ईरान जंग में ट्रंप की कमजोरी का खुलासा: रूस को राहत देने पर हुए मजबूर
वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान संघर्ष के 14वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने उनकी रणनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कल तक रूस से तेल खरीदने पर कड़े प्रतिबंध और धमकियां देने वाले ट्रंप अब समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद की अस्थाई मंजूरी देने को मजबूर हो गए हैं। इस कदम को विशेषज्ञ अमेरिका की कमजोर होती स्थिति का स्पष्ट संकेत मान रहे हैं।
अमेरिका की दावा और हकीकत
अमेरिका जंग के पहले दिन से ही ईरान पर दबाव बनाने के कई दावे करता रहा। सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद ट्रंप ने घोषणा की थी कि ईरान के पास सरेंडर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। लेकिन 14 दिन बाद ट्रंप को अपनी ही रणनीति में फंसते हुए देखा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी दबाव की पहली सार्वजनिक हार का सबूत है। ट्रंप भले ही दावा करें कि उन्होंने ईरान को हराया है, लेकिन उनके फैसले से वैश्विक तेल बाजार में हलचल बढ़ गई है।
कच्चे तेल की कीमतें $100 पार
जंग के चलते कच्चे तेल की कीमतें चार साल में पहली बार $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। अगर समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो यह दुनिया के लिए गंभीर आर्थिक संकट का कारण बन सकता है।
ट्रंप ने बिना शोर किए समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद की मंजूरी दी है। हालांकि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इसे शॉर्ट-टर्म फैसला बताया और कहा कि इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा। फिर भी, वैश्विक नजर इस फैसले को अमेरिका की मजबूरी के तौर पर देख रही है।
रूस और पुतिन को दूर रखने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ने यह कदम रूस और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को जंग से दूर रखने के लिए उठाया है। अगर रूस सीधे ईरान संघर्ष में शामिल होता, तो अमेरिका समेत कई देशों के लिए स्थिति और जटिल हो सकती थी।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन के मामले के बदले अमेरिका ने ईरान जंग में रूस के साथ सौदा किया। इसके तहत ही समुद्र में फंसे तेल की खरीद को मंजूरी दी गई।
आने वाले दिनों में वैश्विक नजरें
अब देखना यह है कि ट्रंप कौन सा नया फैसला लेकर दुनिया को चौंकाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की मजबूरी और जंग का दबाव अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति और तेल बाजार दोनों पर गहरा असर डालने वाला है।
वैश्विक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में तेल संकट और अमेरिका की रणनीति दुनिया की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।




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