन्य ऑपरेशन पर कर रहे विचार
वॉशिंगटन/तेल अवीव, 8 मार्च: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए एक नए सैन्य विकल्प पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच इस बात पर चर्चा हुई है कि जरूरत पड़ने पर स्पेशल फोर्स को ईरान भेजकर वहां मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम को सुरक्षित किया जाए या उसे निष्क्रिय किया जाए।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास लगभग 450 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे आगे बढ़ाकर करीब 90 प्रतिशत तक संवर्धित कर दिया जाए तो इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी यह कह चुके हैं कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। इसी रणनीति के तहत संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा की जा रही है।
स्पेशल फोर्स भेजने के विकल्प पर चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रस्तावित योजना में यह संभावना भी शामिल है कि युद्ध की स्थिति में विशेष सैन्य दस्ते ईरान के परमाणु ठिकानों तक पहुंचकर वहां मौजूद यूरेनियम भंडार को अपने कब्जे में लें।
हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इस तरह का मिशन अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका अंजाम देगा, इजराइल करेगा या दोनों देश मिलकर इसे संचालित करेंगे। माना जा रहा है कि यह ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि यूरेनियम को सुरक्षित ठिकानों और भूमिगत सुरंगों में रखा गया है।
कब हो सकता है ऑपरेशन
सूत्रों का कहना है कि ऐसा ऑपरेशन तभी संभव होगा जब अमेरिका और इजराइल को यह भरोसा हो जाए कि ईरानी सैन्य क्षमता इतनी कमजोर हो चुकी है कि मिशन में शामिल सैनिकों को बड़ा खतरा नहीं होगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से जब कांग्रेस में इस मुद्दे पर सवाल किया गया तो उन्होंने संकेत दिया कि यूरेनियम को सुरक्षित करने के लिए किसी को वहां जाकर इसे लेना पड़ेगा, हालांकि उन्होंने किसी संभावित मिशन की पुष्टि नहीं की।
दो विकल्पों पर विचार
अधिकारियों के अनुसार फिलहाल दो संभावित विकल्पों पर चर्चा चल रही है:
- यूरेनियम को ईरान से बाहर ले जाकर अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में रखा जाए।
- वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीम भेजकर उसी स्थान पर इसे इस स्तर तक कमजोर कर दिया जाए कि उससे परमाणु हथियार न बनाए जा सकें।
इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के विशेषज्ञों को भी शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
परमाणु ठिकानों को लेकर चिंता
बताया जाता है कि ईरान का अधिकांश संवर्धित यूरेनियम इस्फहान न्यूक्लियर सेंटर की भूमिगत सुरंगों में रखा गया है, जबकि बाकी भंडार फोर्दो न्यूक्लियर फ्यूल एनरिचमेंट प्लांट और नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी में मौजूद है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि इस पूरे यूरेनियम को 90 प्रतिशत तक संवर्धित कर दिया जाए तो उससे लगभग 10–11 परमाणु बम तैयार किए जा सकते हैं।
खर्ग आइलैंड पर भी चर्चा
रिपोर्टों के मुताबिक रणनीतिक तौर पर अहम खर्ग आइलैंड पर नियंत्रण का विकल्प भी चर्चा में आया है। यह द्वीप ईरान के करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल के निर्यात का मुख्य केंद्र माना जाता है।
हालांकि अभी तक इस तरह के किसी सैन्य अभियान को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा कोई कदम उठाया जाता है तो इससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है।




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