इंडिया टुडे समूह में 120 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी, कई विभागों पर पड़ा असर
रीस्ट्रक्चरिंग के नाम पर कर्मचारियों को छोड़नी पड़ी नौकरी
देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों में शामिल इंडिया टुडे समूह में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की गई है। 20 जुलाई से 24 जुलाई के बीच 120 से अधिक कर्मचारियों को संगठन से बाहर का रास्ता दिखाया गया। प्रभावित कर्मचारियों में आज तक हिंदी वेबसाइट, कैमरा, वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक्स, फैक्ट-चेक, डेटा इंटेलिजेंस यूनिट, रेडियो और अन्य विभागों से जुड़े कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पहले से किसी प्रकार का संकेत नहीं दिया गया था और कार्य के दौरान अचानक एचआर विभाग में बुलाकर इस्तीफा देने के लिए कहा गया।
काम पर पहुंचे, कुछ घंटों बाद मिला इस्तीफा देने का निर्देश
कई कर्मचारियों के अनुसार, वे सामान्य दिनों की तरह कार्यालय पहुंचे और अपने दैनिक कार्य में व्यस्त थे। इसी दौरान उन्हें एचआर विभाग में बुलाया गया, जहां प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने बताया कि कंपनी में रीस्ट्रक्चरिंग की प्रक्रिया चल रही है और इसी कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से नौकरी छोड़नी होगी। कर्मचारियों का दावा है कि उनके कार्य प्रदर्शन पर कोई सवाल नहीं उठाया गया और केवल संगठनात्मक पुनर्गठन का हवाला देकर इस्तीफा देने को कहा गया।
कई कर्मचारियों ने जताई नाराजगी
प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अपने साथियों से ठीक तरह से विदाई लेने का भी अवसर नहीं मिला। कुछ कर्मचारियों ने इस प्रक्रिया को असम्मानजनक बताते हुए कहा कि वर्षों तक संस्थान में काम करने के बावजूद उन्हें अचानक बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वहीं, कुछ कर्मचारियों ने कारण जानने की कोशिश की, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
इस्तीफा देने और सेवा समाप्ति की अलग प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार, अधिकांश कर्मचारियों ने एचआर के निर्देश पर इस्तीफा दे दिया, जबकि कुछ ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों को दो महीने का वेतन अग्रिम रूप से दिया गया, जबकि जिन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गईं, उनके लिए अलग भुगतान प्रक्रिया अपनाई गई। पूरी प्रक्रिया एचआर मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरी कराई गई।
पहले भी हो चुकी है कर्मचारियों की संख्या में कटौती
सूत्रों के अनुसार, यह छंटनी किसी एक सप्ताह तक सीमित नहीं है। इससे पहले भी समूह के विभिन्न प्रकाशनों और विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम की गई थी। मई महीने में भी पत्रिका से जुड़े कुछ कर्मचारियों को हटाया गया था। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से संगठन में लगातार लागत कम करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
आर्थिक दबाव को माना जा रहा प्रमुख कारण
समूह के कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी आर्थिक दबाव का सामना कर रही है। उनका दावा है कि प्रबंधन ने कर्मचारियों के सामने सीधे तौर पर वित्तीय स्थिति का उल्लेख नहीं किया, लेकिन रीस्ट्रक्चरिंग के पीछे लागत में कटौती और वित्तीय चुनौतियां प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। हाल के वित्तीय परिणामों में भी कंपनी के लाभ और राजस्व में गिरावट दर्ज की गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विज्ञापन से होने वाली आय में कमी, पुनर्गठन पर बढ़ा खर्च और रेडियो कारोबार से हुए नुकसान का असर कंपनी के प्रदर्शन पर पड़ा है।

प्रबंधन की प्रतिक्रिया का इंतजार
छंटनी के मुद्दे पर इंडिया टुडे समूह के वरिष्ठ अधिकारियों और एचआर विभाग से प्रतिक्रिया मांगी गई है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। ऐसे में कर्मचारियों द्वारा लगाए गए दावों पर प्रबंधन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।




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