चंडीगढ़ से बड़े धार्मिक स्थलों तक सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी पर सवाल, अयोध्या के लिए आस्था स्पेशल के बाद अब नियमित ट्रेन का इंतजार
अयोध्या, वाराणसी, द्वारका, सोमनाथ, तिरुपति, पुरी और रामेश्वरम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए चंडीगढ़ से सीधी रेल सेवा की कमी, श्रद्धालुओं को करना पड़ता है ट्रांसफर या लंबी यात्रा का सामना
चंडीगढ़। देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले चंडीगढ़ और आसपास के श्रद्धालुओं के लिए रेल कनेक्टिविटी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। चंडीगढ़ से अयोध्या धाम के लिए नियमित सीधी ट्रेन उपलब्ध नहीं होने के साथ-साथ वाराणसी के लिए भी सीधी रेल सेवा सीमित दिनों में चलती है। वहीं द्वारका, सोमनाथ, तिरुपति, पुरी और रामेश्वरम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों के लिए भी चंडीगढ़ से सीधी या पर्याप्त आवृत्ति वाली रेल कनेक्टिविटी का अभाव दिखाई देता है।

यह स्थिति ऐसे समय में सवाल खड़े करती है जब पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन और तीर्थ स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। खास तौर पर अयोध्या में राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद देशभर से श्रद्धालुओं को अयोध्या पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया था।
2024 में चंडीगढ़ से चली थी अयोध्या के लिए ‘आस्था स्पेशल’
अयोध्या को लेकर चंडीगढ़ की रेल कनेक्टिविटी का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जनवरी-फरवरी 2024 में चंडीगढ़ से अयोध्या के लिए विशेष ‘आस्था’ ट्रेन चलाई गई थी।
जनवरी 2024 में पंजाब से अयोध्या के लिए विशेष ट्रेनों की घोषणा के दौरान बताया गया था कि पंजाब से चलने वाली प्रस्तावित ट्रेनों में एक ट्रेन चंडीगढ़ से भी संचालित होगी।
इसके बाद फरवरी 2024 में चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से अयोध्या के लिए ‘आस्था स्पेशल’ ट्रेन रवाना हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस ट्रेन में करीब 1,400 श्रद्धालु अयोध्या गए थे।
उस समय इन ट्रेनों को राम मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को अयोध्या पहुंचाने की विशेष व्यवस्था के तौर पर प्रचारित किया गया था। रेलवे ने देश के अलग-अलग हिस्सों को अयोध्या से जोड़ने के लिए बड़ी संख्या में आस्था स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की थी।
सवाल यह है कि विशेष ट्रेन के बाद नियमित ट्रेन क्यों?
यहीं से मौजूदा व्यवस्था को लेकर सवाल उठता है। यदि अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्रा को देखते हुए विशेष ट्रेनों की आवश्यकता महसूस हुई थी, तो क्या अब अयोध्या जाने वाले यात्रियों के लिए स्थायी और नियमित रेल कनेक्टिविटी पर भी विचार नहीं किया जाना चाहिए?
मौजूदा रेल शेड्यूल की उपलब्ध जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ स्टेशन से अयोध्या धाम के लिए सीधी ट्रेन नहीं दिखाई देती। यात्रियों को दिल्ली, लखनऊ, राजपुरा, अंबाला या अन्य स्टेशनों के माध्यम से कनेक्शन तलाशना पड़ सकता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि चंडीगढ़ से अयोध्या पहुंचना संभव नहीं है। कई ट्रेनें चंडीगढ़ से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों तक जाती हैं और वहां से अयोध्या के लिए ट्रेन उपलब्ध हो सकती है। लेकिन चंडीगढ़ से अयोध्या धाम तक सीधी रेल सेवा और कनेक्टिंग यात्रा दो अलग-अलग सुविधाएं हैं।
श्रद्धालुओं, बुजुर्गों और परिवार के साथ यात्रा करने वालों के लिए सीधे ट्रेन का महत्व और बढ़ जाता है। ट्रेन बदलने की जरूरत होने पर सामान, कनेक्शन का समय, प्लेटफॉर्म बदलना और अगली ट्रेन छूटने का जोखिम जैसी परेशानियां सामने आती हैं।
‘क्या आस्था स्पेशल सिर्फ एक विशेष दौर तक सीमित थी?’
2024 में अयोध्या के लिए चली आस्था स्पेशल ट्रेनों को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी काफी उत्साह देखने को मिला था। उस समय पंजाब भाजपा ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को अयोध्या ले जाने का लक्ष्य भी घोषित किया था।
इसी पृष्ठभूमि में अब यह राजनीतिक सवाल भी उठाया जा सकता है कि क्या अयोध्या के लिए विशेष ट्रेन की व्यवस्था केवल मंदिर के उद्घाटन के आसपास की विशेष परिस्थितियों तक सीमित थी, या सरकार और रेलवे की दीर्घकालिक योजना में चंडीगढ़-अयोध्या नियमित रेल सेवा भी शामिल है?
