जंतर-मंतर प्रदर्शन में हिंसा के बाद सवाल: क्या छात्र आंदोलन में घुस गए असामाजिक तत्व? पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक मामले को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन बुधवार रात हिंसक झड़प के बाद तनावपूर्ण स्थिति में पहुंच गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। दिल्ली पुलिस सूत्रों का दावा है कि प्रदर्शन में कुछ बाहरी असामाजिक तत्व शामिल होकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने कथित तौर पर नुकीले पत्थरों और बोतलों से पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया, जिसके बाद स्थिति उग्र हो गई। हालांकि, प्रदर्शन से जुड़े संगठनों ने हिंसा के लिए अलग-अलग आरोप लगाए हैं और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
दो एसीपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल
बुधवार शाम जंतर-मंतर पर हुई झड़प में दो एसीपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए। देर रात दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) जोन-1 देवेश चंद्र श्रीवास्तव घायल जवानों का हाल जानने के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों से इलाज की जानकारी ली और पुलिसकर्मियों का हालचाल जाना।
जंतर-मंतर पर सुरक्षा बढ़ाई गई
हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। इलाके में बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों से बातचीत का रास्ता खुला रखा गया है, इसलिए सुरक्षा बल संयम बरत रहे हैं।
पुलिस का दावा- प्रदर्शन को हाईजैक करने की कोशिश
दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुछ लोग छात्रों की भीड़ में शामिल होकर हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस का आरोप है कि ऐसे लोग अचानक हमला करते हैं और फिर पूरी भीड़ का माहौल आक्रामक हो जाता है।
जांच एजेंसियां प्रदर्शन स्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं। पुलिस का कहना है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
चेहरे ढककर पहुंचे कुछ प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन स्थल से सामने आई तस्वीरों में कुछ लोगों के चेहरे ढके हुए दिखाई दिए। पुलिस के अनुसार, ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे वास्तविक प्रदर्शनकारी थे या किसी उद्देश्य से भीड़ में शामिल हुए थे।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लगाए आरोप
वहीं, प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठनों ने पुलिस के आरोपों को खारिज किया है। प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि आंदोलन लंबे समय से शांतिपूर्ण चल रहा था और हिंसा के लिए बाहरी लोगों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सरकार से बातचीत कर छात्रों की मांगों का समाधान निकालने की अपील की।
आगे की रणनीति पर नजर
पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा यह आंदोलन अब राजनीतिक रूप भी ले चुका है। एक ओर सरकार बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष और छात्र संगठन लगातार अपनी मांगों को लेकर दबाव बना रहे हैं।
फिलहाल जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और पुलिस हिंसा की घटनाओं की जांच में जुटी है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि आंदोलन बातचीत के रास्ते आगे बढ़ता है या टकराव जारी रहता है।



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