व्यंग्य: कल, आज और कल
यह सारांश विवेक रंजन श्रीवास्तव की पुस्तक “व्यंग्य: कल, आज और कल” का एक विस्तृत अवलोकन है, जो हिंदी व्यंग्य के सैद्धांतिक आधार, ऐतिहासिक विकास और समकालीन प्रासंगिकता का एक बहुआयामी विश्लेषण है। व्यंग्य की परिभाषा और ऐतिहासिक जड़ें व्यंग्य की प्रकृति और उद्देश्य- व्यंग्य को केवल हास्य नहीं, बल्कि साहित्य की एक सशक्त विधा […]
