नहीं होगी भारत में रसोई गैस की कमी, सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए निर्देश
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने देश में रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे एलपीजी (LPG) का उत्पादन बढ़ाएं और इसकी प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाए, ताकि किसी भी संभावित वैश्विक संकट का असर आम लोगों की रसोई तक न पहुंचे।
सरकारी आदेश के अनुसार, देश की सभी प्रमुख रिफाइनरियों को अधिकतम क्षमता के साथ एलपीजी का उत्पादन करने को कहा गया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि तैयार गैस की आपूर्ति मुख्य रूप से तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियों — Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited — के माध्यम से ही की जाए, ताकि वितरण प्रणाली सुचारु बनी रहे और घरेलू उपभोक्ताओं तक गैस की आपूर्ति में कोई बाधा न आए।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एलपीजी उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख घटक प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल उद्योग की ओर मोड़ने से बचाया जाए। इन दोनों गैसों का उपयोग एलपीजी बनाने में होता है, इसलिए फिलहाल इन्हें घरेलू गैस उत्पादन के लिए सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।
अधिकारियों का मानना है कि यह कदम किसी भी संभावित वैश्विक आपूर्ति बाधा की स्थिति में देश की घरेलू जरूरतों को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में एलपीजी का घरेलू उपयोग लगातार बढ़ रहा है और देश के अधिकांश घरों में खाना पकाने के लिए यही प्रमुख ईंधन है। हालांकि देश में उत्पादन बढ़ रहा है, फिर भी कुल मांग का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है। वर्तमान में भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत विदेशों से मंगाता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव या समुद्री आपूर्ति मार्गों में किसी तरह की बाधा का असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।
इसी संभावित जोखिम को देखते हुए सरकार ने अग्रिम तैयारी के तौर पर यह कदम उठाया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में कोई रुकावट आती भी है, तब भी देश में घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए पर्याप्त प्रबंध किए जा रहे हैं। सरकार का यह फैसला स्पष्ट संकेत देता है कि वैश्विक ऊर्जा संकट की स्थिति में भी आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।




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