प्रीमियम पेट्रोल ₹2.35 प्रति लीटर तक महंगा: ईरान जंग का असर, सामान्य पेट्रोल की कीमत स्थिर
सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने शुक्रवार को प्रीमियम पेट्रोल—जैसे BPCL का स्पीड, HPCL का पावर और IOCL का XP95—की कीमतों में ₹2.09 से ₹2.35 प्रति लीटर तक बढ़ोतरी कर दी है। यह कदम अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आने के चलते उठाया गया है।
कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी तत्काल प्रभाव से लागू होगी, जबकि सामान्य पेट्रोल और डीजल के दाम में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
प्रीमियम पेट्रोल महंगा क्यों हुआ?
विशेषज्ञों के अनुसार प्रीमियम पेट्रोल की कीमत बढ़ने के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें।
- प्रीमियम फ्यूल में इस्तेमाल होने वाले एडिटिव्स की लागत में इजाफा।
- तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन पर दबाव, जिसे पूरा करने के लिए कीमतों में वृद्धि की गई।
ध्यान रहे कि सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रह रही हैं। प्रीमियम पेट्रोल पहले से ही 5-10 रुपये महंगा होता था, और अब इस अंतर में और वृद्धि हो गई है।
प्रीमियम पेट्रोल किसके लिए जरूरी?
- नॉर्मल कार/बाइक: जिनकी इंजन क्षमता 100cc से 1500cc के बीच है, उनके लिए प्रीमियम पेट्रोल की आवश्यकता नहीं है।
- लग्जरी/स्पोर्ट्स कार: जिन गाड़ियों के मैनुअल में 95 ऑक्टेन फ्यूल लिखा है, केवल वही प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल करें, नहीं तो इंजन में ‘नॉकिंग’ की समस्या हो सकती है।
- पुरानी गाड़ियों के इंजन: कभी-कभी प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल इंजन की सफाई और प्रदर्शन के लिए फायदेमंद हो सकता है।
ऑक्टेन नंबर क्या है?
पेट्रोल की गुणवत्ता को ऑक्टेन नंबर से मापा जाता है। सामान्य पेट्रोल का ऑक्टेन 91 होता है, जबकि प्रीमियम पेट्रोल में 95 या 97 ऑक्टेन होता है। हाई ऑक्टेन फ्यूल इंजन में नॉकिंग को रोकता है और इंजन को स्मूथ चलने में मदद करता है।
अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों का असर
ब्रेंट क्रूड तेल का भाव शुक्रवार को 109.54 डॉलर प्रति बैरल था, जबकि एक दिन पहले यह 117.98 डॉलर तक पहुंच गया था। भारत में कच्चे तेल की कीमतें लगभग दोगुनी होकर 146 डॉलर पर पहुंच गई हैं।
भारत इराक, सऊदी अरब, रूस और UAE से तेल आयात करता है। इन सभी स्रोतों से आने वाले तेलों के औसत मूल्य को ही ‘इंडियन बास्केट’ कहा जाता है।
तीन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क हैं:
- ब्रेंट क्रूड: उत्तरी सागर से आता है, दुनिया का दो-तिहाई तेल इसी भाव पर कारोबार करता है।
- WTI: अमेरिका के जमीनी क्षेत्रों से निकलता है, अमेरिकी बाजार का मुख्य मानक।
- OPEC बास्केट: सऊदी अरब, ईरान, इराक जैसे OPEC देशों द्वारा उत्पादित तेलों का औसत।
प्रीमियम पेट्रोल महंगा होने से क्या बदल सकता है?
- हाई-एंड कार और स्पोर्ट्स बाइक्स के मालिकों का मासिक ईंधन बजट बढ़ जाएगा।
- बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच सकती हैं।
- कंपनियों को प्रीमियम फ्यूल से बेहतर मार्जिन मिलता है, जिससे वे घाटे की भरपाई कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है।
इस बढ़ोतरी का असर मुख्य रूप से प्रीमियम फ्यूल इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों पर होगा, जबकि आम जनता फिलहाल पुराने दामों पर ही सामान्य पेट्रोल और डीजल का उपयोग जारी रख सकती है।




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