युद्ध काल : दाल रोटी खाना भी होगा महंगा !
पश्चिम एशिया तनाव का वैश्विक असर: तेल से आगे बढ़ा संकट, अब खाद्य और अनाज के साथ दुनिया में भुखमरी का संकट
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। World Food Programme की हालिया चेतावनी के अनुसार, यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो दुनिया में भुखमरी का संकट और गहरा सकता है। अनुमान है कि जारी संघर्ष लंबा खिंचने पर करोड़ों लोग अतिरिक्त रूप से खाद्य असुरक्षा की चपेट में आ सकते हैं।
इस उभरते संकट की जड़ में केवल कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ही नहीं, बल्कि उर्वरकों की आपूर्ति में आई बाधाएं भी हैं। पश्चिम एशिया का रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz, जो वैश्विक ऊर्जा और व्यापार के लिए बेहद अहम है, इन दिनों तनाव का केंद्र बना हुआ है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी मार्ग से गुजरता है। यहां बढ़ती अस्थिरता के कारण समुद्री परिवहन महंगा और धीमा हो गया है, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुई हैं।
ऊर्जा संकट का सीधा असर कृषि लागत पर पड़ता है। ईंधन महंगा होने से खेती, सिंचाई और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ जाती है। लेकिन इससे भी बड़ा संकट उर्वरकों, विशेषकर यूरिया, की उपलब्धता में गिरावट के रूप में सामने आ रहा है। खाड़ी क्षेत्र वैश्विक यूरिया उत्पादन और निर्यात का प्रमुख केंद्र है। गैस आपूर्ति बाधित होने के कारण कई उत्पादन इकाइयों में कटौती या ठहराव देखने को मिला है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों के दाम तेजी से बढ़े हैं।
इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ रहा है, जो अपनी उर्वरक जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं। गैस की सीमित उपलब्धता के चलते घरेलू उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। वहीं, अन्य एशियाई देशों में तो उत्पादन इकाइयों के बंद होने की खबरें हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति और सिमट गई है।
चिंता की बात यह है कि यह संकट ऐसे समय आया है जब उत्तरी गोलार्ध में बुवाई का चरम मौसम होता है। इस दौरान उर्वरकों की कमी या बढ़ी कीमतें किसानों को कम इस्तेमाल के लिए मजबूर कर सकती हैं, जिसका सीधा असर गेहूं, चावल, मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार पर पड़ेगा। कृषि उत्पादन में थोड़ी सी गिरावट भी वैश्विक बाजार में कीमतों को तेजी से ऊपर ले जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन घटा और लागत बढ़ी, तो इसका अंतिम बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ेगी और सरकारों पर सब्सिडी का दबाव भी बढ़ेगा। पहले से ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला Russia-Ukraine War के कारण दबाव में है, ऐसे में नया भू-राजनीतिक संकट स्थिति को और नाजुक बना सकता है।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का यह तनाव अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा और महंगाई के लिए एक बड़ा जोखिम बनकर उभर रहा है। आने वाले महीनों में इसके प्रभाव सीधे आम लोगों की रसोई तक महसूस किए जा सकते हैं।




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