पैसे से प्रीमियम क्लास का टिकट तो आ सकता है पर अक्ल नहीं !
वंदे भारत में ‘क्लास’ पर बहस: पैसेंजर ने खाने की ट्रे पर रखा पैर, सोशल मीडिया पर मचा बवाल
देश की प्रीमियम ट्रेन Vande Bharat Express में यात्रियों के व्यवहार को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। सिकंदराबाद–तिरुपति रूट पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेन में एक यात्री द्वारा खाने की ट्रे टेबल पर पैर रखने की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद ‘सिविक सेंस’ पर तीखी चर्चा शुरू हो गई।
वायरल तस्वीर में देखा जा सकता है कि घटना Secunderabad से Tirupati के बीच चलने वाली ट्रेन (नंबर 20701-20702) की है। एक सह-यात्री ने इस हरकत की फोटो लेकर सोशल प्लेटफॉर्म Reddit पर पोस्ट कर दी, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गई।
तस्वीर में देखा जा सकता है कि यात्री ने फूड सर्विस के लिए बनी ट्रे टेबल पर नंगे पैर रखे हुए हैं, जबकि उसी टेबल पर पानी की बोतल और अखबार रखा हुआ है। यह दृश्य देखकर अन्य यात्रियों में नाराजगी देखी गई।
‘महंगा टिकट, लेकिन शिष्टाचार?’
वंदे भारत ट्रेन को आरामदायक और हाई-स्टैंडर्ड यात्रा के लिए जाना जाता है, जहां टिकट भी अपेक्षाकृत महंगा होता है। ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि केवल टिकट खरीद लेना ही पर्याप्त नहीं, सार्वजनिक स्थानों पर व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कई यूजर्स ने इस घटना को ‘पब्लिक स्पेस के प्रति लापरवाही’ बताते हुए आलोचना की, जबकि कुछ ने इसे व्यापक सामाजिक समस्या—सिविक सेंस की कमी—से जोड़ा।
कमेंट सेक्शन में तीखी प्रतिक्रियाएं
वायरल पोस्ट को हजारों लाइक्स और सैकड़ों प्रतिक्रियाएं मिल चुकी हैं। कुछ यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी, जबकि कई लोगों ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की। एक वर्ग का मानना है कि ऐसे व्यवहार को वहीं रोकना चाहिए, जबकि अन्य ने टकराव से बचने की सलाह दी।
तस्वीर में यह भी सामने आया कि संबंधित यात्री के साथ एक बच्चा भी सफर कर रहा था। इस पर कई यूजर्स ने चिंता जताई कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह का व्यवहार अगली पीढ़ी पर गलत असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन इसके साथ नागरिक शिष्टाचार का विकास भी जरूरी है। वंदे भारत जैसी ट्रेनों में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं इस अंतर को उजागर करती हैं।
यह मामला सिर्फ एक वायरल तस्वीर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि क्या हम आधुनिक सुविधाओं के साथ आधुनिक व्यवहार भी अपना पा रहे हैं या नहीं।



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