कम वोटिंग से बढ़ी भाजपा की चिंता ? स्ट्रॉन्ग रूम के कैमरे बंद होने पर विपक्ष का हंगामा, पंचकूला नगर निगम चुनाव के बाद राजनीतिक माहौल गरमाया
पंचकूला नगर निगम चुनाव के लिए मतदान संपन्न होने के बाद अब शहर का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गरमा गया है। रविवार को हुई अपेक्षाकृत कम वोटिंग ने जहां राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी, वहीं सोमवार सुबह स्ट्रॉन्ग रूम के कैमरे बंद होने की सूचना सामने आने के बाद विपक्ष ने जोरदार हंगामा खड़ा कर दिया। चुनाव परिणाम आने से पहले ही अब चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता, ईवीएम सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
नगर निगम चुनाव में इस बार भारतीय जनता पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी थी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित भाजपा के कई बड़े नेताओं ने लगातार चुनाव प्रचार किया और मेयर से लेकर पार्षद उम्मीदवारों तक के लिए माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बावजूद इसके मतदान प्रतिशत अपेक्षा से काफी कम रहा, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचकूला जैसे शहरी क्षेत्र में कम मतदान हमेशा सत्ता पक्ष के लिए चिंता का विषय माना जाता है। खासतौर पर इस बार शहर के कई पॉश सेक्टरों और उच्च वर्गीय इलाकों में मतदान प्रतिशत बेहद कम रहा। चर्चा इस बात को लेकर भी होती रही कि आखिरकार शहर का वह वर्ग, जिसकी सरकार तक सीधी पहुंच मानी जाती है और जो अक्सर चुनावी चर्चाओं में सक्रिय दिखाई देता है, मतदान केंद्रों तक क्यों नहीं पहुंचा।
अगर मतदान प्रतिशत के आंकड़ों की बात करें तो शहरी इलाकों में कई स्थानों पर लगभग 40 प्रतिशत तक ही मतदान होने की चर्चा रही, जबकि गांवों और कॉलोनियों में मतदान प्रतिशत काफी अधिक देखने को मिला। कई क्षेत्रों में 80 से 85 प्रतिशत तक मतदान होने की बात कही जा रही है। यही कारण रहा कि मतदान समाप्त होते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था।
इसी बीच सोमवार सुबह स्ट्रॉन्ग रूम के कैमरे बंद होने की सूचना सामने आने के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया। बताया गया कि सेक्टर-14 स्थित स्टेट गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज में बनाए गए स्ट्रॉन्ग रूम का एक सीसीटीवी कैमरा सुबह 9 बजकर 21 मिनट से लेकर लगभग 11 बजकर 11 मिनट तक बंद रहा। यही वह स्ट्रॉन्ग रूम है जहां नगर निगम चुनाव में इस्तेमाल हुई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को सुरक्षा व्यवस्था के बीच रखा गया है।
कैमरा बंद होने की जानकारी सामने आते ही विभिन्न राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों में हड़कंप मच गया। कांग्रेस की मेयर पद की उम्मीदवार सुधा भारद्वाज सहित कई प्रत्याशी मौके पर पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रत्याशियों का कहना था कि जहां ईवीएम मशीनें रखी गई हैं वहां लगभग दो घंटे तक कैमरा बंद रहना बेहद गंभीर विषय है और इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
घटना के बाद स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर काफी देर तक हंगामे जैसी स्थिति बनी रही। प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने जिला प्रशासन, चुनाव अधिकारियों और इलेक्शन ऑब्जर्वर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कई नेताओं का कहना था कि यदि कैमरे तकनीकी कारणों से बंद हुए तो इसकी तत्काल जानकारी सभी प्रत्याशियों को क्यों नहीं दी गई और उस दौरान वैकल्पिक निगरानी की क्या व्यवस्था थी।
हालात को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी और इलेक्शन ऑब्जर्वर भी मौके पर पहुंचे और प्रत्याशियों को समझाने का प्रयास किया। इस दौरान पंचकूला के विधायक चौधरी चंद्रमोहन भी स्ट्रॉन्ग रूम स्थल पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। मौके पर मौजूद प्रत्याशियों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और कैमरा बंद होने के वास्तविक कारण सार्वजनिक किए जाएं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और बात राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई। विपक्षी दलों के नेताओं ने सवाल उठाया कि जहां कांग्रेस, इंडियन नेशनल लोकदल, आम आदमी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों के प्रतिनिधि स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर मौजूद थे, वहीं भारतीय जनता पार्टी की ओर से न तो मेयर उम्मीदवार और न ही किसी पार्षद उम्मीदवार की मौजूदगी दिखाई दी। विपक्ष ने इसे लेकर भी सवाल खड़े किए।
कुछ नेताओं ने कहा कि यदि भाजपा नेताओं को कैमरे बंद होने की जानकारी पहले से थी तो यह बेहद गंभीर विषय है और यदि जानकारी नहीं थी तो फिर वे स्ट्रॉन्ग रूम स्थल पर मौजूद क्यों नहीं थे। विपक्षी नेताओं ने यहां तक सवाल उठा दिए कि क्या भाजपा को चुनाव परिणामों को लेकर पहले से कोई संकेत था। हालांकि इन सवालों का कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया और ना ही प्रशासन की ओर से इस विषय पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी गई।
इसी बीच इंडियन नेशनल लोकदल के मेयर पद के उम्मीदवार मनोज अग्रवाल ने पूरे मामले को लेकर राज्य चुनाव आयोग को औपचारिक शिकायत भेज दी। अपने पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि स्ट्रॉन्ग रूम में लगे सीसीटीवी कैमरों का बंद होना चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आशंका जताई कि यह जानबूझकर किया गया हो सकता है जिससे किसी विशेष उम्मीदवार को फायदा पहुंचाया जा सके।
मनोज अग्रवाल ने अपने शिकायत पत्र में राज्य चुनाव आयोग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाने, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, तकनीकी रिकॉर्ड और कंट्रोल रूम लॉग सुरक्षित रखने तथा स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्ट्रॉन्ग रूम के कैमरे बंद होने की घटना ने अब चुनावी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो चुके हैं और शहर में इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। चुनाव परिणाम आने से पहले इस तरह का विवाद प्रशासन और चुनाव आयोग दोनों के लिए चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।
अब सभी की नजरें प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगामी मतगणना पर टिकी हुई हैं। फिलहाल पूरे मामले को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।



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