नगर निगम की पहली बैठक में हुआ था फैसला : दो महीने बाद भी पार्षदों को आधिकारिक बोर्ड का इंतजार, पार्षदों के नाम कागजों में!
नए पार्षदों के सरकारी बोर्ड अब तक नहीं लगे; पुराने बोर्ड भी दे रहे गलत पहचान
नगर निगम की नई परिषद की पहली बैठक को दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन पार्षदों के नाम और वार्ड दर्शाने वाले आधिकारिक बोर्ड लगाने का फैसला अब तक जमीन पर नजर नहीं आ रहा। बैठक में तय किया गया था कि सभी पार्षदों के कार्यालय अथवा निवास स्थान के उनके ( पार्षदों के) नाम और वार्ड की जानकारी वाले बोर्ड लगाए जाएंगे, लेकिन फिलहाल यह निर्णय फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया है।
हैरानी की बात यह है कि नई परिषद के किसी भी निर्वाचित पार्षद के नाम का आधिकारिक बोर्ड अभी तक नगर निगम की ओर से नहीं लगाया गया है।
दूसरी ओर, पिछले कार्यकाल के कुछ पार्षदों के बोर्ड अब भी शहर में लगे हुए हैं। इससे कई जगह लोगों को यह समझने में परेशानी हो सकती है कि संबंधित वार्ड का मौजूदा प्रतिनिधि कौन है।
पुराना बोर्ड, नया वार्ड—पहचान का पेंच
वार्डों के परिसीमन और चुनाव के बाद कुछ पार्षदों के वार्ड भी बदले हैं। ऐसे में पुराने बोर्डों का लगे रहना स्थिति को और उलझा रहा है। उदाहरण के तौर पर सुरेश वर्मा पिछले कार्यकाल में वार्ड नंबर-2 से पार्षद थे, जबकि मौजूदा परिषद में वे वार्ड नंबर-3 का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसके बावजूद शहर में दिखाई देने वाला पुराना बोर्ड अभी भी वार्ड नंबर-2 की पहचान दर्शाता है।
अगर पुराने पार्षदों के बोर्ड की बात करें तो पिछले सत्र में वार्ड नंबर 5 से जय कौशिक थे और वार्ड नंबर 9 से हरेंद्र मलिक दोनों ही इस बार भी इस वार्ड से ही चुनाव जीत कर आए हैं इसलिए इन पार्षदों को ना तो बोर्ड की जरूरत है ना ही पहचान की इनके बोर्ड अभी भी लगे हुए हैं ।
सबसे ज्यादा इंतजार उन पार्षदों को है जो पहली बार चुनाव जीत करके नगर निगम में पहुंचे हैं और उनके बोर्ड पहली बैठक के 60 दिन बीतने के बाद भी नहीं लग पाए हैं इसका उनको अब तक मलाल है ।
निगम के बोर्ड का इंतजार, निजी बोर्ड लगाने लगे पार्षद
मिली जानकारी के अनुसार नगर निगम की ओर से आधिकारिक बोर्ड नहीं लगाए जाने के कारण कुछ पार्षदों द्वारा अपने स्तर पर निजी बोर्ड लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इससे सवाल उठ रहा है कि जब पहली बैठक में फैसला लिया जा चुका था, तो उसे लागू करने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
पार्षदों का आधिकारिक बोर्ड महज नाम-पट्टी नहीं, बल्कि आम जनता के लिए उनके निर्वाचित प्रतिनिधि की पहचान का माध्यम होता है। ऐसे में नगर निगम प्रशासन को अब कागजी फैसले को अमलीजामा पहनाकर नए पार्षदों के बोर्ड लगाने की प्रक्रिया जल्द पूरी करनी चाहिए।



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