पंजाब केसरी ग्रुप पर 65 करोड़ के GST और सर्कुलेशन अनियमितताओं के आरोप, टैक्स विभाग की जांच में कई सवाल
पंजाब के कर विभाग की जांच में देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों में शामिल पंजाब केसरी ग्रुप से जुड़ी कंपनी Hind Samachar Limited के वित्तीय लेन-देन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। विभागीय जांच में पिछले तीन वर्षों के दौरान लगभग 65 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार पर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में पंजाब जीएसटी कानून के तहत कर निर्धारण और संभावित जुर्माने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 5 फरवरी 2026 को कर विभाग की टीमों ने जालंधर के सिविल लाइंस स्थित मुख्य कार्यालय सहित लुधियाना और बठिंडा की इकाइयों में एक साथ जांच कार्रवाई की। अधिकारियों ने जीएसटी रिटर्न, अखबारी कागज की खरीद-फरोख्त, माल ढुलाई और टोल प्लाजा रिकॉर्ड का मिलान कर लेन-देन की पड़ताल की।
जांच में सामने आया कि कंपनी ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में करीब 16,807 मीट्रिक टन न्यूजप्रिंट की खरीद और आपूर्ति का दावा किया है। इनमें लगभग 10,247 मीट्रिक टन सीधी खरीद और 6,560 मीट्रिक टन अन्य इकाइयों को भेजे जाने का उल्लेख है। इन सौदों का कुल मूल्य लगभग 65.61 करोड़ रुपये बताया गया। विभागीय आकलन के अनुसार इतनी मात्रा का कागज लगभग 21 करोड़ अखबार प्रतियों की छपाई के बराबर माना जाता है।
हालांकि जब परिवहन दस्तावेजों का मिलान टोल प्लाजा और वाहनों की आवाजाही के रिकॉर्ड से किया गया तो कई विसंगतियां सामने आईं। जांचे गए 407 परिवहन प्रपत्रों में से 219 मामलों में संबंधित वाहनों की आवाजाही दर्ज ही नहीं पाई गई। कुछ वाहन जिनका उल्लेख दस्तावेजों में था, वे जालंधर क्षेत्र में प्रवेश करते हुए भी रिकॉर्ड में नहीं मिले और अन्य राज्यों में दर्ज पाए गए।
इसी तरह 457 आउटवर्ड ट्रांजैक्शन के मामलों में भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि कागज वास्तव में गंतव्य तक पहुंचा या नहीं। कई मामलों में माल रसीद, भाड़ा भुगतान और माल प्राप्ति के प्रमाण भी उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इसके अलावा जिन सप्लायरों से कागज की खरीद दिखाई गई, उनमें से कुछ के जीएसटी पंजीकरण पहले ही रद्द या संदिग्ध श्रेणी में बताए जा रहे हैं।
जांच के दायरे में लगभग दस विज्ञापन एजेंसियां भी आई हैं। इनमें से लुधियाना की एक एजेंसी ने जांच के दौरान करीब 16.35 लाख रुपये का टैक्स स्वेच्छा से जमा कराया है, जिससे अधिकारियों को लेन-देन के नेटवर्क की व्यापक जांच की जरूरत महसूस हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर न्यूजप्रिंट की वास्तविक आपूर्ति और घोषित उत्पादन के बीच अंतर पाया जाता है, तो इसका असर अखबारों की प्रसार संख्या और विज्ञापन व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। क्योंकि सरकारी और निजी विज्ञापनों का बड़ा हिस्सा प्रसार संख्या के आधार पर निर्धारित होता है।
फिलहाल कर विभाग खातों और दस्तावेजों का मिलान कर रहा है तथा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर कर वसूली, जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि आर्थिक जवाबदेही के मामले में मीडिया संस्थान भी कानून से ऊपर नहीं हैं।
संस्थान की कोई प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे मामले पर पंजाब केसरी ग्रुप की तरफ से किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है जैसे ही संस्थान की तरफ से क्यों प्रतिक्रिया जारी की जाएगी उनका पक्ष भी लगाया जाएगा ।




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