यह कहना कि आस्था स्पेशल ट्रेनें केवल चुनावी उद्देश्य से चलाई गई थीं, एक राजनीतिक आरोप होगा और इसके लिए ठोस प्रमाण आवश्यक होंगे। हालांकि, यह सवाल जरूर पूछा जा सकता है कि यदि उस समय धार्मिक पर्यटन की भारी मांग को देखते हुए विशेष ट्रेनें चलाई जा सकती थीं, तो उसी मांग के आधार पर स्थायी ट्रेन सेवा शुरू करने का आकलन क्यों नहीं किया गया।
वाराणसी के लिए भी सीमित सीधी सेवा
अयोध्या के बाद वाराणसी का उदाहरण भी महत्वपूर्ण है। वाराणसी देश के सबसे प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में शामिल है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
चंडीगढ़ से वाराणसी के बीच ट्रेन संख्या 22356 चंडीगढ़-पाटलिपुत्र सुपरफास्ट एक्सप्रेस सीधी सेवा देती है। उपलब्ध समय-सारिणी के अनुसार यह ट्रेन चंडीगढ़ से सोमवार और गुरुवार को चलती है।
इससे चंडीगढ़-वाराणसी के बीच सीधी रेल सेवा उपलब्ध होने की पुष्टि होती है, लेकिन इसकी आवृत्ति सप्ताह में केवल दो दिन है। अन्य दिनों में यात्रियों को वैकल्पिक ट्रेन या कनेक्टिंग रूट पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
यहां भी सवाल सीधा है—क्या वाराणसी जैसे प्रमुख धार्मिक गंतव्य के लिए चंडीगढ़ से सप्ताह में दो से अधिक दिन सीधी ट्रेन की जरूरत नहीं है?
रामेश्वरम के लिए भी सप्ताह में सिर्फ दो दिन ट्रेन
दक्षिण भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में रामेश्वरम का विशेष धार्मिक महत्व है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल रामनाथस्वामी मंदिर के कारण देशभर से श्रद्धालु रामेश्वरम पहुंचते हैं।
चंडीगढ़ से रामेश्वरम की यात्रा के लिए चंडीगढ़-मदुरै सुपरफास्ट एक्सप्रेस (CDG-MDU SF EXP) एक महत्वपूर्ण विकल्प है। लेकिन यह ट्रेन सप्ताह में केवल दो दिन संचालित होती है।
चंडीगढ़ से दक्षिण भारत की लंबी दूरी की इस ट्रेन की सीमित आवृत्ति को लेकर यात्रियों में ट्रेन के फेरे बढ़ाने की मांग उठती रही है। लोगों का कहना है कि रामेश्वरम जैसे बड़े धार्मिक गंतव्य के लिए सप्ताह में दो दिन की सेवा पर्याप्त नहीं है और यात्रियों की मांग को देखते हुए इसके फेरे बढ़ाए जाने चाहिए।
खासकर लंबी दूरी की धार्मिक यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सप्ताह में अधिक दिनों तक ट्रेन उपलब्ध होने से यात्रा की योजना बनाना आसान हो सकता है। इससे यात्रियों को दिल्ली या दूसरे शहरों से अतिरिक्त कनेक्शन लेने की जरूरत भी कम होगी।
चंडीगढ़ से उत्तर प्रदेश और बिहार की ट्रेनें भी सीमित
चंडीगढ़ से उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए भी रेल सेवाओं की उपलब्धता को लेकर यात्रियों में असंतोष देखने को मिलता है। चंडीगढ़ से लखनऊ, प्रयागराज, पाटलिपुत्र और उत्तर प्रदेश-बिहार के अन्य क्षेत्रों की ओर जाने वाली ट्रेनें हैं, लेकिन यात्रियों की संख्या की तुलना में सेवाएं सीमित बताई जाती हैं।
यात्रियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर जाने वाली कई ट्रेनें अक्सर पूरी तरह पैक रहती हैं। त्योहारों, छुट्टियों, धार्मिक आयोजनों और गर्मी की छुट्टियों के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है।
ट्रेन में सीटों की मांग अधिक होने के कारण यात्रियों को महीनों पहले टिकट बुक कराने पड़ते हैं। तत्काल टिकट पर निर्भर यात्रियों के लिए भी सीट हासिल करना आसान नहीं रहता।
