वार्ड नंबर 1 : अधूरे वादों की बयार के बीच भाजपा उम्मीदवारों को करना पड़ेगा सवालों का सामना !
पिछली बार इस वार्ड से भाजपा के टिकट पर नरेंद्र लुंबाना जीतकर जनता की बात रखने के लिए सदन में पहुंचे थे । इस बार यह वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है । यानी इस वार्ड से सिर्फ और सिर्फ महिलाएं ही चुनाव लड़ सकती हैं ।
नगर निगम चुनाव से पहले वार्ड नंबर-1 इस बार राजनीतिक रूप से खासा चर्चित होता नजर आ रहा है। महिला आरक्षित घोषित होने के बाद यहां चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं, लेकिन पिछली बार किए गए वादों की अधूरी कहानी अब भी मतदाताओं के बीच प्रमुख मुद्दा बनी हुई है।
पिछले चुनाव में भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र लुबाना ने जीत हासिल करते हुए क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं को सुधारने के कई वादे किए थे। इनमें भैंसा टिब्बा और गांधी कॉलोनी में पानी की समस्या का समाधान तथा मानव कॉलोनी को पक्का कराने का आश्वासन प्रमुख था। यहां तक की चुनाव के दौरान गांधी कॉलोनी के निवासियों को पक्के घरों में शिफ्ट करने के भी वादे किए गए थे पर धरातल पर यह सभी वादे हवा हवाई साबित हुए ।
हालांकि, पांच साल बीतने के बाद भी इन मुद्दों पर ठोस प्रगति न होने से स्थानीय लोगों में असंतोष देखा जा रहा है। खास बात यह भी है कि इस दौरान राज्य से लेकर केंद्र तक भाजपा की सरकार रही, बावजूद इसके समस्याएं जस की तस बनी रहीं।
अब एक बार फिर चुनावी मैदान सज चुका है और पूर्व प्रतिनिधि नरेंद्र लबाना की ओर से अपनी धर्मपत्नी को उम्मीदवार के रूप में आगे लाने की चर्चा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पुराने वादों पर फिर भरोसा किया जाएगा या जनता इस बार जवाबदेही तय करेगी।
भाजपा की ओर से इस वार्ड में कई महिला चेहरे टिकट की दौड़ में हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय अधिकारी रह चुकीं और समाजसेवी रंजू प्रसाद के साथ-साथ ममता सिंगला का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। इसके अलावा भी कई दावेदार सक्रिय हैं, जो संगठन और सामाजिक कार्यों के आधार पर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं।


कांग्रेस भी इस वार्ड में अपनी रणनीति के तहत परमजीत कौर को संभावित उम्मीदवार के रूप में देख रही है, जो स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ बनाने की कोशिश में हैं। परमजीत कौर पोला लंबरदार की धर्मपत्नी है जिनकी क्षेत्र में मजबूत पकड़ बताई जाती है ।

अगर भाजपा और कांग्रेस में उम्मीदवारों की बात की जाए तो वार्ड नंबर 1 में भाजपा के पास कई उम्मीदवार नजर आ रहे हैं तो कांग्रेस में फिलहाल उम्मीदवारों की कमी दिखाई पड़ रही है ।
वहीं इंडियन नेशनल लोकदल ऐसे चेहरों को मौका देने की रणनीति पर काम कर रही है, जो अन्य दलों से असंतुष्ट हैं।
जननायक जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी ने चुनाव लड़ने के मुद्दे पर अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं तो इसलिए अभी यह नहीं कहा जा सकता कि यह दोनों पार्टियों निगम चुनाव में मैदान में उतरेंगे या नहीं उतरेंगे ।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार वार्ड-1 का चुनाव केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि भरोसे और प्रदर्शन के बीच मुकाबला होगा।
कुल मिलाकर, वार्ड नंबर-1 में इस बार चुनावी जंग के साथ-साथ जवाबदेही की परीक्षा भी होने वाली है, जहां मतदाता अपने मुद्दों के आधार पर फैसला लेते नजर आ सकते हैं।




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