गलगोटिया यूनिवर्सिटी एआई समिति से हुई बाहर: पूरी दुनिया में भारत की इज्जत उतरवाने के बाद अपनी सफाई में बोली गलगोटिया यूनिवर्सिटी
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट के दौरान प्रदर्शित एक रोबोटडॉग को लेकर उठा विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि कार्यक्रम में प्रदर्शित रोबोट को स्वदेशी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किए जाने की कोशिश हुई, जबकि बाद में स्पष्ट हुआ कि वह चीन की कंपनी Unitree से खरीदा गया उत्पाद है। मामले के तूल पकड़ने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने औपचारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।
विवाद तब गहराया जब सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि समिट में प्रदर्शित रोबोट को भारतीय नवाचार का उदाहरण बताकर पेश किया गया। आलोचकों का कहना है कि यदि तकनीक आयातित थी तो उसे स्वदेशी उपलब्धि की तरह प्रस्तुत करना देश की साख को प्रभावित करता है। खासकर ऐसे मंच पर, जहां भारत वैश्विक तकनीकी नेतृत्व का संदेश देने की कोशिश कर रहा हो।
यूनिवर्सिटी ने अपने बयान में कहा है कि रोबोटडॉग संस्थान द्वारा निर्मित नहीं है, बल्कि इसे शैक्षणिक उद्देश्यों से खरीदा गया है। उनका तर्क है कि यह कोई “शोपीस” नहीं, बल्कि छात्रों के लिए एक प्रयोगात्मक प्लेटफॉर्म है, जिस पर वे प्रोग्रामिंग, एआई एल्गोरिद्म और रोबोटिक्स के व्यावहारिक पहलुओं को सीख रहे हैं। यूनिवर्सिटी का यह भी कहना है कि उसने कभी सार्वजनिक रूप से यह दावा नहीं किया कि रोबोट का डिजाइन या निर्माण उसी ने किया है।
हालांकि, सवाल यह उठ रहा है कि यदि ऐसा कोई दावा नहीं किया गया था, तो भ्रम की स्थिति पैदा कैसे हुई? विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मंचों पर तकनीकी प्रदर्शन के दौरान पारदर्शिता सर्वोपरि होती है। आयातित तकनीक का प्रदर्शन करना गलत नहीं, लेकिन उसकी प्रकृति और स्रोत को स्पष्ट न करना संदेह को जन्म देता है।
इस पूरे प्रकरण ने देश में तकनीकी आत्मनिर्भरता बनाम तकनीकी आयात की बहस को फिर हवा दे दी है। एक ओर सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों के जरिए स्वदेशी नवाचार पर जोर देती रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे विवाद विपक्ष और आलोचकों को सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाने का अवसर देते हैं।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अंत में कहा है कि उसका उद्देश्य युवाओं को अत्याधुनिक तकनीक से परिचित कराना है, ताकि वे भविष्य में भारत में ही विश्वस्तरीय समाधान विकसित कर सकें। लेकिन इस सफाई के बावजूद यह मामला यह संकेत देता है कि तकनीकी आयोजनों में प्रस्तुति और दावों की भाषा को लेकर अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
एआई समिट का मकसद भारत की वैश्विक तकनीकी छवि को मजबूत करना था, परंतु यह विवाद इस बात की याद दिलाता है कि दावों से ज्यादा महत्वपूर्ण है पारदर्शिता और विश्वसनीयता।
डीडी न्यूज़ को गलगोटिया की खबर डिलीट करनी पड़ी !