चंडीगढ़ से उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे को नई ट्रेन शुरू करने के साथ-साथ मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कोच लगाने पर भी विचार करना चाहिए।
चंडीगढ़-उदयपुर ट्रेन को लेकर भी यात्रियों के सुझाव
चंडीगढ़ से उदयपुर के बीच चलने वाली CDG-UDZ SF EXP को लेकर भी यात्रियों के बीच अलग तरह की चर्चा है। यह ट्रेन सप्ताह में सीमित दिनों में संचालित होती है।
कुछ यात्रियों का दावा है कि इस ट्रेन में अपेक्षाकृत कम यात्री दिखाई देते हैं, जबकि दूसरी ओर उत्तर प्रदेश, बिहार और धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाली ट्रेनों में सीटों की भारी मांग रहती है।
इसी आधार पर यात्रियों का एक वर्ग सुझाव दे रहा है कि यदि किसी ट्रेन की मांग लगातार कम है, तो रेलवे को उसके रूट और उपयोगिता की समीक्षा करनी चाहिए। लोगों का कहना है कि ऐसी ट्रेन के फेरे या रूट को बदलकर उत्तर प्रदेश, बिहार या किसी प्रमुख धार्मिक मार्ग से जोड़ने की संभावना का अध्ययन किया जा सकता है।
हालांकि, किसी ट्रेन के वास्तविक यात्री भार, आय, संचालन लागत और रेलवे की व्यावसायिक व्यवहार्यता के आंकड़े रेलवे के पास होते हैं। इसलिए अंतिम निर्णय केवल यात्रियों के अनुभव के आधार पर नहीं, बल्कि आधिकारिक आंकड़ों के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही लिया जा सकता है।
फिर भी यात्रियों का सवाल यह है कि जहां लगातार सीटों की कमी है, वहां ट्रेनें बढ़ाई जाएं और जहां मांग अपेक्षाकृत कम है, वहां उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की संभावनाएं क्यों नहीं तलाशी जानी चाहिए?
धार्मिक पर्यटन बढ़ा तो रेल कनेक्टिविटी भी बढ़नी चाहिए
चंडीगढ़ सिर्फ एक केंद्रशासित प्रदेश की राजधानी नहीं है। यह पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के लाखों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र भी है। ऐसे में यहां से धार्मिक स्थलों के लिए सीधी ट्रेनों की मांग का असर केवल चंडीगढ़ शहर तक सीमित नहीं रहेगा।
यदि चंडीगढ़ से अयोध्या, वाराणसी, द्वारका, सोमनाथ, तिरुपति, पुरी और रामेश्वरम जैसे धार्मिक केंद्रों के लिए नियमित ट्रेनें शुरू होती हैं, तो इससे बुजुर्ग यात्रियों, महिलाओं, परिवारों और धार्मिक समूहों को विशेष लाभ हो सकता है।
इसके अलावा इससे धार्मिक पर्यटन, होटल, स्थानीय परिवहन और छोटे कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
चंडीगढ़ से प्रमुख धार्मिक स्थलों की रेल स्थिति
| धार्मिक स्थल | चंडीगढ़ से सीधी ट्रेन की स्थिति | यात्रियों की स्थिति |
|---|---|---|
| अयोध्या धाम | नियमित सीधी ट्रेन नहीं | कनेक्टिंग रूट/अन्य स्टेशन |
| वाराणसी | सीमित सीधी सेवा | सप्ताह में दो दिन सीधी सेवा का विकल्प |
| रामेश्वरम | सीधी ट्रेन उपलब्ध, लेकिन सीमित फेरे | सप्ताह में दो दिन की सेवा बढ़ाने की मांग |
| द्वारका | सीधी कनेक्टिविटी सीमित/नहीं | गुजरात में कनेक्शन की आवश्यकता |
| सोमनाथ | सीधी सेवा नहीं | अन्य स्टेशन से कनेक्शन |
| तिरुपति | सीधी ट्रेन नहीं | दिल्ली/अन्य स्टेशन से कनेक्शन |
| पुरी | सीधी ट्रेन नहीं | कनेक्टिंग ट्रेन आवश्यक |
नोट: ट्रेन सेवाओं और समय-सारिणी में रेलवे द्वारा समय-समय पर बदलाव किए जा सकते हैं। इसलिए यात्रा से पहले नवीनतम रेलवे शेड्यूल की पुष्टि करना जरूरी है।
चंडीगढ़ से निकलने वाली ट्रेनों की तस्वीर क्या बताती है?
