साइकिल चलाए, ईंधन बचाएं, पर्यावरण सुधारें और सड़कों का बोझ घटाएं
विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2018 में इस दिवस को औपचारिक मान्यता प्रदान की गई थी। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को साइकिल के महत्व, उसके स्वास्थ्य लाभों, पर्यावरण संरक्षण में उसकी भूमिका तथा सतत विकास में उसके योगदान के प्रति जागरूक करना है।
साइकिल मानव सभ्यता का ऐसा साधन है जिसने न केवल परिवहन को सरल बनाया, बल्कि समाज को स्वास्थ्य, समानता और सादगी का अमूल्य संदेश भी दिया है।
आज का युग आधुनिकता और तकनीक का युग है। जीवन की गति इतनी तीव्र हो गई है कि व्यक्ति समय बचाने की दौड़ में अपने स्वास्थ्य को ही पीछे छोड़ता जा रहा है। कुछ कदम पैदल चलना भी लोगों को कठिन लगने लगा है।
घर से बाजार, कार्यालय, विद्यालय या अन्य छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी मोटरसाइकिल, स्कूटर और कार का प्रयोग सामान्य बात हो गई है। परिणामस्वरूप शारीरिक श्रम निरंतर कम होता जा रहा है और मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग तथा मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं।
कुछ दशक पीछे जाएं तो स्थिति बिल्कुल भिन्न दिखाई देती है। लगभग तीस–चालीस वर्ष पहले अधिकांश परिवारों में साइकिल ही प्रमुख परिवहन साधन हुआ करती थी। गांवों में किसान खेतों तक साइकिल से जाते थे, विद्यार्थी विद्यालय और महाविद्यालय साइकिल पर पहुंचते थे तथा कर्मचारी कार्यालयों में साइकिल से आते-जाते थे।
उस समय लोगों का जीवन अधिक सक्रिय था और वे अपेक्षाकृत अधिक स्वस्थ रहते थे।
मुझे अपने परिवार के अनुभव आज भी स्मरण हैं। मेरे पिता श्री कली राम भारतीय सेना में कार्यरत थे और भारत-पाक सीमा पर नियुक्त थे। उन दिनों मेरे दादा और ताऊजी कई-कई किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करके उनसे मिलने जाते थे।
आज के समय में यह बात असंभव सी लग सकती है, किंतु उस समय यह सामान्य जीवन का भाग था। लोग शारीरिक रूप से इतने सक्षम होते थे कि एक ही साइकिल पर दो या तीन व्यक्ति बैठकर यात्रा कर लेते थे।
रास्ते में मिलने वाले लोग एक-दूसरे का हालचाल पूछते, अपनापन जताते और आवश्यकता पड़ने पर सहायता भी करते थे। साइकिल केवल यात्रा का साधन नहीं थी, बल्कि सामाजिक सद्भाव और मानवीय संबंधों की भी वाहक थी।
साइकिल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पर्यावरण के लिए पूर्णतः अनुकूल साधन है। इसमें पेट्रोल, डीज़ल या गैस की आवश्यकता नहीं होती। इससे धुआँ नहीं निकलता, वायु प्रदूषण नहीं होता और ध्वनि प्रदूषण भी नहीं फैलता।
यदि साइकिल में कोई समस्या, जैसे पंक्चर हो जाए, तो व्यक्ति इसे सरलता से ठीक कर सकता है। यदि सड़क टेढ़ी-मेढ़ी हो या मार्ग चलने योग्य न हो, तो साइकिल को अपने कंधे पर उठाकर भी आगे बढ़ सकता है।
आज विश्व के अधिकांश बड़े शहर प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआँ मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक सिद्ध हो रहा है।
यदि लोग छोटी दूरियों के लिए साइकिल का उपयोग प्रारंभ कर दें तो प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या और वाहनों की संख्या ने यातायात व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। सड़कों का लगातार विस्तार किया जा रहा है, फिर भी जाम की समस्या समाप्त नहीं हो रही।
दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम, बेंगलुरु और अन्य महानगरों में लोग प्रतिदिन घंटों ट्रैफिक जाम में फँसे रहते हैं। इससे समय, धन और ऊर्जा तीनों की हानि होती है।
