क्या अपने कार्यकाल में “नवरत्न नगर निगम” का मिथक तोड़ पाएंगे मेयर श्यामलाल बंसल ? पंचकूला नगर निगम की छवि बदलना होगा सबसे बड़ा चैलेंज
क्या अपने कार्यकाल में “नवरत्न नगर निगम” का मिथक तोड़ पाएंगे मेयर श्यामलाल बंसल ? पंचकूला नगर निगम की छवि बदलना होगा सबसे बड़ा चैलेंज
पंचकूला नगर निगम में नई सरकार बनने के बाद अब शहर की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। नगर निगम के नवनिर्वाचित मेयर श्यामलाल बंसल जल्द ही शपथ ग्रहण कर अपना कामकाज शुरू करेंगे, लेकिन उनके सामने केवल विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि उससे भी बड़ा एक ऐसा सवाल खड़ा होगा जो पिछले कई वर्षों से पंचकूला नगर निगम की पहचान के साथ जुड़ चुका है। यह सवाल है — क्या श्यामलाल बंसल अपने पांच साल के कार्यकाल में पंचकूला नगर निगम के साथ जुड़ा “नवरत्न नगर निगम” का ठप्पा हटाने में सफल हो पाएंगे?
पंचकूला नगर निगम को राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं में लंबे समय से “नवरत्न नगर निगम” कहकर पुकारा जाता रहा है। यह नाम किसी आधिकारिक पहचान का हिस्सा नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों में निगम से जुड़े भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और विवादों के कारण लोगों की बोलचाल का हिस्सा बन चुका है। अब स्थिति यह हो चुकी है कि राजनीतिक गलियारों से लेकर ठेकेदारों और आम लोगों के बीच भी यह शब्द आम तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचकूला नगर निगम का “नवरत्न नगर निगम” नाम यूं ही नहीं पड़ा। इसके पीछे वर्षों से चले आ रहे वे मामले हैं जिन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल खड़े किए। शहर के राजनीतिक जानकारों और पुराने प्रशासनिक मामलों पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि पिछले 10 से 15 वर्षों में नगर निगम से जुड़े इतने विवाद और कथित भ्रष्टाचार के मामले सामने आए कि अब उन्हें गिनना और याद रखना भी मुश्किल हो गया है।
राजनीतिक चर्चाओं में अक्सर यह कहा जाता रहा है कि यदि कुछ महीनों तक पंचकूला नगर निगम से कोई विवाद या भ्रष्टाचार का मामला सामने न आए तो लोगों को खुद हैरानी होने लगती है। कई लोगों का आरोप रहा है कि निगम की कार्यप्रणाली में वर्षों से ऐसी व्यवस्था बन चुकी है जहां बिना “गड़बड़झाला” किए काम आगे बढ़ना मुश्किल माना जाता है। यही कारण है कि निगम की छवि आम जनता के बीच लगातार प्रभावित होती चली गई।
स्थिति इतनी बदल चुकी है कि अब कई ठेकेदार भी मजाकिया लेकिन गंभीर अंदाज में पंचकूला नगर निगम को “नवरत्न नगर निगम” कहकर संबोधित करते हैं। स्थानीय स्तर पर यह शब्द भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के प्रतीक के रूप में देखा जाने लगा है। कई लोगों का कहना है कि नगर निगम में ठेका मिलना अपने आप में “नवरत्न नगर निगम” में प्रवेश मिलने जैसा माना जाता है।
ऐसे में अब मेयर श्यामलाल बंसल के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल सड़कें बनवाना, सफाई व्यवस्था सुधारना या शहर के विकास कार्यों को गति देना नहीं होगी, बल्कि उन्हें नगर निगम की वर्षों से खराब हो चुकी छवि को बदलने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उनके कार्यकाल के दौरान नगर निगम में बड़े भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहे तो जनता के बीच बदलाव का संदेश नहीं जा पाएगा।
लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में पंचकूला नगर निगम की छवि बदलनी है तो केवल नए प्रोजेक्ट शुरू करने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लानी होगी, टेंडर प्रक्रिया को साफ बनाना होगा और पुराने मामलों में भी निष्पक्ष कार्रवाई करनी होगी। जब तक भ्रष्टाचार के पुराने मामलों पर सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक लोगों का भरोसा पूरी तरह वापस लौटना आसान नहीं माना जा रहा।
नगर निगम चुनाव के दौरान भी भ्रष्टाचार, विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता बड़े मुद्दों के रूप में सामने आए थे। कई उम्मीदवारों ने चुनाव प्रचार के दौरान निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे और जनता से बदलाव का वादा किया था। अब जब नई टीम निगम की कमान संभाल चुकी है तो लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हुई हैं कि क्या वास्तव में जमीन पर बदलाव दिखाई देगा या फिर सब कुछ पहले जैसा ही चलता रहेगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि श्यामलाल बंसल के लिए यह कार्यकाल केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि उनकी राजनीतिक छवि की सबसे बड़ी परीक्षा भी होगा। यदि वह अपने पांच साल के कार्यकाल में नगर निगम की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने, भ्रष्टाचार के मामलों पर अंकुश लगाने और जनता का विश्वास जीतने में सफल रहते हैं तो यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।
वहीं दूसरी ओर यदि आने वाले वर्षों में नगर निगम से जुड़े विवाद, भ्रष्टाचार के आरोप और गड़बड़ियों की खबरें पहले की तरह सामने आती रहीं तो “नवरत्न नगर निगम” का यह टैग शायद और मजबूत हो जाएगा।
अब देखना यही होगा कि पंचकूला नगर निगम की नई टीम इस पुरानी छवि को बदलने में कितनी सफल होती है और क्या वास्तव में आने वाले समय में लोग पंचकूला नगर निगम को “नवरत्न नगर निगम” की बजाय जनता के भरोसे वाले नगर निगम के रूप में देख पाएंगे।



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