चलती ट्रेन में बिकने वाले सामान के दाम बढ़ेंगे बाजार में मोबाइल से लेकर शैंपू तक हुआ महंगा
डॉलर के मुकाबले रुपये की रिकॉर्ड लगातार 9 वे दिन भी गिरावट जारी , 97 के करीब पहुंची भारतीय मुद्रा
भारतीय की मुद्रा रुपये पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार नौवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 97 प्रति डॉलर के स्तर के पास पहुंच गया, जिससे बाजार और निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने कमजोर शुरुआत करते हुए 96.86 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार शुरू किया और कुछ ही देर में गिरकर 96.96 तक पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भारतीय मुद्रा पर भारी दबाव बना रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है।
हालांकि बाजार बंद होने के समय रुपए ने डॉलर के मुकाबले कुछ रिकवरी की थी और यह 96 रुपए 86 पैसे पर दिखाई पड़ा।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता ने डॉलर को मजबूती दी है, जबकि उभरते बाजारों की मुद्राओं में कमजोरी देखी जा रही है। ईरान संकट के बाद से रुपये में करीब 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जिससे यह एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है।
रुपये की लगातार कमजोरी का असर आम लोगों और उद्योगों दोनों पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य आयातित उत्पाद महंगे होने की आशंका बढ़ गई है। वहीं, विदेशी शिक्षा और विदेश यात्रा की लागत भी बढ़ सकती है। हालांकि, निर्यात क्षेत्र को कमजोर रुपये से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही और विदेशी पूंजी निकासी नहीं थमी, तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। अब बाजार की नजर Reserve Bank of India की संभावित रणनीति और सरकार के अगले आर्थिक कदमों पर टिकी हुई है।
बढ़ती महंगाई का असर रेलवे कैटरिंग पर, ट्रेनों में खाने-पीने के दाम बढ़ाने की मांग तेज
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उथल-पुथल और कच्चे तेल के महंगे होने का असर अब भारतीय रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था पर भी दिखने लगा है। ट्रेनों में भोजन और अन्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों ने लागत बढ़ने का हवाला देते हुए दरों में संशोधन की मांग उठाई है, जिससे आने वाले समय में रेल यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
Indian Railway Catering and Tourism Corporation (IRCTC) को भेजे गए एक पत्र में इंडियन रेलवे मोबाइल कैटरर्स एसोसिएशन (IRMCA) ने कहा है कि वर्ष 2019 से पेंट्री कार के खाने-पीने के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि इस दौरान खाद्य सामग्री, ईंधन और श्रमिक लागत में लगभग 250 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। कैटरर्स का तर्क है कि वर्तमान दरों पर गुणवत्तापूर्ण सेवा बनाए रखना मुश्किल हो रहा है, इसलिए तत्काल रेट रिवीजन जरूरी है।
रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों जैसे राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत में कैटरिंग सेवाएं पहले से तय अनुबंधों के तहत चलती हैं, जहां यात्रियों से अग्रिम भुगतान लिया जाता है। वहीं अन्य ट्रेनों में पोस्ट-पेड मॉडल लागू है। कैटरिंग ऑपरेटरों का कहना है कि दोनों श्रेणियों में मूल्य संशोधन आवश्यक है ताकि बढ़ती लागत की भरपाई की जा सके।
हालांकि रेलवे के अनुबंध ढांचे के अनुसार कैटरिंग टेंडर आमतौर पर फिक्स्ड रेट पर आधारित होते हैं, जिसमें अनुबंध अवधि के दौरान दरों में बदलाव की अनुमति सीमित होती है। ऐसे में कैटरर्स की मांग को लागू करना प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
रेलवे से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि मौजूदा दरों पर काम करना घाटे का सौदा साबित होता है, तो ठेकेदारों के पास अनुबंध से बाहर निकलने का विकल्प मौजूद है। अब यह देखना अहम होगा कि Indian Railways इस मांग पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि किसी भी निर्णय का सीधा असर देशभर के लाखों रेल यात्रियों पर पड़ सकता है।
रुपया रिकॉर्ड दबाव में : जेब पर बढ़ सकता है बोझ और कुछ को फायदा भी !
रुपये की गिरावट का सीधा असर आयातित वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, लैपटॉप और ऑटोमोबाइल सेक्टर में लागत बढ़ने की आशंका है, जिससे खुदरा बाजार में कीमतें ऊपर जा सकती हैं। वहीं पेट्रोल-डीजल और गैस जैसे ईंधन उत्पादों पर भी महंगाई का दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
विदेशी शिक्षा और यात्रा खर्च भी इस गिरावट से प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के चलते विदेशी यूनिवर्सिटी फीस, होटल और यात्रा खर्च पहले से अधिक महंगे हो जाएंगे।
हालांकि, कुछ क्षेत्रों को इसका लाभ भी मिल सकता है। आईटी और फार्मा जैसी निर्यात आधारित कंपनियों की आय बढ़ने की संभावना है, क्योंकि डॉलर में मिलने वाली कमाई रुपये में अधिक मूल्यवान हो जाती है। साथ ही विदेश में काम कर रहे भारतीयों द्वारा भेजी जाने वाली रेमिटेंस की वैल्यू भी बढ़ सकती है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और विदेशी निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगी, जिससे रुपये की स्थिरता तय होगी।




Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!