‘जिंदा समाधि’ का खौफनाक अंत: बोरी में दफन हुआ कलाकार, तालियों के बीच मौत ने दी दस्तक
नूंह के सर्कस में जानलेवा स्टंट बना त्रासदी, दम घुटने से 27 वर्षीय कलाकार की मौत; प्रशासन ने शुरू की जांच
नूंह: हरियाणा के नूंह जिले में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए किया गया एक खतरनाक स्टंट मौत में बदल गया। तावडू क्षेत्र के एक गांव में लगे सर्कस के दौरान 27 वर्षीय कलाकार दीपक, जो फरीदाबाद के गौंची गांव का रहने वाला था, कथित तौर पर ‘जिंदा समाधि’ के स्टंट के तहत खुद को बोरी में बंद कर गड्ढे में दफन करा बैठा। लेकिन जब उसे बाहर निकाला गया, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अंतिम प्रस्तुति से पहले दीपक ने कई साइकिल स्टंट दिखाकर दर्शकों का मनोरंजन किया। इसके बाद वह बोरी में घुसा और पूर्व तैयार गड्ढे में उतार दिया गया, जिस पर मिट्टी डाल दी गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कलाकार कितनी देर तक जमीन के नीचे रहा और सुरक्षा संबंधी इंतजाम पर्याप्त थे या नहीं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के स्टंट बेहद जोखिम भरे होते हैं। सीमित ऑक्सीजन, बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड और बंद जगह में लंबे समय तक रहने से कुछ ही समय में दम घुटने की स्थिति पैदा हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि सांस नियंत्रित करने का अभ्यास भी शरीर की ऑक्सीजन की आवश्यकता को समाप्त नहीं कर सकता, इसलिए ऐसे करतब जानलेवा साबित हो सकते हैं।
मृतक के परिजनों ने घटना पर संदेह जताते हुए कहा कि दीपक वर्षों से यह स्टंट करता था और सामान्य परिस्थितियों में इतना लंबा समय जमीन के नीचे नहीं रहता था। परिवार का आरोप है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और सर्कस से जुड़े लोगों सहित स्थानीय ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने भी बिना अनुमति आयोजित किए गए इस तरह के जानलेवा कार्यक्रमों की जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि यदि नियमों का उल्लंघन सामने आया तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि ग्रामीण मेलों और अस्थायी सर्कसों में जान जोखिम में डालने वाले खतरनाक करतबों पर निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन कितना जरूरी है।




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