जीरकपुर के सुषमा बिल्डर के निदेशकों के खिलाफ हुआ नॉन-बेलेबल वारंट जारी
फ्लैट का कब्जा देने में देरी पर बिल्डर के निदेशकों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट, उपभोक्ता आयोग सख्त
रियल एस्टेट क्षेत्र में उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी पर सख्ती दिखाते हुए उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक अहम आदेश जारी किया है। आयोग ने फ्लैट का समय पर कब्जा न देने के मामले में Sushma Buildtech Limited (एसबीएल) के निदेशकों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं।
यह कार्रवाई चंडीगढ़ निवासी भावना द्वारा दायर निष्पादन याचिका पर की गई, जिसे उनके अधिवक्ता नरेंद्र यादव के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था। मामला उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 72 के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें आयोग के आदेशों की अवहेलना पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
समय पर कब्जा न मिलने पर शुरू हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने ज़ीरकपुर स्थित Sushma Grande NXT परियोजना में एक फ्लैट बुक किया था। 9 जुलाई 2021 को हुए समझौते के अनुसार, बिल्डर को 9 सितंबर 2022 तक फ्लैट का कब्जा सौंपना था। लेकिन निर्धारित समयसीमा के भीतर कब्जा नहीं दिया गया, जिसके बाद उपभोक्ता ने आयोग का दरवाजा खटखटाया।
आयोग के 2025 के आदेश की अवहेलना
मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने 6 मार्च 2025 को बिल्डर को निर्देश दिया था कि वह 45 दिनों के भीतर फ्लैट का कब्जा और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट उपलब्ध कराए। साथ ही, जमा राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया गया था। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि तय समयसीमा में पालन न होने पर ब्याज दर बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दी जाएगी और मानसिक उत्पीड़न के लिए 75,000 रुपये अतिरिक्त मुआवजा भी देना होगा।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आयोग के आदेश ई-मेल के माध्यम से बिल्डर को विधिवत भेजे गए थे, इसके बावजूद उनका पालन नहीं किया गया। हालांकि, बिल्डर की ओर से आंशिक भुगतान के रूप में लगभग 13 लाख रुपये दिए गए, लेकिन न तो फ्लैट का कब्जा सौंपा गया और न ही शेष लगभग 10 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
आयोग की सख्त टिप्पणी और नई कार्रवाई
हालिया सुनवाई में आयोग ने पाया कि बिल्डर के प्रतिनिधि बार-बार भुगतान के लिए समय मांग रहे हैं, जबकि आदेश का पालन अब तक नहीं किया गया। इस पर आयोग ने निर्देश दिया कि प्रतिवादी 5 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट प्रस्तुत करें।
साथ ही, यह भी सामने आया कि पहले जारी किए गए जमानती वारंट निष्पादित नहीं हो सके, क्योंकि संबंधित निदेशक शहर से बाहर बताए गए। इसे गंभीरता से लेते हुए आयोग ने अब उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए हैं, जो 7 अप्रैल को वापसी योग्य (returnable) हैं।
रियल एस्टेट क्षेत्र को कड़ा संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश रियल एस्टेट कंपनियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि उपभोक्ता आयोग के आदेशों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय पर कब्जा न देना और आदेशों का पालन न करना कंपनियों के लिए कानूनी संकट खड़ा कर सकता है।
यह मामला उन हजारों खरीदारों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे समय से अपने आवास का इंतजार कर रहे हैं और बिल्डरों की देरी से परेशान हैं। आयोग की यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।



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