‘सिर्फ फोटो सेशन नहीं, धरातल पर दिखनी चाहिए सफाई’
जहां पर सुविधा नहीं वहां से क्यों वसूल रहा है नगर निगम टैक्स : चौधरी चंदन सिंह
मेयर को देना चाहिए नैतिकता के आधार पर अपना इस्तीफा वरना मैं जाऊंगा कोर्ट : चौधरी चंदन सिंह
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा सेक्टर-20 से स्वच्छता अभियान की शुरुआत किए जाने के बाद पंचकूला में भाजपा नेताओं, पार्षदों और जनप्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न स्थानों पर सफाई अभियान चलाया गया। हालांकि इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद अभियान की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। वायरल वीडियो में एक पुल के नीचे कूड़े के ढेर और उसमें चारा तलाशती गाय दिखाई दे रही है। इस वीडियो को समाजसेवी एवं नगर निगम मेयर पद के पूर्व प्रत्याशी चंदन सिंह ने साझा किया, जिसके बाद अखबार की टीम उनके पास पहुंची । अखबार की टीम के साथ उन्होंने कई स्थानीय मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश
प्रश्न: सोशल मीडिया पर आपके द्वारा साझा किए गए वीडियो के बाद चर्चा तेज हो गई है। क्या आपका उद्देश्य सरकार या स्वच्छता अभियान पर सवाल उठाना था?
उत्तर (चंदन सिंह): बिल्कुल नहीं। मेरा उद्देश्य किसी सरकार को बदनाम करना नहीं था। मैं नियमित रूप से गोल्फ खेलने जाता हूं और उसी दौरान माजरी चौक के पास पुल के नीचे भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा पड़ा देखा। वहां गाय भी उसी कूड़े में भोजन तलाश रही थी। यह दृश्य देखकर लगा कि जिस शहर में बड़े स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाने का दावा किया जा रहा है, वहां वास्तविक स्थिति भी सामने आनी चाहिए। इसलिए मैंने वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया।
प्रश्न: लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधि लगातार सफाई अभियान चला रहे हैं। फिर भी आप व्यवस्था पर सवाल क्यों उठा रहे हैं?
उत्तर: मुख्यमंत्री की पहल सराहनीय है और लोगों ने उसमें भाग भी लिया। लेकिन मेरा कहना है कि अभियान केवल एक दिन का आयोजन या फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। कई स्थानों पर देखा गया कि एक छोटे से क्षेत्र में कई लोग एक साथ झाड़ू लगा रहे थे, जबकि शहर के अन्य हिस्सों में गंदगी जस की तस बनी हुई है। यदि दस लोग अभियान में शामिल हैं तो उन्हें अलग-अलग स्थानों पर सफाई करनी चाहिए, ताकि पूरे शहर को इसका लाभ मिले।
प्रश्न: क्या आपको लगता है कि अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गया?
उत्तर: मेरा मानना है कि यदि अभियान लगातार चलता रहे और शहर के हर क्षेत्र तक पहुंचे तो उसका वास्तविक लाभ मिलेगा। केवल किसी बड़े कार्यक्रम या वीआईपी दौरे तक सीमित रहने से शहर पूरी तरह स्वच्छ नहीं हो सकता। जरूरत है कि अभियान नियमित रूप से जारी रहे और प्रशासन इसकी निगरानी करे।
एम-टैक्स और ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधाओं पर भी उठाए सवाल
प्रश्न: नगर निगम इन दिनों संपत्ति कर (एम-टैक्स) जमा कराने पर छूट दे रहा है। इस पर आपकी क्या राय है?
उत्तर: नगर निगम का दायित्व केवल टैक्स वसूलना नहीं बल्कि नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। शहर के कई हिस्सों में सड़कें, स्ट्रीट लाइट, पानी और सीवरेज जैसी सुविधाएं बेहतर हैं, लेकिन निगम सीमा में शामिल कई गांव आज भी इन सुविधाओं से वंचित हैं।
प्रश्न: किन क्षेत्रों की बात कर रहे हैं?
