पंजाब में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर लगातार धमाके: 4 महीने में दूसरी बार साजिश, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर
पंजाब में रेलवे सुरक्षा को झकझोर देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां पटियाला जिले के राजपुरा और शंभू रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) पर जोरदार विस्फोट हुआ। इस घटना ने एक बार फिर देश के महत्वपूर्ण माल ढुलाई नेटवर्क की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार यह पिछले चार महीनों में दूसरी ऐसी घटना है, जिसमें इसी कॉरिडोर को निशाना बनाकर रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। इससे पहले जनवरी 2026 में फतेहगढ़ साहिब के पास भी इसी तरह का विस्फोट हुआ था, जिसमें ट्रैक को गंभीर क्षति पहुंची थी।
रात के अंधेरे में हुआ धमाका, ट्रैक को पहुंचा नुकसान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार रात पटियाला-शंभू सेक्शन के पास एक कम तीव्रता वाला विस्फोट हुआ, जिससे रेलवे ट्रैक का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंचीं।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि विस्फोट ट्रैक पर किसी संदिग्ध उपकरण के जरिए किया गया था, जिससे पटरी को आंशिक नुकसान पहुंचा। हालांकि, गनीमत रही कि उस समय कोई यात्री ट्रेन नहीं गुजर रही थी, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई।
विस्फोटक लगाने वाले की मौत, संदिग्ध गतिविधियों के संकेत
पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने बताया कि घटनास्थल से एक शव बरामद हुआ है, जिसकी पहचान विस्फोटक लगाने वाले व्यक्ति के रूप में की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि विस्फोटक को सक्रिय करने के दौरान ही वह व्यक्ति खुद धमाके की चपेट में आ गया।
पुलिस ने मौके से एक सिम कार्ड, तार, और कुछ तकनीकी उपकरण भी बरामद किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है।
SSP ने कहा, “यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होती है। सभी सबूतों की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।”
दो घटनाएं, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
यह इस वर्ष दूसरी बड़ी घटना है जब डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को निशाना बनाया गया है। इससे पहले जनवरी 2026 में फतेहगढ़ साहिब के पास हुए विस्फोट में मालगाड़ी के इंजन को भी नुकसान पहुंचा था और करीब 12 से 15 फीट तक रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया था।
लगातार दो घटनाओं ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में आतंकी साजिश की आशंका
रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और पंजाब पुलिस की संयुक्त टीमें जांच में जुटी हैं। प्रारंभिक स्तर पर जांच एजेंसियां इस घटना को केवल आपराधिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क से जुड़ी साजिश के रूप में देख रही हैं।
कुछ अधिकारियों के अनुसार, इस घटना के पीछे विदेशी कनेक्शन की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर किसी भी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है।
तकनीकी और फॉरेंसिक जांच जारी
घटनास्थल से मिले अवशेषों को फॉरेंसिक लैब भेज दिया गया है। विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस्तेमाल किए गए विस्फोटक की प्रकृति क्या थी और उसे ट्रैक पर कैसे फिट किया गया।
इसके अलावा आसपास के CCTV फुटेज, मोबाइल डाटा और लोकेशन ट्रैकिंग की भी जांच की जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सुरक्षा की मांग
इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाया है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
विशेषज्ञों की राय: रणनीतिक ढांचे को निशाना बनाना गंभीर संकेत
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसे रणनीतिक ढांचे पर हमला केवल स्थानीय स्तर की घटना नहीं हो सकती। यह देश की लॉजिस्टिक और आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
पंजाब में लगातार दो बार डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को निशाना बनाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। हालांकि पुलिस का दावा है कि जांच अंतिम चरण में है, लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और जांच एजेंसियां हर एंगल से मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हैं।




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