कहीं ‘सुषमा बिल्डर’ देश छोड़ने की तैयारी में तो नहीं?
वित्तीय संकट के संकेतों ने बढ़ाई चिंता, परियोजनाएं ठप, निवासियों में रोष
रीतेश माहेश्वरी
ट्राइसिटी क्षेत्र के रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़ा नाम माने जाने वाले ‘सुषमा बिल्डर ग्रुप’ को लेकर इन दिनों गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रुप की आर्थिक स्थिति को लेकर लगातार सामने आ रही जानकारियों और परियोजनाओं में आई ठहराव ने निवेशकों और निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि यह आशंका भी जोर पकड़ने लगी है कि कहीं बिल्डर ग्रुप देश छोड़ने की तैयारी तो नहीं कर रहा।
परियोजनाओं पर काम ठप, मूलभूत सुविधाओं का संकट
मोहाली जिले और आसपास के इलाकों में सुषमा ग्रुप के कई प्रोजेक्ट्स लंबे समय से चल रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों से इनमें से अधिकांश परियोजनाओं पर काम या तो पूरी तरह बंद है या बेहद धीमी गति से चल रहा है। जिन परियोजनाओं में लोगों को कब्जा दिया जा चुका है, वहां भी बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव देखने को मिल रहा है।
निवासियों के अनुसार, कई जगहों पर बिजली के बिल जमा न होने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है, वहीं पानी की समस्या भी लगातार बनी हुई है। रोजमर्रा की इन परेशानियों से जूझ रहे लोग बार-बार बिल्डर प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा।
निवासियों को छोड़िए पत्रकारों को भी नहीं मिल रहा जवाब
निवासियों का आरोप है कि बिल्डर के फोन नंबर या तो बंद आ रहे हैं या कॉल का कोई जवाब नहीं दिया जा रहा। वहीं, पत्रकारों द्वारा भी लगातार संपर्क साधने की कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। न तो फोन कॉल्स का जवाब मिल रहा है और न ही व्हाट्सएप या अन्य माध्यमों पर सुषमा मैनेजमेंट की तरफ से कोई प्रतिक्रिया दी जा रही है।
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि बिल्डर के दफ्तर तक पहुंचने या मैनेजमेंट से बात करने की कोशिशों के बावजूद कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इससे स्थिति और अधिक संदिग्ध बनती जा रही है।
‘सुषमा जॉय नेक्स्ट’ प्रोजेक्ट में हुआ था विरोध प्रदर्शन
पिछले सप्ताह सुषमा ग्रुप के एक प्रोजेक्ट ‘सुषमा जॉय नेक्स्ट’ में निवासियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि बिल्डर द्वारा बिजली का बिल जमा नहीं किया गया, जिसके चलते न तो बिजली मिल रही है और न ही पानी की सप्लाई सुचारु रूप से हो पा रही है।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने बिल्डर के खिलाफ नारेबाजी की और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की। बावजूद इसके, बिल्डर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अबतक सामने नहीं आई।
पहले भी हो चुकी हैं प्रेस कॉन्फ्रेंस, पर नहीं निकला समाधान
यह पहला मामला नहीं है जब सुषमा ग्रुप को लेकर विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी निवेशकों और खरीदारों द्वारा चंडीगढ़, जीरकपुर और पंचकूला में कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपनी समस्याएं उजागर की जा चुकी हैं।
हालांकि, इन सभी प्रयासों के बावजूद बिल्डर प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कभी-कभार फोन उठने पर भी केवल आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं दिखता।
पुश्तैनी संपत्ति की बिक्री ने बढ़ाई आशंका
इन घटनाक्रमों के बीच एक और तथ्य ने लोगों की चिंताओं को और गहरा कर दिया है। जानकारी के अनुसार, सुषमा ग्रुप के मालिकों ने हाल ही में चंडीगढ़ स्थित अपनी पुश्तैनी संपत्ति को लगभग 100 करोड़ रुपये में बेच दिया है।
इस बड़े वित्तीय लेनदेन के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि ग्रुप अपनी संपत्तियों को समेटकर बाहर जाने की तैयारी में तो नहीं है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
निवासियों और निवेशकों ने अब प्रशासन और रेरा (RERA) से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी जीवनभर की कमाई इन परियोजनाओं में फंसी हुई है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सुषमा बिल्डर ग्रुप की चुप्पी और लगातार बिगड़ते हालात ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। जहां एक ओर लोग अपने घरों में मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिल्डर की ओर से किसी भी प्रकार की पारदर्शिता या जवाबदेही का अभाव स्थिति को और चिंताजनक बना रहा है।
अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई और बिल्डर के अगले कदम पर टिकी है, जो यह स्पष्ट करेगा कि यह केवल अस्थायी वित्तीय संकट है या किसी बड़े घटनाक्रम की आहट।
खबरी प्रशाद अखबार जनता की आवाज बनकर लगातार बिल्डर से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है पर बिल्डर की तरफ से ना तो फोन पर ना ही व्हाट्सएप पर किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया दी जा रही है। जब भी बिल्डर अपनी कोई प्रतिक्रिया जाहिर करेंगे , उनकी प्रतिक्रिया को भी उचित स्थान अखबार में दिया जाएगा।





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