यादें राज्यसभा 2022 : जब जीत कर भी हार गई थी कांग्रेस, कैसे हुआ था पूरा खेल पढ़िए
18 घंटे तक चला था हरियाणा राज्यसभा चुनाव ड्रामा: नतीजों में देरी बनी परंपरा, 2022 की यादें फिर ताजा
हरियाणा में राज्यसभा चुनाव इस बार भी लंबी और जटिल प्रक्रिया के चलते सुर्खियों में रहा। वोटिंग से लेकर अंतिम परिणाम आने तक करीब 16 घंटे का समय लगा, जिसने एक बार फिर प्रदेश की सियासत में चुनावी गणित और प्रक्रियागत विवादों को उजागर कर दिया। अंततः संजय भाटिया (भाजपा) और कर्मवीर बौद्ध (कांग्रेस) विजयी घोषित हुए।
यह पहली बार नहीं है जब हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के नतीजों में इतनी देरी हुई हो। इससे पहले 2022 के चुनाव में भी परिणाम आने में करीब 18 घंटे लगे थे। उस समय अजय माकन, कृष्ण लाल पंवार और निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा मैदान में थे। कड़ी टक्कर और आपत्तियों के बाद देर रात गिनती शुरू हुई और अंततः भाजपा व निर्दलीय उम्मीदवार ने बाज़ी मार ली, जबकि बहुमत के बावजूद कांग्रेस हार गई थी।
2022 के चुनाव में विवादों की जड़ क्रॉस वोटिंग और वोट रद्द होने की घटनाएं रहीं। कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई पर पार्टी लाइन के खिलाफ वोट करने के आरोप लगे थे। इसके अलावा एक विधायक का वोट रद्द होने से कांग्रेस की स्थिति और कमजोर हो गई थी। उस समय यह भी चर्चा रही कि रद्द हुआ वोट किरण चौधरी से जुड़ा था, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
मौजूदा चुनाव में भी देरी के पीछे प्रक्रियागत आपत्तियां और वोटिंग से जुड़ी तकनीकी जांच प्रमुख कारण रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा के राज्यसभा चुनाव अब केवल संख्या बल का खेल नहीं रह गए हैं, बल्कि इसमें रणनीति, विधायकों की निष्ठा और चुनावी प्रक्रिया की बारीकियां निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।
लगातार दो चुनावों में लंबी काउंटिंग और विवादों ने यह संकेत दे दिया है कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया को और पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाने की आवश्यकता है। अन्यथा हर बार नतीजों से पहले पैदा होने वाला सस्पेंस और राजनीतिक खींचतान लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता रहेगा।
कैसे और किस तरह होती है राज्यसभा में वोटो की गिनती कभी-कभी जीत कर भी हार जाता है एक उम्मीदवार !
राज्यसभा चुनाव में वोटों की गिनती एक खास तरीके से होती है, जिसे “वोट वैल्यू” कहते हैं। इस चुनाव में, हर विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है।
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं, लेकिन 2022 के राज्यसभा चुनाव के दौरान निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने वोट नहीं दिया, इसलिए कुल 89 वोट पड़े। इस तरह, कुल वोट वैल्यू 8900 हुई।
जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 2934 वोट वैल्यू चाहिए थी। भाजपा उम्मीदवार कृष्ण लाल पंवार को 36 विधायकों ने वोट दिया, यानी 3600 वोट वैल्यू मिली। पंवार को जीतने के लिए सिर्फ 2934 वोट वैल्यू की जरूरत थी, इसलिए उनके पास 666 वोट वैल्यू बच गई।
कांग्रेस के अजय माकन को 29 विधायकों ने वोट दिया, यानी 2900 वोट वैल्यू मिली। इसी तरह निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा को 23 विधायकों ने वोट दिया, यानी 2300 वोट वैल्यू मिली।
कुलदीप बिश्नोई ने क्रॉस वोटिंग की, यानी उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार अजय माकन को वोट नहीं दिया। एक कांग्रेस विधायक का वोट रद्द हो गया, जिससे माकन की वोट वैल्यू और कम हो गई।
पंवार के पास जो 666 वोट वैल्यू बची थी, वह कार्तिकेय शर्मा के खाते में जुड़ गई। इससे कार्तिकेय की कुल वोट वैल्यू 2966 हो गई, जो जीतने के लिए जरूरी 2934 से ज्यादा थी। अजय माकन को 2900 वोट वैल्यू मिली, जो जीत के आंकड़े से 66 वोट वैल्यू कम थी। इस तरह, माकन 66 वोट वैल्यू से हार गए। यानी एक वोट से भी कम का अंतर था। ठीक ऐसा, जैसे इस बार हुआ। इस बार जीत का अंतर .33 का रहा।




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