11 थाने, पुलिस राइडर, डायल 112 और 24 घंटे गश्त के दावे फिर भी नहीं सुरक्षित आम नागरिक
लूट के लिए युवक की हत्या का मामला सुलझा, मुख्य आरोपी गिरफ्तार; नाबालिग साथी भी पुलिस की पकड़ में
पंचकूला जैसे कथित वीवीआईपी शहर , जिसे हरियाणा की अघोषित राजधानी भी कहा जाता है , मंत्री मुख्यमंत्री जज और अन्य इसी शहर में निवास करते हैं । पंचकूला में कुल मिलाकर 11 थाने, पुलिस कमिश्नर का दफ्तर , 24 घंटे नाइट राइडर , डायल 112 मौजूद है पर इन सबके बावजूद भी आम नागरिक अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहा है । यह सवाल पंचकूला पुलिस पर इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि होली के ठीक 1 दिन पहले एक ऐसे आम नागरिक की हत्या कर दी जाती है जिसका कोई कसर नहीं था और उसकी शादी भी महज 20 दिन पहले हुई थी । हालांकि पंचकूला पुलिस ने अपराधियों को पकड़ लिया है और अपनी पीठ थपथपा ली है पर सवाल इस बात कहें कि क्या आम नागरिक सुरक्षित है या आम नागरिक अपने आप को सुरक्षित महसूस कर पा रहा है ।
क्या था पूरा मामला
दो और 3 दिसंबर की दरमियानी रात को आईटी पार्क चंडीगढ़ से ममता एनक्लेव में रहने वाला एक नागरिक दीपक जिसकी शादी को मात्र 20 दिन में थे और 2 दिन पहले ही उसकी पत्नी अपने मायके वापस गई थी , चांद अपराधी विचार के लोगों ने देर रात दीपक की हत्या लूटपाट में फेल हो जाने की वजह से चाकू मारकर कर दी ।
गुरुवार को पुलिस ने प्रेस ब्रीफिंग में क्या कुछ बताया ?
पंचकूला में लूटपाट के इरादे से की गई युवक की हत्या के मामले को पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सुलझाने का दावा किया है। इस सनसनीखेज वारदात में शामिल मुख्य आरोपी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि उसका नाबालिग साथी भी क्राइम ब्रांच की टीम के हत्थे चढ़ गया है। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और वारदात से जुड़े साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया जारी है।
पुलिस के अनुसार 29 वर्षीय दीपक, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमेठी का रहने वाला था और फिलहाल ढकोली में किराये पर रहकर चंडीगढ़ स्थित एक कॉल सेंटर में काम करता था, 2 और 3 मार्च की दरमियानी रात करीब दो बजे ड्यूटी से लौट रहा था। बताया जा रहा है कि सेक्टर-12 स्थित कृषि भवन की ओर जाने वाली सड़क पर उसने अपनी बाइक किनारे लगाकर एक मित्र से फोन पर बात करनी शुरू की। इसी दौरान दो युवकों ने उस पर अचानक तेजधार हथियार से हमला कर दिया और उसका मोबाइल फोन छीनकर मौके से फरार हो गए।
हमले में गंभीर रूप से घायल दीपक को तुरंत सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद मृतक के भाई की शिकायत पर थाना सेक्टर-5 में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने जांच शुरू कर दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अलग-अलग टीमों का गठन किया। क्राइम ब्रांच सेक्टर-26 की टीम ने जांच के दौरान तेजी से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रोशन को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मूल रूप से बिहार के गोपालगंज का रहने वाला है और फिलहाल ढकोली क्षेत्र में किराये पर रह रहा था। पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर तीन दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया है, जिसके दौरान उससे वारदात में इस्तेमाल किए गए चाकू, खून से सने कपड़े और छीना गया मोबाइल फोन बरामद करने की कोशिश की जा रही है।
प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि घटना से पहले दोनों आरोपियों ने नशे का सेवन किया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी रोशन पर पहले भी लूट के तीन मामले दर्ज रह चुके हैं, जो उस समय नाबालिग रहते हुए दर्ज हुए थे।
जांच के दौरान पुलिस ने वारदात में शामिल दूसरे आरोपी, जो नाबालिग बताया जा रहा है, को भी काबू कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक की जांच में मृतक और आरोपियों के बीच किसी प्रकार की व्यक्तिगत रंजिश सामने नहीं आई है। प्रारंभिक तौर पर यह घटना केवल लूटपाट के इरादे से की गई वारदात मानी जा रही है, जिसमें विरोध करने पर युवक की हत्या कर दी गई।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और सभी सबूत जुटाने के बाद आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
