वार्ड नंबर-3 में भाजपा की स्थिति उलझी, आखिर असली उम्मीदवार कौन ?
दो उम्मीदवारों के दावे से बढ़ा सस्पेंस; नामांकन वापसी पर टिकी नजर
नगर निगम चुनावों के नामांकन के अंतिम दिन वार्ड नंबर-3 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अधिकृत उम्मीदवार को लेकर बड़ा राजनीतिक असमंजस सामने आ गया है। पूर्व पार्षद रितु गोयल और सुरेश वर्मा दोनों ने खुद को पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार बताते हुए नामांकन दाखिल किया है, जिससे वार्ड में भाजपा की स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सूत्रों और मौके से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड नंबर-3 से रितु गोयल नामांकन पत्र भरने पहुंचीं और उन्होंने दावा किया कि उनके पास भाजपा का टिकट है। वहीं दूसरी ओर सुरेश वर्मा ने भी यही दावा किया कि पार्टी ने उन्हें अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है और उन्होंने भी नामांकन प्रक्रिया पूरी की।
दोनों उम्मीदवारों के एक ही वार्ड से भाजपा समर्थित होने के दावे के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल गहराता जा रहा है कि आखिर वार्ड नंबर-3 से भाजपा का वास्तविक अधिकृत उम्मीदवार कौन है।


पार्टी में अंदरूनी असमंजस की स्थिति
दोनों दावेदारों के एक साथ मैदान में उतरने से पार्टी संगठन के भीतर भी स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा रही है। फिलहाल भाजपा की ओर से आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वार्ड नंबर-3 से अंतिम उम्मीदवार कौन होगा, जिससे कार्यकर्ताओं और स्थानीय मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
नामांकन वापसी की समयसीमा पर नजर
चुनाव प्रक्रिया के अनुसार नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 28 अप्रैल निर्धारित की गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व जल्द ही इस विवाद को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है। संभावना जताई जा रही है कि पार्टी किसी एक उम्मीदवार को मनाने या नामांकन वापस करवाने की कोशिश करेगी, ताकि वार्ड में एकजुटता के साथ चुनाव लड़ा जा सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि दोनों में से कोई भी उम्मीदवार नाम वापस नहीं लेता है, तो इसका सीधा असर भाजपा के वोट बैंक और चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर असर
वार्ड नंबर-3 को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां बनिया समुदाय का प्रभावी वोट बैंक है। ऐसे में भाजपा के भीतर दो उम्मीदवारों के दावे से मतदाताओं में भी भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
इसी बीच यह भी उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम के दौरान भी अपेक्षित भीड़ नहीं जुट पाने को लेकर स्थानीय राजनीतिक माहौल पर सवाल उठे थे। इस पृष्ठभूमि में वार्ड नंबर-3 की स्थिति को भाजपा के लिए संवेदनशील माना जा रहा है।
पार्टी के लिए चुनौती
यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं होती है और नामांकन वापसी नहीं करवाई जाती, तो यह भाजपा के लिए चुनावी स्तर पर चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। फिलहाल सभी की नजरें 28 अप्रैल पर टिकी हैं, जब नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी और स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हो सकेगी।


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