कच्चा तेल 6 महीने के निचले स्तर पर, फिर भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत नहीं; तेल कंपनियां प्रति लीटर ₹11 तक के मार्जिन में
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई कमी नहीं की गई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बास्केट (Indian Basket) का कच्चा तेल करीब 68.69 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले छह महीनों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में राहत नहीं मिली है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकारी तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर प्रति लीटर उल्लेखनीय मार्जिन अर्जित कर रही हैं। ऐसे में आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता हो चुका है, तो घरेलू बाजार में कीमतों में कटौती क्यों नहीं की जा रही।
पेट्रोल पर ₹10.5 और डीजल पर ₹11 प्रति लीटर तक मार्जिन
ब्रोकरेज फर्म डीएएम कैपिटल के विश्लेषण के मुताबिक, मौजूदा कच्चे तेल की कीमतों पर तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल पर लगभग ₹10.5 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹11 प्रति लीटर तक का मार्जिन कमा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब कच्चे तेल की कीमत लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तब कंपनियां लागत और बिक्री मूल्य के बीच लगभग ब्रेक-ईवन की स्थिति में होती हैं। चूंकि जून की शुरुआत से ही कच्चे तेल की कीमतें इस स्तर से नीचे बनी हुई हैं, इसलिए कंपनियां लगातार लाभ की स्थिति में बनी हुई हैं।
युद्ध के बाद तेजी से गिरे कच्चे तेल के दाम
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। उस समय भारतीय बास्केट का कच्चा तेल लगभग 157 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि युद्धविराम के बाद कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई और अब यह करीब 68.69 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुका है।
यानी युद्धकाल के उच्चतम स्तर की तुलना में कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। इसके बावजूद खुदरा ईंधन कीमतों में कोई समानुपातिक कमी देखने को नहीं मिली।
पिछले वर्षों में कीमतों का अंतर
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों के बीच सीधा संबंध लगातार कमजोर होता गया है।
- वर्ष 2018 में कच्चा तेल लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल था। उस समय दिल्ली में पेट्रोल करीब ₹72 और डीजल ₹70 प्रति लीटर बिक रहा था।
- वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान कच्चे तेल की कीमत करीब 43 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई, लेकिन पेट्रोल की कीमतों में सीमित राहत ही मिली।
- वर्ष 2022 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगभग 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, जिसके बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
- जनवरी 2023 में कच्चे तेल की कीमत करीब 75 डॉलर प्रति बैरल तक आने के बावजूद खुदरा कीमतों में कोई बड़ी कटौती नहीं की गई।
उस समय तेल कंपनियों का तर्क था कि पहले हुए नुकसान की भरपाई की जा रही है, इसलिए कीमतों में तत्काल कमी संभव नहीं है।
चौथी तिमाही में भी तेल कंपनियों का मुनाफा मजबूत
तेल कंपनियों के हालिया वित्तीय नतीजे भी यह संकेत देते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद उनका प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है।
जनवरी से मार्च 2026 की चौथी तिमाही में देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 22 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वही अवधि थी जब कच्चे तेल की कीमतें युद्ध के कारण ऊंचे स्तर पर थीं और मार्च के दौरान औसत कीमत करीब 125.7 डॉलर प्रति बैरल रही।
इसके बावजूद कंपनियों के वित्तीय परिणाम सकारात्मक रहे।
निजी कंपनी ने घटाए दाम, सरकारी कंपनियां बनी रहीं स्थिर
देश की प्रमुख निजी ईंधन विक्रेता कंपनी नायरा एनर्जी ने 1 जुलाई को पेट्रोल की कीमत में ₹5 प्रति लीटर और डीजल की कीमत में ₹3 प्रति लीटर की कटौती की थी। इसके बाद कुछ शहरों में उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिली।
हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)—ने अपनी खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।
देश के अधिकांश पेट्रोल पंप इन्हीं सरकारी कंपनियों के नियंत्रण में हैं, इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ताओं को कीमतों में राहत नहीं मिल सकी।
मई में बढ़ाई गई थीं ईंधन की कीमतें
इससे पहले मई महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का हवाला देते हुए सरकारी तेल कंपनियों ने चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कुल ₹7.50 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी।
अब जबकि कच्चे तेल की कीमतें काफी नीचे आ चुकी हैं, उपभोक्ताओं और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियों के पास खुदरा कीमतों में कटौती की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है। हालांकि, कंपनियों की ओर से फिलहाल कीमतों में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।
उपभोक्ताओं की निगाहें अगले फैसले पर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल उपभोक्ता इस उम्मीद में हैं कि तेल कंपनियां और सरकार जल्द ही ईंधन कीमतों की समीक्षा कर आम लोगों को राहत देने का फैसला लेंगी।


Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!