तुम सिर्फ़ गुलाम पत्रकार हो… 2014 की आज़ादी के बाद…?
व्यंग्य – राजेन्द्र सिंह जादौन पत्रकार बंधुओं, अगर अभी भी आपको लगता है कि आप लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं, तो कृपया यह भ्रम तुरंत छोड़ दीजिए। भ्रम जितनी जल्दी टूट जाए, उतना अच्छा रहता है। क्योंकि आजकल भ्रम पालना सबसे महँगा शौक है। पेट्रोल महँगा है, गैस महँगी है, दाल महँगी है, लेकिन सबसे […]

