ईरान युद्ध अपडेट: 8 घंटों में बदली जंग की दिशा, होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा रणक्षेत्र
मध्य-पूर्व में जारी युद्ध ने पिछले कुछ घंटों में बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। ताज़ा घटनाक्रम संकेत दे रहे हैं कि संघर्ष अब अपने सबसे संवेदनशील चरण में प्रवेश कर चुका है। सैन्य गतिविधियों, राजनीतिक बयानबाज़ी और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे ने वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के नए संभावित सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei शुरुआती हमलों में घायल हुए हैं और फिलहाल सक्रिय नेतृत्व की स्थिति में नहीं हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह पहली बार होगा जब ईरान में प्रभावी सर्वोच्च नेतृत्व को लेकर गंभीर अनिश्चितता पैदा होगी।
युद्ध के शुरुआती चरण में ही ईरान को कई बड़े झटके लगे हैं। सैन्य सूत्रों के अनुसार देश के शीर्ष सुरक्षा ढांचे को नुकसान पहुँचा है और सैन्य खुफिया प्रमुख Abdullah Jalali Nasab की मौत की भी खबर सामने आई है। इससे ईरानी कमान और रणनीतिक नियंत्रण पर दबाव बढ़ा है।
हालाँकि इन झटकों के बावजूद ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता ने दुनिया का ध्यान खींचा है। रिपोर्टों के मुताबिक पहली बार ईरान ने Sejjil सॉलिड-फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सॉलिड-फ्यूल मिसाइलों का उपयोग यह संकेत देता है कि पारंपरिक लिक्विड-फ्यूल लॉन्च सिस्टम पर भारी हमले हुए हैं, जिसके कारण तेज़ प्रतिक्रिया वाली मिसाइल प्रणाली सक्रिय की गई है।
इस समय संघर्ष का सबसे संवेदनशील क्षेत्र Strait of Hormuz बन गया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी Islamic Revolutionary Guard Corps के अंदरूनी आकलन के अनुसार यदि ईरान इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण खो देता है, तो युद्ध में उसकी स्थिति बेहद कमजोर हो सकती है। इसी बीच खबरें हैं कि अमेरिकी मरीन बल Persian Gulf की दिशा में बढ़ रहे हैं।
राजनयिक मोर्चे पर भी अमेरिका को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा। जानकारी के अनुसार Donald Trump ने Japan और France से युद्धपोत भेजकर होर्मुज मार्ग को सुरक्षित करने में मदद मांगी, लेकिन जापान ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया, जबकि फ्रांस ने कहा कि वह संघर्ष समाप्त होने के बाद ही किसी सैन्य तैनाती पर विचार करेगा।
युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेल आपूर्ति में बड़ी रुकावट आती है तो G7 देशों के रणनीतिक तेल भंडार भी केवल लगभग 7.5% तक की कमी की ही भरपाई कर पाएंगे। मध्य-पूर्व मामलों के विश्लेषक Vali Nasr का मानना है कि यदि ईरान की पारंपरिक सत्ता संरचना कमजोर पड़ती है तो देश परमाणु हथियार कार्यक्रम को तेज़ करने का जोखिम भरा रास्ता भी चुन सकता है।
मानवीय और आर्थिक नुकसान भी तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि दो सप्ताह के भीतर इस युद्ध में 3000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से लगभग 2400 मौतें अकेले ईरान में हुई हैं। वहीं अमेरिकी सैन्य नुकसान लगभग 3.8 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। आधुनिक युद्ध की विषमता भी सामने आई है, जहाँ लगभग 20 हजार डॉलर के ड्रोन ने 20 लाख डॉलर के रडार सिस्टम को नष्ट कर दिया।
इसी बीच क्षेत्र में एक और खतरा उभरता दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार Houthi movement के विद्रोही अब आत्मघाती ड्रोन के जरिए मालवाहक जहाजों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में एक नया समुद्री संकट पैदा हो सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन इस युद्ध की दिशा तय कर सकते हैं, क्योंकि समुद्री मार्गों, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन—तीनों पर एक साथ दबाव बढ़ता जा रहा है।


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