खबरी प्रशाद अखबार पर लगी मोहर : तीन उम्मीदवारों के नामांकन हुए वापस, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद संभाली कमान, नगर निगम चुनाव में बदले सियासी समीकरण
तीन उम्मीदवारों के नामांकन हुए वापस, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद संभाली कमान, नगर निगम चुनाव में बदले सियासी समीकरण
चंडीगढ़। हरियाणा के नगर निगम चुनावों में मंगलवार को पूरा दिन सियासी उठापटक और हाई वोल्टेज ड्रामे से भरा रहा। तीन अहम उम्मीदवारों के नामांकन वापस होने के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल गया। सबसे खास बात यह रही कि खुद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को मैदान में उतरना पड़ा और उन्होंने एक-एक कर कई वार्डों में हालात संभालने की कोशिश की। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई कि शुरुआती रुझानों में भाजपा पर दबाव बढ़ता देख मुख्यमंत्री को सीधे मोर्चा संभालना पड़ा। खबरी प्रशाद अखबार ने मंगलवार को छपे अंक में ही बता दिया था की सीएम सैनी मैदान में उतारकर खुद मोर्चा संभाल सकते है और हुआ भी वैसा भी।
मुख्यमंत्री सुबह से ही पंचकूला में रहे सक्रिय, वार्ड नंबर 3 से शुरू हुआ अभियान
मंगलवार सुबह से ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पंचकूला में डटे रहे। उन्होंने सबसे पहले वार्ड नंबर 3 में गोयल परिवार के घर पहुंचकर वरिष्ठ सदस्य सी.बी. गोयल से मुलाकात की और चाय-नाश्ते के दौरान चुनावी समीकरणों पर बातचीत की। इस मुलाकात के बाद सी.बी. गोयल को नामांकन वापस लेने के लिए तैयार कर लिया गया। नामांकन वापसी के बाद भाजपा खेमे में थोड़ी राहत जरूर दिखी, क्योंकि इस वार्ड में मुकाबला काफी टकराव वाला माना जा रहा था।
वार्ड नंबर 4 में सोनिया सूद का नामांकन वापस, पहले से चल रही थी चर्चाओं की हवा
इसके बाद वार्ड नंबर 4 में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहां सोनिया सूद ने अपना नामांकन वापस ले लिया। हालांकि यह फैसला पूरी तरह अचानक नहीं माना जा रहा, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से इस सीट को लेकर अंदरखाने राजनीतिक दबाव और समझाइश की चर्चा लगातार चल रही थी।
सूत्रों के मुताबिक, पहले ही संकेत मिल गए थे कि या तो उम्मीदवार को पार्टी लाइन के अनुसार समन्वय बनाना होगा या फिर चुनावी दौड़ से हटना पड़ेगा। नामांकन वापसी के बाद उमेश सूद ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री की ओर से वार्ड नंबर 6 से चुनाव लड़ने का सुझाव मिला था, लेकिन वे अपने क्षेत्र को छोड़कर कहीं और से चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं थे, इसलिए उन्होंने नामांकन वापस ले लिया।
वार्ड नंबर 14 में अंतिम समय तक चला ड्रामा, सुशील गर्ग नरवाना ने लिया नाम वापस
दोपहर बाद वार्ड नंबर 14 में भी सियासी तापमान अचानक बढ़ गया। यहां निर्दलीय उम्मीदवार सुशील गर्ग नरवाना ने चुनावी मैदान में मजबूत दावेदारी पेश की थी और मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा था।
करीब 2:40 बजे के आसपास उन्हें मनाने की प्रक्रिया शुरू हुई और कुछ ही देर बाद उनका नामांकन वापस करवा लिया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी स्वयं उनके आवास पर पहुंचे और चाय-नाश्ते के दौरान बातचीत भी की। इस मुलाकात को सियासी रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
तीन नामांकन वापसी से भाजपा को राहत, लेकिन तस्वीर अभी भी पूरी साफ नहीं
तीन उम्मीदवारों के नामांकन वापस होने के बाद भाजपा खेमे में फिलहाल राहत की सांस जरूर ली जा रही है, लेकिन अंदरखाने यह भी माना जा रहा है कि चुनावी जंग अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कई वार्डों में मुकाबला अब भी बेहद करीबी बना हुआ है और थोड़ी सी भी वोटों की हलचल परिणाम बदल सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नामांकन वापस होने के बाद यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी उम्मीदवार पूरी तरह भाजपा के पक्ष में आ जाएंगे। पर्दे के पीछे की सियासत और व्यक्तिगत समीकरण आने वाले दिनों में तस्वीर को और भी बदल सकते हैं।
आने वाले दिनों में और तेज होगा चुनावी घमासान
नगर निगम चुनावों में अब अंतिम चरण की गतिविधियां तेज होने जा रही हैं। जहां एक तरफ सत्ता पक्ष अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष भी कमजोर वार्डों में रणनीति बदलने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री की सक्रिय भूमिका ने चुनावी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े सियासी घटनाक्रम सामने आने की पूरी संभावना है।
अग्रवाल भवन में सर्व समाज की बैठक में सियासी समर्थन को लेकर बयान, मनोज अग्रवाल को अग्रवाल समाज का समर्थन नहीं देने की बात सामने आई
पंचकूला। सेक्टर 16 स्थित अग्रवाल भवन में मंगलवार को “सर्व समाज” के नाम से एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें पंचकूला के विभिन्न समाजों से जुड़े कई प्रबुद्ध लोग मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य आगामी नगर निगम चुनावों को लेकर सामाजिक स्तर पर रुख तय करना बताया गया, लेकिन चर्चा के दौरान कई राजनीतिक बयान सामने आने से माहौल गरमाता नजर आया।