उत्तर: पंचकूला नगर निगम में शामिल कई गांवों में आज भी सड़क, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि न तो उन्हें पहले जैसी पंचायत व्यवस्था का लाभ मिल रहा है और न ही नगर निगम की सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध हैं।
प्रश्न: ऐसे में आपका सुझाव क्या है?
उत्तर: मेरा स्पष्ट मत है कि जहां नगर निगम नागरिकों को पूरी सुविधाएं नहीं दे पा रहा है, वहां एम-टैक्स में राहत दी जानी चाहिए। यदि पूरा टैक्स माफ नहीं किया जा सकता तो कम से कम 50 प्रतिशत तक छूट दी जानी चाहिए। मेरा सिद्धांत है कि जहां पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, वहां टैक्स वसूली पर पुनर्विचार होना चाहिए।
बिजली के निजीकरण का भी किया विरोध
प्रश्न: हरियाणा में बिजली के निजीकरण को लेकर भी चर्चा चल रही है। आप इसे कैसे देखते हैं?
उत्तर: बिजली और पानी जैसी सेवाएं आम जनता के जीवन से सीधे जुड़ी हुई हैं। इनका निजीकरण उचित नहीं है। सरकारी कर्मचारियों और इंजीनियरों ने वर्षों की मेहनत से बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाया है। यदि अब इसे निजी हाथों में दिया जाता है तो भविष्य में बिजली दरों में वृद्धि और आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।
प्रश्न: निजीकरण से क्या नुकसान हो सकते हैं?
उत्तर: निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है। ऐसे में गरीब उपभोक्ताओं और किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं। जहां-जहां निजीकरण हुआ है, वहां बिजली दरें बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं। इसलिए बिजली जैसी आवश्यक सेवा सरकार के नियंत्रण में ही रहनी चाहिए।
मेयर पद को लेकर भी कही बड़ी बात
प्रश्न: हाल ही में पंचकूला नगर निगम के मेयर पद को लेकर विवाद सामने आया है। इस पर आपका क्या कहना है?
उत्तर: मेरा मानना है कि यदि किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और संबंधित विभाग द्वारा कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है तो नैतिक आधार पर उन्हें स्वयं पद छोड़ देना चाहिए। इससे जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सकेगी।
प्रश्न: यदि ऐसा नहीं होता तो आपका अगला कदम क्या होगा?
उत्तर: यदि आवश्यक हुआ तो इस पूरे मामले को न्यायालय तक ले जाया जाएगा। मेरा उद्देश्य व्यक्तिगत विरोध नहीं बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यदि कोई संवैधानिक या कानूनी प्रश्न है तो उसका अंतिम निर्णय न्यायपालिका ही करेगी।
स्वच्छता से लेकर प्रशासनिक जवाबदेही तक कई मुद्दों पर चर्चा
बातचीत के दौरान चंदन सिंह ने कहा कि पंचकूला को वास्तव में स्वच्छ और व्यवस्थित शहर बनाने के लिए केवल प्रतीकात्मक अभियान पर्याप्त नहीं होंगे। उन्होंने नगर निगम से ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने, कर व्यवस्था में संतुलन लाने तथा जनप्रतिनिधियों से नैतिक जवाबदेही निभाने की अपील की। साथ ही उन्होंने बिजली के निजीकरण का विरोध करते हुए इसे आम जनता के हितों से जुड़ा विषय बताया।
पंचकूला में चल रहे स्वच्छता अभियान के बीच सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने सफाई व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकार और नगर निगम शहर को स्वच्छ बनाने के लिए अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समाजसेवी चंदन सिंह ने जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था, ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधाओं, नगर निगम की कर नीति, बिजली के निजीकरण तथा मेयर पद से जुड़े विवाद जैसे मुद्दों को उठाकर प्रशासन से जवाबदेही की मांग की है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।



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