मध्य पूर्व तनाव से रुपया दबाव में, 95 प्रति डॉलर तक गिरने की आशंका; बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव
मुंबई: वैश्विक बाजारों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह पहली बार 92.50 के स्तर को तोड़ते हुए करीब 92.63 प्रति डॉलर तक फिसल गया, जबकि सत्र में 92.33 से 92.72 के दायरे में उतार-चढ़ाव देखा गया।
गुरुवार, 19 मार्च की सुबह शुरुआती कारोबार में रुपये की कमजोरी और बढ़ गई तथा यह 93.33 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। एक ही दिन में लगभग 50 पैसे की गिरावट ने निवेशकों और आम उपभोक्ताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
गिरावट के प्रमुख कारण
विश्लेषकों के अनुसार, रुपये में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलकर करीब 103 डॉलर और डब्ल्यूटीआई लगभग 94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। बीते एक महीने में तेल कीमतों में 50% से अधिक की तेजी दर्ज की गई है।
भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 80% आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में वृद्धि से आयात बिल बढ़ता है, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार की चिंताओं को बढ़ाया है।
डॉलर की मजबूती और विदेशी पूंजी निकासी
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों से पूंजी निकासी भी रुपये की कमजोरी के अहम कारणों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में रुपया 92.25 से 92.95 के दायरे में बना रह सकता है।
वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात बने रहने पर रुपया 95 प्रति डॉलर तक गिर सकता है। साथ ही, भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.5% कर दिया गया है और महंगाई तथा चालू खाता घाटे में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है।
शेयर बाजार में भारी गिरावट
रुपये की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। 19 मार्च की सुबह 10:30 बजे तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स करीब 1700 अंकों से अधिक गिर चुका था, जिससे निवेशकों के लगभग 8 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि दिन के अंत तक कुछ रिकवरी संभव है, विशेषकर यदि भारतीय रिजर्व बैंक बाजार में हस्तक्षेप करता है। यदि ऐसा नहीं होता, तो बाजार में गिरावट और रुपये में कमजोरी जारी रह सकती है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये की दिशा काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, कच्चे तेल की कीमतों और मध्य पूर्व के हालात पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो रुपये में अस्थिरता और गिरावट जारी रह सकती है।
महंगाई का बढ़ेगा दबाव
रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। आयात महंगा होने से ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। ऐसे में आने वाले समय में महंगाई के और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।




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