अब ” पायलट ” के भरोसे पंजाब में कांग्रेस की गाड़ी : पंजाब कांग्रेस में बड़ा फेरबदल: बघेल आउट, पायलट की एंट्री; चन्नी-वड़िंग की गुटबाजी पर हाईकमान का ‘एक्शन’
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने राज्य संगठन को लेकर बड़ा बदलाव किया है। शनिवार को पार्टी हाईकमान ने भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी पद से हटाकर सचिन पायलट को नई जिम्मेदारी सौंपी है। इस फेरबदल को पंजाब कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भूपेश बघेल को दिसंबर 2023 में देवेंद्र यादव के बाद पंजाब का प्रभारी बनाया गया था। हालांकि, उनके कार्यकाल में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच मतभेद खत्म नहीं हो सके। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अंदरूनी गुटबाजी का असर संगठन की गतिविधियों और पार्टी की चुनावी तैयारियों पर भी पड़ा।
राहुल गांधी के प्लान में पायलट की एंट्री
पंजाब में 2027 के चुनाव को देखते हुए कांग्रेस अब युवा चेहरे सचिन पायलट के जरिए संगठन को सक्रिय करने की रणनीति पर आगे बढ़ती दिख रही है। शनिवार देर शाम पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने नए प्रभारियों की घोषणा की।
फेरबदल के तहत रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात, सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, सिरिवेला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी.वी. मोहन को आंध्र प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है।
पंजाब में गुटबाजी का मुद्दा इतना गंभीर रहा कि सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी की प्रस्तावित पंजाब यात्रा भी टल गई थी। ऐसे में पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन के भीतर मतभेद कम कर कांग्रेस को 2027 की चुनावी लड़ाई के लिए एकजुट करना होगी।
2027 से पहले पायलट के सामने ‘पंजाब मिशन’, गुटबाजी खत्म कर AAP से सत्ता छीनने की चुनौती
पंजाब कांग्रेस की नई जिम्मेदारी संभालने के साथ ही सचिन पायलट के सामने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कई बड़ी चुनौतियां हैं। सबसे अहम काम चरणजीत सिंह चन्नी, राजा वड़िंग, प्रताप सिंह बाजवा समेत अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाना और संगठन को चुनाव के लिए मजबूत करना होगा।
हाईकमान ने फिलहाल नेताओं को ‘पहले जीत, मुख्यमंत्री बाद में’ का संदेश दिया है। पार्टी चाहती है कि सीएम पद की दावेदारी को लेकर खींचतान के बजाय नेता आम आदमी पार्टी को सत्ता से हटाने पर फोकस करें।
इसी रणनीति के तहत राहुल गांधी की प्रस्तावित यूनिटी बस यात्रा को अहम माना जा रहा है। यात्रा अमृतसर से शुरू होने और स्वर्ण मंदिर में राहुल गांधी के मत्था टेकने की संभावना है। इसके बाद इसे पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों तक ले जाने की योजना बताई जा रही है, ताकि प्रमुख नेताओं को एकजुट किया जा सके।
कांग्रेस चुनाव अभियान, कोर कमेटी, घोषणापत्र और चुनाव प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां अलग-अलग नेताओं को सौंपकर शक्ति संतुलन बनाने की कोशिश में भी है। हालांकि, पायलट के लिए सबसे बड़ा जोखिम यही रहेगा कि टिकट बंटवारे या चुनावी फैसलों में किसी एक खेमे के करीब दिखने पर उन पर भी पक्षपात के आरोप लग सकते हैं।
बघेल हटे, पायलट आए: पंजाब में कांग्रेस ने क्यों बदला ‘गेम प्लान’?
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस हाईकमान ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया है। भूपेश बघेल को अब असम की जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव के पीछे पंजाब कांग्रेस की लगातार जारी गुटबाजी को बड़ी वजह माना जा रहा है।
पार्टी के भीतर चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वड़िंग के बीच मतभेद लंबे समय से चर्चा में हैं। बघेल पर वड़िंग के प्रति झुकाव रखने के आरोप भी लगे, जबकि विरोधी खेमे ने उनकी मध्यस्थता पर सवाल उठाए। पंजाब में बघेल के खिलाफ नारे और पोस्टर सामने आने से भी विवाद बढ़ा था।
पायलट पर हाईकमान का भरोसा क्यों?
कांग्रेस अब पायलट को ऐसे चेहरे के तौर पर देख रही है जो अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन कायम कर सके। पार्टी को उनके राजस्थान और हिमाचल चुनावों के अनुभव का भी फायदा मिलने की उम्मीद है। 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में पायलट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे, जबकि 2022 के हिमाचल चुनाव में उन्हें पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई थी। और सत्ता में कांग्रेस की सरकार बन गई थी ।





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