मरीजों का इलाज करने वाले खुद बन रहे मरीज : डॉक्टरों में बढ़ता मानसिक तनाव गंभीर चुनौती, लंबी ड्यूटी बनी मुख्य वजह; ‘हौसला_रख’ अभियान शुरू
देशभर में डॉक्टरों के बीच मानसिक तनाव के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिसका प्रमुख कारण लंबे काम के घंटे, लगातार ड्यूटी और कार्यस्थल का दबाव बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों को औसतन 80 से 100 घंटे तक साप्ताहिक ड्यूटी करनी पड़ती है, जिससे उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है।
विभिन्न अध्ययनों में सामने आया है कि करीब 64% डॉक्टर अत्यधिक कार्यभार को तनाव का सबसे बड़ा कारण मानते हैं, जबकि लगभग 44% मेडिकल छात्र पढ़ाई और प्रदर्शन के दबाव में मानसिक तनाव महसूस करते हैं।
इस स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ चिकित्सक Dr Pankaj Solanki ने डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘#हौसला_रख’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य मेडिकल समुदाय में मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा को बढ़ावा देना और डॉक्टरों को सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।
डॉ. सोलंकी का कहना है कि डॉक्टर भी लगातार दबाव, नींद की कमी और जिम्मेदारियों के बोझ से जूझते हैं, लेकिन अक्सर मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि डॉक्टर बिना झिझक काउंसलिंग और सहायता सेवाओं का लाभ लें।
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टरों का मानसिक तनाव सीधे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि थकान और तनाव से निर्णय क्षमता कमजोर हो सकती है।
अभियान के तहत सुझाव दिया गया है कि रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए काम के घंटे तय किए जाएं, पर्याप्त आराम सुनिश्चित किया जाए, मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग और हेल्पलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा अस्पतालों में मजबूत सपोर्ट सिस्टम विकसित किया जाए।




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