बैठक में श्यामलाल बंसल को समर्थन देने का ऐलान किया गया, जिसे उपस्थित कुछ लोगों ने विकास के मुद्दे से जोड़कर उचित ठहराया। बताया गया कि शहर के विकास और स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह समर्थन दिया जा रहा है। हालांकि इस घोषणा के बाद बैठक में अलग-अलग मत भी सामने आए और माहौल में हल्की असमंजस की स्थिति बनी रही।
इसी दौरान जब ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि एम.पी. शर्मा से सवाल किया गया कि ब्राह्मण समाज से महिला मेयर प्रत्याशी की मौजूदगी में समाज किसका समर्थन करेगा, तो उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज विकास को प्राथमिकता देते हुए श्यामलाल बंसल का समर्थन करेगा। इस बयान के बाद कार्यक्रम में चर्चा और तेज हो गई, क्योंकि महिला प्रत्याशी के समर्थन को लेकर भी संतुलन की बहस सामने आई।
वार्ड नंबर 3 को लेकर अग्रवाल समाज के कन्वीनर अमित जिंदल ने कहा कि इस वार्ड में समाज का समर्थन भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी सुरेश वर्मा को रहेगा और रजनीश सिंगला को समर्थन नहीं दिया जाएगा। इस बयान से यह संकेत भी मिला कि कई वार्डों में समाजिक समर्थन पार्टी आधारित दिशा में जा रहा है।
बैठक के दौरान उस समय स्थिति थोड़ी असहज हो गई जब एक पत्रकार ने सवाल उठाया कि क्या यह वास्तव में सर्व समाज की बैठक है या फिर किसी राजनीतिक दल विशेष का समर्थन मंच बनती जा रही है। पत्रकार ने यह भी पूछा कि क्या समाज के नाम पर दिए जा रहे समर्थन के लिए सभी सदस्यों की सहमति ली गई है या यह केवल कुछ चुनिंदा लोगों की राय है। इस सवाल के बाद कुछ देर के लिए माहौल में बहस जैसी स्थिति बन गई।
पूरे घटनाक्रम के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई कि चुनावी माहौल में सामाजिक मंचों की भूमिका धीरे-धीरे राजनीतिक दिशा में बदलती जा रही है। हालांकि आयोजकों की ओर से इसे शहर के विकास और जनहित से जोड़कर देखा गया, लेकिन अलग-अलग वर्गों में इस पर अलग राय सामने आई।
पंचकूला में अग्रवाल समाज के समर्थन पर बयान से बढ़ी सियासी हलचल, मनोज अग्रवाल ने उठाए प्रतिनिधित्व पर सवाल
पंचकूला नगर निगम चुनाव में अग्रवाल समाज के समर्थन को लेकर उठे विवाद के बीच इंडियन नेशनल लोकदल के मेयर प्रत्याशी मनोज अग्रवाल का बयान राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है। उन्होंने एक संदेश जारी करते हुए कहा कि पंचकूला के पूरे अग्रवाल समाज का प्रतिनिधित्व कुछ चुनिंदा लोग नहीं कर सकते और समाज के नाम पर किसी एक प्रत्याशी को सामूहिक समर्थन देने का दावा उचित नहीं है।
मनोज अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि किसी भी समाज का आकार और सोच इतनी व्यापक होती है कि उसे केवल 15–20 लोगों के समूह तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई छोटा समूह, जो खुद को समाज का प्रतिनिधि बताता है, पूरे अग्रवाल समाज की राजनीतिक पसंद तय कर सकता है। उनके अनुसार यह मानना गलत होगा कि पंचकूला का पूरा अग्रवाल समाज किसी एक राजनीतिक दल या प्रत्याशी के साथ एकतरफा खड़ा है, क्योंकि समाज के लोग विभिन्न दलों और विचारधाराओं में सक्रिय हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट और निर्णय व्यक्तिगत होता है और उसे किसी मंच या बैठक के आधार पर निर्धारित नहीं किया जा सकता। मनोज अग्रवाल ने यह सवाल भी उठाया कि क्या कुछ आर्थिक रूप से प्रभावशाली लोग समाज के वोटिंग अधिकारों का निर्णय कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी अग्रवाल समाज से आते हैं और एक राजनीतिक दल के मेयर प्रत्याशी होने के बावजूद समाज का हिस्सा हैं, इसलिए समाज के प्रतिनिधित्व को किसी एक व्यक्ति या समूह तक सीमित नहीं किया जा सकता।
अपने संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में कुछ लोगों द्वारा भाजपा प्रत्याशी के समर्थन को “समस्त अग्रवाल समाज” का समर्थन बताने की घोषणा की गई, जिस पर उन्होंने असहमति जताई। उन्होंने इसे समाज के व्यापक जनमत का प्रतिनिधित्व नहीं माना और कहा कि समाज में हर व्यक्ति की अपनी राजनीतिक सोच और पसंद होती है।
मनोज अग्रवाल ने आगे कहा कि समाज के मंचों पर सम्मान पाने वाले कुछ लोगों को यह अधिकार नहीं है कि वे सीमित बैठक में पूरे समाज के राजनीतिक भविष्य का निर्णय घोषित कर दें। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अग्रवाल समाज कोई कॉरपोरेट इकाई है, जहां कुछ लोग मिलकर पूरे समाज की दिशा तय कर दें।
उन्होंने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि वे किसी दल के बजाय अपनी समझ और विवेक के आधार पर मतदान करें और किसी भी तरह के सामूहिक दबाव या घोषणा से प्रभावित न हों। उनके अनुसार लोकतंत्र की असली ताकत व्यक्ति की स्वतंत्र सोच में निहित है।



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