व्यंग्य : बुरा न मानो होली है
ढोल और होली के हुड़दंगियों की ज्यों ही कान के पास आवाज आई मैं सिहर गया। पत्नी जो दरवाजे के पास बैठी पापड़ खा रही थी। बोली आज धुरेंडी खेलने नहीं जाएंगे। मैं बोला क्यों? वह बोली देखा नहीं पिछले वर्ष पड़ोसी मिश्राजी को लोगों ने गन्दी गटर में किस तरह पटका था और बेचारे […]
