खाद्य विभाग को जानकारी नहीं या फिर जानकर भी रहा अनजान : पंचकूला में बॉर्डर एरिया से होली पर नकली मावे का लाखों का हो गया कारोबार, खाद्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल
हरियाणा का पंचकूला जिला जिसके बॉर्डर चंडीगढ़ हिमाचल और पंजाब तीनों राज्यों से लग जाते हैं ऐसे में प्रशासन को बॉर्डर एरिया में विशेष निगरानी बरतने की जरूरत मानी जाती है । 2 दिन पहले होली का त्यौहार बीत चुका है और प्रशासन अपनी पीठ ठोक रहा है की होली पर किसी प्रकार की कोई बड़ी घटना नहीं होने पाई । जबकि हकीकत यह है कि पंचकूला के बॉर्डर एरिया से लाखों रुपए का नकली मावा लाकर खपा दिया गया और खाद विभाग को इस बात की जानकारी भी नहीं मिल पाई या फिर खाद्य विभाग के अधिकारी जानकर भी अंजान बने रहे ।
होली जैसे बड़े त्योहार के दौरान खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, लेकिन पंचकूला में इस बार त्योहार के दौरान नकली मावे की कथित बिक्री ने खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार शहर के बॉर्डर इलाकों में लाखों रुपए का कथित नकली मावा खुलेआम बाजार में खपा दिया गया, जबकि संबंधित विभाग की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई।
हालांकि राहत की बात यह रही कि त्योहार के दौरान किसी प्रकार की जनहानि या बड़ी स्वास्थ्य समस्या की सूचना सामने नहीं आई, लेकिन खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने प्रशासन की सतर्कता पर संदेह जरूर पैदा कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक होली से करीब तीन दिन पहले स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर खबरी प्रशाद अखबार में खबर भी प्रकाशित हुई थी, जिसमें बॉर्डर क्षेत्रों में नकली मावे की बिक्री होने की आशंका जताई गई थी। इस खबर के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संज्ञान लिया था। बताया जाता है कि उपायुक्त सतपाल शर्मा ने संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को जांच कर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए थे।
इसके बावजूद आरोप है कि निर्देशों के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। न तो बॉर्डर क्षेत्रों में बड़े स्तर पर छापेमारी की खबर सामने आई और न ही किसी ऐसे व्यापारी को पकड़े जाने की जानकारी सार्वजनिक हुई, जो कथित रूप से नकली मावे के कारोबार से जुड़ा हो।
छापेमारी पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों और कुछ सामाजिक संगठनों का आरोप है कि खाद्य विभाग की कार्रवाई अक्सर औपचारिकता तक सीमित रह जाती है। उनका कहना है कि विभाग कभी-कभार शहर की कुछ बड़ी और चिन्हित दुकानों पर छापेमारी कर देता है, जिससे रिकॉर्ड में यह दर्ज हो जाए कि विभाग सक्रिय है।
आरोप यह भी है कि इस तरह की कार्रवाई अधिकतर कागजी प्रक्रिया बनकर रह जाती है। कई मामलों में थोड़ी मात्रा में संदिग्ध खाद्य सामग्री मिलने पर उसे नष्ट कर दिया जाता है, लेकिन बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कम ही दिखाई देती है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
शहर के कई जागरूक नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान मिलावटी खाद्य पदार्थों का कारोबार लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उनका मानना है कि यदि समय रहते सख्ती न बरती जाए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की गंभीरता से समीक्षा की जाए और बॉर्डर क्षेत्रों सहित पूरे जिले में व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया जाए। साथ ही मिलावटी खाद्य पदार्थों के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों पर लगाम लग सके।
सामाजिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा की निगरानी मजबूत होना बेहद जरूरी है। यदि विभाग सक्रिय और पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करे तो न केवल मिलावटखोरों पर अंकुश लगाया जा सकता है, बल्कि उपभोक्ताओं का भरोसा भी कायम रखा जा सकता है।



Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!