यदि छोटी दूरी के लिए साइकिल का प्रयोग बढ़े तो यातायात का दबाव भी कम होगा और लोगों का समय भी बचेगा।
साइकिल स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभदायक है। नियमित साइकिल चलाने से हृदय मजबूत होता है, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, रक्त संचार बेहतर होता है तथा शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है।
यह एक ऐसा व्यायाम है जिसमें शरीर के लगभग सभी अंग सक्रिय रहते हैं। चिकित्सकों का मानना है कि प्रतिदिन 30 से 45 मिनट तक साइकिल चलाना अनेक गंभीर रोगों के जोखिम को कम कर सकता है।
मानसिक तनाव को कम करने और मन को प्रसन्न रखने में भी साइकिल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विडंबना यह है कि आज अनेक लोग घर से कार में बैठकर जिम तक जाते हैं और वहां पहुंचकर स्थिर साइकिल पर व्यायाम करते हैं। यदि वही व्यक्ति अपने दैनिक कार्यों के लिए वास्तविक साइकिल का प्रयोग करें तो स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।
विश्व के अनेक देशों ने साइकिल संस्कृति को अपनाकर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी जैसे देशों में बड़ी संख्या में लोग साइकिल से कार्यालय जाते हैं।
वहां सरकारों ने साइकिल लेन और सुरक्षित मार्ग विकसित किए हैं। परिणामस्वरूप प्रदूषण कम हुआ है और नागरिकों का स्वास्थ्य बेहतर बना है।
क्यूबा का उदाहरण भी अत्यंत प्रेरणादायक है। आर्थिक कठिनाइयों और ईंधन संकट के समय वहां साइकिल को व्यापक रूप से अपनाया गया।
इससे ईंधन की बचत हुई, पर्यावरण में सुधार आया तथा लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर हुआ।
हरियाणा में भी साइकिल के माध्यम से जनजागरण के अनेक प्रयास किए गए हैं। साइक्लोथॉन यात्राओं ने नशा मुक्ति और स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश दिया है।
प्रेरणा समिति हरियाणा द्वारा भी वर्षों से साइकिल रैलियों का आयोजन किया जा रहा है।
मुझे यह संतोष है कि मैं स्वयं वर्षों से दैनिक जीवन में साइकिल का उपयोग कर रहा हूँ तथा विभिन्न जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को इसके लिए प्रेरित करता रहा हूँ।
आज आवश्यकता केवल साइकिल दिवस मनाने की नहीं, बल्कि साइकिल संस्कृति को पुनर्जीवित करने की है।
यदि प्रत्येक परिवार एक मोटर वाहन के साथ एक साइकिल को भी अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना ले, तो स्वास्थ्य, पर्यावरण और आर्थिक बचत के क्षेत्र में आश्चर्यजनक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
कुछ दिन पूर्व माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी ईंधन बचत और ऊर्जा संरक्षण पर विशेष जोर दिया है तथा छोटी दूरी के लिए साइकिल के उपयोग का आह्वान किया है।
विश्व साइकिल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि प्रगति का अर्थ केवल तेज गति नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और पर्यावरण-अनुकूल जीवन भी है।
साइकिल सादगी, स्वास्थ्य, अनुशासन और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
आइए हम संकल्प लें कि अपने दैनिक जीवन में साइकिल को उचित स्थान देंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ, स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण के निर्माण में योगदान देंगे।
“छोड़ो शर्माना, अच्छे स्वास्थ्य के लिए साइकिल से करो आना-जाना।”
“पर्यावरण बचाना है तो साइकिल को अपनाना है।”
लेखक – डॉ. अशोक कुमार वर्मा




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