पत्रकार से दुर्व्यवहार मामले में पंचकूला पुलिस का बड़ा एक्शन, डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने तुरंत लिया संज्ञान, दो पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, विभागीय जांच शुरू
“मीडिया लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ, पत्रकारों के सम्मान से कोई समझौता नहीं” — पुलिस कमिश्नर शिवास कविराज
पंचकूला में एक पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला शनिवार को पूरे शहर में चर्चा का विषय बना रहा। मामले ने उस समय गंभीर मोड़ ले लिया जब पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस उपायुक्त कार्यालय पहुंचा और डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पत्रकारों ने इस मामले को केवल एक व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि पूरे पत्रकार समाज के सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई की मांग की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने तुरंत प्रभाव से कार्रवाई करते हुए सब इंस्पेक्टर सौरव रावत और एएसआई गुरमेज सिंह को लाइन हाजिर कर दिया। वहीं संबंधित इंचार्ज इंस्पेक्टर निर्मल सिंह से जवाब तलब किया गया है। इसके साथ ही तीनों पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन की ओर से तेज़ी से की गई कार्रवाई को लेकर पत्रकारों में भी संतोष दिखाई दिया। पत्रकारों का कहना था कि यह मामला केवल एक पत्रकार के साथ हुए दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों के सम्मान से जुड़ा विषय है।
एडीजीपी शिवास कविराज का सख्त संदेश
इस पूरे मामले में पंचकूला पुलिस कमिश्नर (एडीजीपी) शिवास कविराज ने भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मीडिया लोकतंत्र का एक मजबूत और जिम्मेदार स्तंभ है और पत्रकार समाज की आवाज बनकर जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं.
उन्होंने कहा कि पंचकूला पुलिस पत्रकारों की भूमिका का सम्मान करती है और भविष्य में किसी भी पत्रकार के साथ अभद्रता, दुर्व्यवहार या अनैतिक व्यवहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस विभाग पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता के साथ कार्य करता रहेगा।
पुलिस कमिश्नर के इस बयान को पत्रकारों के प्रति सकारात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। पत्रकार संगठनों ने भी माना कि प्रशासन ने समय रहते मामले को गंभीरता से लिया और त्वरित कार्रवाई कर एक बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है।
एचबीसी न्यूज और खबरी प्रशाद के मुख्य संपादक रितेश माहेश्वरी से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला और किसी का नहीं बल्कि एचबीसी न्यूज और खबरी प्रशाद अखबार के मुख्य संपादक रितेश माहेश्वरी से जुड़ा हुआ है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह मामला सार्वजनिक रूप से सामने आया था।
प्रेस वार्ता के दौरान जब एक अन्य पत्रकार ने मनीष तिवारी से सवाल पूछा तो उन्होंने पत्रकारों के समर्थन में खुलकर बयान देते हुए कहा था कि “पूरी कांग्रेस पत्रकारों के साथ खड़ी है।” इसके बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
शुक्रवार को ही पत्रकारों ने एकजुट होकर ऐलान कर दिया था कि यदि मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो शनिवार सुबह 11 बजे चरखा चौक (बेलाविस्पता चौक) पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इस घोषणा के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई थी।
देर रात शुरू हुआ डैमेज कंट्रोल
जैसे ही मामला बढ़ने लगा, राजनीतिक स्तर पर भी डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू हो गई थीं। देर रात से ही पत्रकारों से लगातार संपर्क साधा जा रहा था और पूरे मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने के प्रयास किए जा रहे थे।
शनिवार सुबह करीब 9 बजे पत्रकारों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बैठक शुरू हुई। अधिकारियों ने पत्रकारों को आश्वस्त किया कि उन्हें इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी देर रात ही प्राप्त हुई थी और मामले में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने पत्रकारों से धरना प्रदर्शन स्थगित करने की अपील भी की। डीसीपी सृष्टि गुप्ता द्वारा तुरंत कार्रवाई और निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद पत्रकारों ने प्रस्तावित धरने को फिलहाल अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया।
पत्रकारों के समर्थन में दिखी पंचकूला पुलिस
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पंचकूला पुलिस का रवैया पत्रकारों के प्रति सहयोगात्मक दिखाई दिया। पुलिस अधिकारियों ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पत्रकार समाज की रीढ़ हैं और पंचकूला के पत्रकार हमेशा कानून व्यवस्था बनाए रखने और सामाजिक मुद्दों को उजागर करने में पुलिस के साथ खड़े दिखाई देते हैं।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि मीडिया और पुलिस दोनों समाज के हित में कार्य करते हैं और दोनों के बीच आपसी सम्मान और समन्वय बेहद जरूरी है।



Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!