इसी मामले को लेकर इंडियन नेशनल लोकदल के पंचकूला शहरी प्रधान मनोज अग्रवाल ने प्रेस नोट जारी किया है
सेक्टर 12 में सरेराह हत्या ने पंचकूला में आम आदमी की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है ।
यह आरोप लगाते हुए इंडियन नेशनल लोकदल के जिलाध्यक्ष पंचकूला शहरी एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कहा कि शहर में 11 पीसीआर, 19 आपातकालीन रिस्पांस वाहन, 25 मोटरसाइकिल राइडर द्वारा तथाकथित चौबीस घंटे गश्त करने के दावों के बावजूद सरेराह लूटपाट तथा हत्या होना कहीं ना कहीं पुलिस प्रशासन की विफलता साबित करता है । असलियत में पुलिस प्रशासन ने शहर वासियो को लुटेरों, चोर उचक्कों, हत्यारों, गुंडो तथा अपराधियों के रहमोकरम पर छोड दिया है। शहर का हर निवासी भय के साए में जीने को मजबूर है। कुछ साल पहले तक पंचकूला को शांत शहर समझा जाता था । देश के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां बसना चाहते थे। लेकिन अब यहां भी असामाजिक तत्वों का बोलबाला हो गया है ।
अपहरण, चोरी डकैती, स्नेचिंग, हत्या अब आम बात हो गई है। क्योंकि उनका खुफिया तंत्र पुलिस के खुफिया तंत्र से कहीं अधिक मजबूत है ।रोजाना वीआईपी आवाजाही के चलते पुलिस के अधिकतर अधिकारी कर्मचारी वीआईपी ड्युटी में व्यस्त रहते हैं । छः थाने तथा एक महिला थाना, हर थाने में 60 से 70 कर्मचारी तथा ढाई से तीन हजार होमगार्ड तथा रिजर्व पुलिस फोर्स होते हुए भी असामाजिक तत्वों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। ना ही नशे का व्यापार खत्म हो पा रहा है । वर्ष 2025 में शहर में 60 से ज्यादा स्नेचिंग तथा 600 से ज्यादा चोरी की वारदातें हुई थी । इसमें से अधिकतर मामले अनसुलझे हैं ।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि कुछ साल पहले पंचकूला में पुलिस कमिश्नरी की स्थापना अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए की गई थी जिसका खूब प्रचार भी किया गया।
अतिरिक्त अधिकारी तथा कर्मचारी लगाए गए, लेकिन अपराध घटने की बजाए बढते ही गए। मनोज अग्रवाल ने पुलिस कमिश्नर से शहरवासियो को अपराधी तत्वों से सुरक्षा प्रदान करने मांग की।
24 घंटे सुरक्षा का भरोसा फिर भी नहीं सुरक्षित आम नागरिक
सवाल इस बात का नहीं है कि पुलिस ने इस मामले को दो से तीन दिन में सुलझा लेने का दावा किया है । सवाल इस बात कहे कि जिस शहर में मुख्यमंत्री की एक हफ्ते में दो से तीन बार आवाजाही होती हो । कई मंत्रियों के निवास स्थान हो । पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के कई जज जिस शहर में रहते हो । पुलिस कमिश्नर का दफ्तर हो और 24 * 7 चलने वाला डायल 112 इसी शहर से पूरे हरियाणा को कवर करता हो उस शहर में आखिरकार आम नागरिक अपने आप को सुरक्षित क्यों नहीं महसूस कर पा रहा ।
नशा मुक्ति अभियान भी ज्यादातर जगहों पर कागजों में
पुलिस के साथ काम करने वाले कई संस्थाएं नशे के विरुद्ध ताल ठोकते हुए नजर आती है पर ऐसा लगता है कि उनका मकसद सिर्फ और सिर्फ सरकार से पैसा एठना है । क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से पंचकूला में नशे का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और जिस तेजी से नशे का कारोबार बढ़ रहा है उसी तेजी से नशा छुड़ाने वाली संस्थाओं भी सरकार से पैसा उठाने में लगी हुई है उनका उद्देश्य सरकार से पैसा लेना होता है ना कि नशा खत्म करवाना ।
कुल मिलाकर अगर आंकड़ों पर अगर गौर किया जाए तो पंचकूला में छोटे-बड़े सभी तरीके के अपराधों में वृद्धि हो रही है । यह अलग बात है कि कई मामलों को पंचला पुलिस जल्दी सुलझा लेती है और कई मामलों को सुलझाने में ज्यादा वक्त लगता है पर आम नागरिक अपने आप को सुरक्षित महसूस कैसे करें इस बात पर पंचगला पुलिस को कम करने की ज्यादा जरूरत है ।




Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!