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने भारत की ऐसी थू-थू कराई है कि डीडी न्यूज़ जैसी विश्वसनीय संस्था को अपना ट्वीट तक डिलीट कर देना पड़ा। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि दिन रात खबरों के नाम पर खोजबीन करते रहने वाले चैनल्स गलगोटिया के फर्जीवाड़े में मूर्ख कैसे बन गए। पहले बढ़ा चढ़ाकर ढोल पीटा और बाद में खबर हटानी पड़ी। उधर चीन भी भारत का जमकर मजाक उड़ा रहा है, इसकी वजह बनी है गलगोटिया की चोरी…
विवाद पर क्या बोले सामाजिक लोग और विशेषज्ञ
पूरी दुनिया में भारत को नीचा दिखाने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी की सफाई आई है! नई दिल्ली के भारत मंडपम (पूर्व में प्रगति मैदान) में आयोजित एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के झूठ ने भारत की विश्व स्तर पर जगहंसाई करा दी। झूठ का बुलबुला फूटा तो गलगोटिया ने सफाई पेश की। इससे पहले वह यही प्रयास करता रहा कि चीन का खरीदा रोबोट उसका मान लिया जाए और जनता की आंखों में धूल झोंककर अपनी वाहवाही कर सके। प्रधानमंत्री बड़े-बड़े दावे करते रहे कि वह विश्व को एक नई राह दिखा रहे हैं जबकि यह एआई समिट मात्र रीलबाजी से आगं नहीं बढ़ सकी…
डॉ एल बी बैरवा-DD News की खबरे देखते हुए मैं ही नहीं पूरा हिंदुस्तान बढ़ा हुआ है। आज वही डीडी न्यूज़ Fake News चला रहा है। मीडिया की हालत बद से बदतर हो चुकी है!
Galgotias ने china से रोबोट ख़रीद कर भारत मंडपम में खुद का बताकर पेश कर दिया है। सोच लो कितने लोग फर्जी डिग्रियों से नौकरी कर रहे होंगे देश-विदेश में?
सरकार ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी को दिखाया बाहर का रास्ता
राजधानी में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट के दौरान उभरे रोबोडॉग विवाद पर आयोजकों ने कड़ा कदम उठाते हुए गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एक्सपो परिसर तुरंत खाली करने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार, समिट में प्रदर्शित एक रोबोटिक डॉग को लेकर उठे विवाद और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद यह कार्रवाई की गई।
हालांकि AI समिति को खाली करने के संबंध में आयोजकों की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी भी प्रकार की भ्रामक प्रस्तुति को लेकर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई गई है।
नेहा सिंह बोलीं- जोश में बात साफ नहीं कह पाई
प्रोफेसर नेहा सिंह ने कहा कि यह विवाद इसलिए हुआ क्योंकि शायद बातें साफ तौर पर नहीं रखी गईं। मैं इसकी जिम्मेदारी लेती हूं। यह सब बहुत जोश और उत्साह में बहुत जल्दी-जल्दी हुआ। सरकार द्वारा एक्सपो एरिया खाली करने के सवाल पर उन्होंने कहा- मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मुझे बस इतना पता है कि आज हम सब यहां मौजूद हैं।
एक्स ने यूनिवर्सिटी के दावे को गलत बताया
यूनिवर्सिटी के स्पष्टीकरण के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने इस पोस्ट पर एक ‘कम्युनिटी नोट’ जोड़ दिया। इसमें कहा गया कि यूनिवर्सिटी का यह दावा कि उन्होंने इसे अपना नहीं बताया, भ्रामक है। एक्स का कम्युनिटी नोट एक ऐसा फीचर है, जिसमें आम यूजर्स ही किसी भ्रामक पोस्ट पर सही जानकारी और संदर्भ जोड़कर उसे फैक्ट-चेक करते हैं।
कांग्रेस बोली- मोदी सरकार ने दुनिया में देश का मजाक बनवाया
कांग्रेस ने इस मामले पर कहा कि मोदी सरकार ने AI के मामले में दुनिया भर में भारत का मजाक बनवाया है। AI समिट में चीन के रोबोट्स को हमारा बताकर दिखाया जा रहा है। चीनी मीडिया ने हमारा मजाक उड़ाया है। यह भारत के लिए वाकई शर्मिंदगी की बात है।
इससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह है कि मोदी के मंत्री अश्विनी वैष्णव भी इसी झूठ में शामिल हैं और भारतीय समिट में चीन के रोबोट्स को प्रमोट कर रहे हैं। मोदी सरकार ने देश की छवि को ऐसा नुकसान पहुंचाया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।




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