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से कई महत्वपूर्ण दिशाओं में ट्रेनें संचालित होती हैं। उपलब्ध सूची में दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, दक्षिण भारत और पंजाब-जम्मू की ओर जाने वाली कई सेवाएं शामिल हैं।
उदाहरण के तौर पर चंडीगढ़ से गोवा संपर्क क्रांति, कर्नाटक संपर्क क्रांति, चंडीगढ़-मदुरै, चंडीगढ़-लखनऊ, चंडीगढ़-पाटलिपुत्र, चंडीगढ़-डिब्रूगढ़, चंडीगढ़-अजमेर, चंडीगढ़-उदयपुर और चंडीगढ़-अमृतसर जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं।
इससे यह साफ है कि चंडीगढ़ से लंबी दूरी की रेल कनेक्टिविटी पूरी तरह कमजोर नहीं है। समस्या विशेष रूप से उन गंतव्यों को लेकर सामने आती है जो धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं लेकिन जहां सीधे पहुंचने के लिए ट्रेन बदलनी पड़ती है।
रेलवे और जनप्रतिनिधियों के सामने उठ सकते हैं ये सवाल
अब सवाल यह है कि क्या चंडीगढ़ से अयोध्या के लिए नियमित ट्रेन शुरू करने का कोई प्रस्ताव रेलवे के पास है? क्या सप्ताह में दो दिन चलने वाली चंडीगढ़-वाराणसी सेवा को बढ़ाने की मांग पर विचार किया जा रहा है? क्या रामेश्वरम जाने वाली चंडीगढ़-मदुरै सुपरफास्ट एक्सप्रेस के फेरे बढ़ाए जा सकते हैं? क्या द्वारका-सोमनाथ, तिरुपति और पुरी जैसे धार्मिक केंद्रों के लिए चंडीगढ़ से नई सीधी ट्रेन शुरू करने का सर्वे या मांग आकलन किया गया है?
इसी के साथ उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए लगातार बढ़ रही यात्री मांग को देखते हुए क्या नई ट्रेनें शुरू करने या मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की योजना है?
और यदि चंडीगढ़-उदयपुर जैसी किसी ट्रेन में वास्तव में अपेक्षित यात्री मांग नहीं है, तो क्या रेलवे उसके संचालन की समीक्षा करके ज्यादा मांग वाले रूट पर ट्रेन उपलब्ध कराने की संभावनाओं का अध्ययन कर सकता है?
और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—जब 2024 में अयोध्या के लिए विशेष आस्था ट्रेन के जरिए चंडीगढ़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को एक साथ ले जाया जा सकता था, तो क्या अब उसी मांग के आधार पर स्थायी रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में भी विचार नहीं होना चाहिए?
2024 में चंडीगढ़ से अयोध्या के लिए विशेष ट्रेन चलने का तथ्य दर्ज है; इसलिए आज की स्थिति में यह मांग उठाना स्वाभाविक है कि विशेष अवसरों पर चलने वाली धार्मिक ट्रेन को स्थायी रेल कनेक्टिविटी में बदलने की दिशा में भी रेलवे विचार करे।
चुनावी वादे से आगे, स्थायी सुविधा की जरूरत
अयोध्या को लेकर राजनीतिक दलों ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले और राम मंदिर के उद्घाटन के आसपास धार्मिक भावनाओं को प्रमुखता से उठाया था। ऐसे में राजनीतिक दलों से यह सवाल पूछना लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा है कि क्या धार्मिक आस्था से जुड़े बड़े आयोजनों के दौरान दिखाई गई सक्रियता को स्थायी जनसुविधाओं में बदला गया है?
हालांकि, यह निष्कर्ष निकालना कि आस्था स्पेशल ट्रेनें केवल चुनावी लाभ के लिए चलाई गई थीं, बिना प्रमाण के उचित नहीं होगा। लेकिन यह सवाल जरूर जायज है कि यदि अयोध्या के लिए इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की यात्रा की योजना बनाई गई थी, तो क्या रेलवे को अब उस मांग के आधार पर नियमित सेवा पर विचार नहीं करना चाहिए?
चंडीगढ़ के यात्रियों की मांग किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष की बात से अधिक एक बुनियादी परिवहन सुविधा का सवाल है।
धार्मिक आस्था देश के करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा है। ऐसे में प्रमुख तीर्थ स्थलों तक आसान, सीधी और नियमित रेल कनेक्टिविटी केवल धार्मिक यात्रियों की सुविधा नहीं, बल्कि देश के पर्यटन और परिवहन ढांचे को मजबूत करने का भी माध्यम बन सकती है।
अब निगाहें रेलवे, रेल मंत्रालय और चंडीगढ़-पंजाब-हरियाणा से जुड़े जनप्रतिनिधियों पर हैं कि क्या वे इन मांगों को सिर्फ विशेष ट्रेनों और मौसमी व्यवस्थाओं तक सीमित रखते हैं या चंडीगढ़ को देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों से जोड़ने के लिए स्थायी रेल नेटवर्क की दिशा में ठोस पहल करते हैं।




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