पंचकूला में रामलीला पर फिर विवाद: आस्था के मंच पर प्रतिस्पर्धा या प्रबंधन की विफलता?
रामलीला का आयोजन अक्टूबर में होना है पर उसके लिए महाभारत का रण अप्रैल महीने में ही सजना शुरू हो चुका है। दर्असल इस बार पूरा मामला यवनिका गार्डन में होने वाली रामलीला को लेकर है , जिसमें आयोजिकों का कहना है कि उनके ग्राउंड की बुकिंग रामलीला की होने वाली तारीखों के बीच के दिनों की किसी व्यक्ति द्वारा करवा ली गई है और वह व्यक्ति कोई और नहीं किसी दूसरी रामलीला समिति से जुड़ा हुआ है । आपको बता दे 2025 में भी इन दोनों रामलीलाओं के बीच में रावण दहन को लेकर भी विवाद हुआ था । तब भी दूसरी रामलीला कमेटी के द्वारा रावण दहन जहां होना था उसे ग्राउंड को बुक करवा लिया गया था जिसकी वजह से यवनिका गार्डन रामलीला कमेटी रावण दहन नहीं कर पाई थी ।
अब जानिए क्या हुआ है इस बार पूरा मामला
धार्मिक आयोजनों की गरिमा और सामाजिक एकता के प्रतीक माने जाने वाले रामलीला मंचन को लेकर पंचकूला में एक बार फिर खींचतान शुरू हो गई है। पिछले वर्ष रावण दहन को लेकर दो समितियों के बीच हुआ विवाद अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि 2026 के आयोजन से पहले ही नई तनातनी सामने आने लगी है।
सूत्रों के अनुसार, इस बार विवाद का केंद्र ग्राउंड बुकिंग और आयोजन की निरंतरता है। यवनिका गार्डन में आयोजित होने वाली रामलीला के आयोजकों का कहना है कि पूरे 10 दिन के कार्यक्रम के लिए लगातार स्थल उपलब्ध होना आवश्यक है, लेकिन बीच के दिनों में किसी अन्य पक्ष द्वारा बुकिंग करवा लेने से आयोजन बाधित होने की आशंका पैदा हो गई है। यह स्थिति न केवल कार्यक्रम की योजना को प्रभावित कर रही है, बल्कि आयोजकों के बीच अविश्वास को भी बढ़ा रही है।
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत भी हुई, जिसका एक हिस्सा यवनिका गार्डन रामलीला कमेटी के सदस्य द्वारा रिकॉर्ड भी कर लिया गया है । और रिकॉर्डिंग का वह हिस्सा खबरी प्रसाद अखबार के पास मौजूद भी है ।
हालांकि आधिकारिक स्तर पर कोई पक्ष खुलकर सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने मामले को सुलझाने की कोशिशें जारी हैं। पिछले साल भी इसी तरह के विवाद ने सार्वजनिक रूप ले लिया था, जब रावण दहन को लेकर आरोप-प्रत्यारोप हुए और अंततः समझौते के जरिए स्थिति संभाली गई।
इस बार मामला और संवेदनशील इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यवनिका गार्डन की रामलीला तकनीकी और प्रस्तुति के लिहाज से अधिक आकर्षण का केंद्र बन चुकी है, जहां बड़ी संख्या में दर्शक जुटते हैं। ऐसे में प्रतिस्पर्धा की भावना को भी विवाद के पीछे एक कारण के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि इसे लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है ।
विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों को लेकर इस तरह के विवाद केवल प्रबंधन की कमी ही नहीं, बल्कि समन्वय के अभाव को भी उजागर करते हैं। यदि समय रहते प्रशासन और आयोजन समितियां मिलकर स्पष्ट नियम और पारदर्शी व्यवस्था नहीं बनातीं, तो हर वर्ष इस तरह की स्थिति दोहराई जा सकती है।
आखिरकार, सवाल यह है कि क्या रामलीला जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन प्रतिस्पर्धा और आरोपों के बीच उलझते रहेंगे, या फिर आयोजक और प्रशासन मिलकर इसे सामाजिक सौहार्द और परंपरा के उत्सव के रूप में बनाए रखने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।



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