गैस संकट में रसोई में लौट रहा केरोसिन: सरकार ने बनाया बड़ा प्लान
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच घरेलू रसोई गैस (LPG) की अचानक हुई किल्लत के बीच सरकार ने केरोसिन यानी मिट्टी का तेल के अतिरिक्त कोटे का ऐलान किया है। सालों बाद घरेलू इस्तेमाल के लिए केरोसिन की आपूर्ति बढ़ाई गई है, जबकि होटल और रेस्तरां को कोयला और बायोमास जैसे वैकल्पिक ईंधन इस्तेमाल करने की अस्थायी अनुमति दी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में किसी भी तरह की गैस की वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि लोग डर और अफवाहों की वजह से बुकिंग बढ़ा रहे हैं।
क्यों अचानक कम पड़ने लगी गैस?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, जो अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% हिस्सा विदेशों से खरीदता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित सप्लाई के कारण घरेलू गैस वितरण प्रभावित हुआ है। यही मार्ग है जहां से भारत को प्रतिदिन 25-27 लाख बैरल कच्चा तेल मिलता है। इसके अलावा, देश की 55% एलपीजी और 30% एलएनजी आपूर्ति भी इसी रास्ते से होती है।
इस बाधा के चलते पेट्रोलियम कंपनियों ने घरेलू रसोई गैस को प्राथमिकता दी, जिससे होटल और रेस्तरां में गैस आपूर्ति कम हो गई।
होटल और रेस्तरां में वैकल्पिक ईंधन
सरकार ने आतिथ्य क्षेत्र को राहत देते हुए बायोमास, कोयला और आरडीएफ पेलेट जैसे ईंधन एक महीने के लिए इस्तेमाल करने की अस्थायी अनुमति दी है। इससे होटल और रेस्तरां अपने संचालन में ईंधन संकट का सामना कम कर सकेंगे।
केरोसिन का नया कोटा
सरकार ने घरेलू उपयोग के लिए एक लाख किलोलीटर के नियमित कोटे के ऊपर 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त मिट्टी का तेल आवंटित किया है। यह फैसला पिछले एक दशक में केरोसिन के कोटे में सबसे बड़ी वृद्धि माना जा रहा है।
जमाखोरी रोकने के लिए नया नियम
एलपीजी सिलेंडर की अफवाहों और बुकिंग में उछाल को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए नियम कड़े किए हैं। अब ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी वाले सिलेंडर की अगली बुकिंग के लिए न्यूनतम अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 45 दिन कर दी गई है। शहरी क्षेत्रों के लिए यह अवधि 25 दिन ही रखी गई है।
साथ ही घरेलू एलपीजी की डिलीवरी का औसत समय 2.5 दिन ही बना हुआ है और देश में उत्पादन में लगभग 28% की वृद्धि की गई है। अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस समेत 40 देशों से आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
कभी रसोई की शान, फिर हुई गायब
एक समय में केरोसिन ग्रामीण और शहरी घरों में रोजमर्रा का ईंधन था। लालटेन जलाने से लेकर स्टोव पर खाना पकाने तक इसका व्यापक इस्तेमाल होता था। लेकिन सरकार की स्वच्छ ऊर्जा पहल, बिजली और एलपीजी की पहुंच ने इसे लगभग अप्रचलित कर दिया।
2014 में दिल्ली को देश का पहला केरोसिन-मुक्त शहर घोषित किया गया था, और 2019 में राशन की दुकानों पर सब्सिडी बंद होने के बाद आम लोगों के लिए यह ईंधन मुश्किल से उपलब्ध था।
अब वैश्विक युद्ध और ऊर्जा संकट के बीच यही पुराना साथी फिर से रसोई में वापसी कर रहा है, ताकि घरों और वाणिज्यिक स्थलों में खाना पकाने में कोई रुकावट न आए।




Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!