सरकार का चुनावी फैसला : पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती, कीमतों पर तुरंत राहत की उम्मीद कम
केंद्र सरकार ने बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों के बीच उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर केंद्रीय कर घटकर 3 रुपए प्रति लीटर रह गया है, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।
सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। हाल के हफ्तों में कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गया है, जिससे तेल विपणन कंपनियों पर भारी दबाव बना हुआ है।
कंपनियों पर घाटे का दबाव
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां फिलहाल पेट्रोल पर करीब 24 रुपए और डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर तक का नुकसान झेल रही हैं। ऐसे में यदि टैक्स में कटौती नहीं की जाती, तो कंपनियां खुदरा कीमतों में वृद्धि कर सकती थीं।
क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
हालांकि एक्साइज ड्यूटी घटाई गई है, लेकिन उपभोक्ताओं को पंप पर तुरंत 10 रुपए प्रति लीटर की राहत मिलने की संभावना कम है। इसकी वजह यह है कि पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम सीधे सरकार तय नहीं करती, बल्कि ये तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों और अपने मार्जिन के आधार पर निर्धारित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां इस टैक्स राहत का उपयोग अपने पिछले घाटे की भरपाई के लिए करेंगी।
सरकार के राजस्व पर असर
इस निर्णय से केंद्र सरकार के राजस्व पर भी असर पड़ेगा। अनुमान है कि रोजाना करीब 416 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। पेट्रोल और डीजल की दैनिक खपत के आधार पर यह कमी तय की गई है।
निजी कंपनियों का रुख
निजी क्षेत्र की तेल कंपनियों ने पहले ही कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। हाल ही में एक निजी कंपनी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपए और डीजल के 3 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ाए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि मौजूदा कीमतों पर बिक्री करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की कीमतों का भविष्य पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करेगा। यदि कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं या आपूर्ति प्रभावित होती है, तो घरेलू बाजार में भी कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में एक्साइज ड्यूटी में की गई यह कटौती केवल एक “बफर” की तरह काम करेगी।
राज्यों पर भी नजर
केंद्र के इस फैसले के बाद अब राज्यों पर भी वैट (VAT) कम करने का दबाव बढ़ सकता है। यदि राज्य सरकारें भी टैक्स में कटौती करती हैं, तो उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत मिल सकती है।
सरकार का पक्ष
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले को आम जनता को महंगाई से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक संकट का सीधा असर आम लोगों पर न पड़े।
ऊर्जा सुरक्षा पर भरोसा
इस बीच, पेट्रोलियम मंत्रालय ने देश में ईंधन की कमी की आशंकाओं को खारिज किया है। मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त भंडार है, जो लगभग 60 दिनों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।
एक्साइज ड्यूटी में कटौती से तत्काल कीमतों में बड़ी गिरावट भले न दिखे, लेकिन यह कदम बढ़ती वैश्विक कीमतों के असर को कम करने और तेल कंपनियों को राहत देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय हालात और राज्यों के फैसले तय करेंगे कि आम उपभोक्ता को वास्तविक राहत कितनी मिलती है।




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