मेयर उम्मीदवार के कार्यक्रम में पोस्टर को लेकर विवाद, महाराजा अग्रसेन की तस्वीर नीचे लगाने पर अग्रवाल समाज में नाराजगी
पंचकूला में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी के मेयर पद के उम्मीदवार श्यामलाल बंसल के समर्थन में सेक्टर-16 स्थित अग्रवाल भवन में आयोजित एक जनसभा उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब मंच पर लगाए गए पोस्टर को लेकर अग्रवाल समाज के लोगों ने आपत्ति जताई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे, लेकिन पोस्टर की प्रस्तुति ने पूरे आयोजन की दिशा बदल दी और इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया।
जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम के मंच पर लगाए गए पोस्टर में महाराजा अग्रसेन की तस्वीर सबसे नीचे लगाई गई थी, जबकि उसके ऊपर भाजपा के शीर्ष नेताओं की तस्वीरें प्रदर्शित की गई थीं। अग्रवाल समाज में महाराजा अग्रसेन को अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ पूजा जाता है और उन्हें समाज का आराध्य माना जाता है। ऐसे में उनकी तस्वीर को नीचे स्थान देने को कई लोगों ने अनुचित और असम्मानजनक बताया।
पोस्टर में महाराजा अग्रसेन की तस्वीर के साथ ही श्यामलाल बंसल का नाम भी अंकित था। इसके ऊपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, सांसद रेखा शर्मा और सांसद कार्तिकेय शर्मा की तस्वीरें लगाई गई थीं। वहीं पोस्टर के ऊपरी हिस्से में पार्टी के अन्य नेताओं की तस्वीरें भी शामिल थीं, जिससे यह पूरा पोस्टर एक राजनीतिक प्रचार सामग्री के रूप में सामने आया।
कार्यक्रम के दौरान ही कई अग्रवाल समाज के लोगों ने इस प्रस्तुति पर नाराजगी जताई। हालांकि, कार्यक्रम की गरिमा और माहौल को ध्यान में रखते हुए खुलकर विरोध नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार, आयोजन में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और उच्च स्तर के कार्यक्रम होने के कारण मंच पर लगे पोस्टर को तुरंत बदलना संभव नहीं था। ऐसे में उपस्थित लोगों को स्थिति को संभालने और विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए शांत रहने की सलाह दी गई।
इसके बावजूद, कार्यक्रम के दौरान पोस्टर की तस्वीरें कैमरों में कैद हो गईं और बाद में यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया। सोशल और स्थानीय स्तर पर इसको लेकर बहस शुरू हो गई है। कई लोग इसे अनजाने में हुई गलती बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए आयोजकों की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की छोटी दिखने वाली बातें भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं, खासकर जब मामला किसी समाज की आस्था और सम्मान से जुड़ा हो। ऐसे आयोजनों में प्रतीकों और प्रस्तुतिकरण को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
फिलहाल आयोजकों या संबंधित पक्ष की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अग्रवाल समाज के भीतर इस घटना को लेकर असंतोष की भावना देखी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले पर कोई स्पष्टीकरण या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं या नहीं।



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